PM-KISAN Scheme RTI report showing budget allocation and expenditure analysis over seven financial years for Indian farmers.
PM-KISAN Scheme: देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई PM-KISAN Scheme एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या नहीं, बल्कि बजट और वास्तविक खर्च से जुड़ा एक महत्वपूर्ण खुलासा है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले सात वित्तीय वर्षों में PM-KISAN Scheme के लिए निर्धारित बजट और वास्तविक व्यय के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। आंकड़े बताते हैं कि चार वित्तीय वर्षों में सरकार आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर सकी, जबकि तीन वर्षों में तय राशि से अधिक खर्च करना पड़ा।
यह स्थिति बताती है कि PM-KISAN Scheme के संचालन के दौरान लाभार्थियों की संख्या, पात्रता जांच, नए पंजीकरण और भुगतान प्रक्रिया में लगातार बदलाव होते रहे, जिसका सीधा असर बजट प्रबंधन पर पड़ा।
RTI से सामने आए सात वर्षों के खर्च के आंकड़े
RTI के जरिए प्राप्त जानकारी के अनुसार, योजना की शुरुआत के बाद से वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक सरकार ने हर वर्ष अलग-अलग बजट निर्धारित किया। इनमें कई वर्षों में वास्तविक खर्च बजट से कम रहा, जबकि कुछ वर्षों में सरकार को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि PM-KISAN Scheme जैसी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) आधारित योजनाओं में लाभार्थियों की संख्या लगातार बदलती रहती है। नए किसानों का पंजीकरण, अपात्र लाभार्थियों का हटना और भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं के कारण वास्तविक भुगतान अनुमानित बजट से अलग हो सकता है।
चार वर्षों में पूरा बजट खर्च नहीं हो सका
RTI के अनुसार चार वित्तीय वर्षों में आवंटित राशि का पूरा उपयोग नहीं हो पाया। इसकी प्रमुख वजह लाभार्थियों का सत्यापन, आधार लिंकिंग, बैंक खातों की त्रुटियां और पात्रता जांच को माना जा रहा है।
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में PM-KISAN Scheme को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC), आधार प्रमाणीकरण और भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल सत्यापन को अनिवार्य किया। इसके चलते बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई जो योजना की पात्रता पूरी नहीं करते थे। परिणामस्वरूप कई किस्तों का भुगतान रोका गया और कुल खर्च अनुमानित बजट से कम रहा।
तीन वित्तीय वर्षों में बजट से ज्यादा खर्च क्यों हुआ?
दूसरी ओर, तीन वित्तीय वर्षों में वास्तविक व्यय निर्धारित बजट से अधिक दर्ज किया गया। इसका मुख्य कारण नए पात्र किसानों का तेजी से पंजीकरण, लंबित किस्तों का भुगतान और अतिरिक्त लाभार्थियों को योजना में शामिल किया जाना माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार वित्तीय वर्ष के दौरान पात्र किसानों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार को संशोधित अनुमान (Revised Estimate) या अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति के जरिए भुगतान सुनिश्चित करना पड़ता है। PM-KISAN Scheme में यह स्थिति विशेष रूप से तब देखने को मिली जब राज्यों ने बड़ी संख्या में नए पात्र किसानों का डेटा केंद्र को भेजा।
क्या है PM-KISAN Scheme?
PM-KISAN Scheme केंद्र सरकार की प्रमुख किसान कल्याण योजनाओं में शामिल है। इसकी शुरुआत वर्ष 2019 में छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी।
योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
देश के करोड़ों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली प्रमुख योजनाओं में गिनी जाती है।
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ई-केवाईसी और सत्यापन ने बदली तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने PM-KISAN Scheme में कई सुधार किए हैं। ई-केवाईसी अनिवार्य होने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे रिकॉर्ड सामने आए, जिनमें आधार, बैंक खाते या भूमि संबंधी जानकारी में त्रुटियां थीं।
इसके अलावा कई राज्यों में डुप्लीकेट लाभार्थियों और अपात्र लोगों के नाम हटाए गए। इससे जहां सरकारी धन की बचत हुई, वहीं पात्र किसानों तक योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिली।
कृषि विशेषज्ञों की राय
कृषि नीति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बजट और वास्तविक खर्च में अंतर किसी भी बड़ी कल्याणकारी योजना में असामान्य नहीं माना जाता। यदि लाभार्थियों की संख्या बदलती है या पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया मजबूत होती है, तो वास्तविक भुगतान का आंकड़ा अनुमान से ऊपर या नीचे जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भविष्य में राज्यों और केंद्र के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया और अधिक सटीक होने पर बजट अनुमान वास्तविक खर्च के करीब पहुंच सकते हैं।
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किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह खुलासा?
RTI से सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार PM-KISAN Scheme में पारदर्शिता और पात्रता सत्यापन पर अधिक जोर दे रही है। इससे पात्र किसानों को समय पर लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी, जबकि अपात्र लोगों को योजना से बाहर रखा जा सकेगा।
आने वाले समय में डिजिटल रिकॉर्ड, आधार सत्यापन और भूमि अभिलेखों के बेहतर समन्वय से योजना का संचालन और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। वहीं बजट और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को कम करने के लिए भी सरकार नई रणनीति अपना सकती है, ताकि PM-KISAN Scheme का लाभ सही किसानों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।
