Anti Paper Leak Bill 2026: Union Parliament passes Anti Paper Leak Bill 2026 to strengthen action against exam paper leaks and ensure transparent public examinations.
Anti Paper Leak Bill: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहे असर के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Anti Paper Leak Bill को और अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित हो गया है। इस संशोधन के बाद अब पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित परीक्षा अपराधों पर पहले से कहीं अधिक कठोर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना, युवाओं के भविष्य की रक्षा करना और परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
Anti Paper Leak Bill को क्यों लाना पड़ा?
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के कई मामले सामने आए। विशेष रूप से NEET-UG, भर्ती परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया। इन घटनाओं के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में लागू कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए Anti Paper Leak Bill में संशोधन प्रस्तुत किया, जिसे अब लोकसभा की मंजूरी मिल गई है।
पेपर लीक करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
संशोधित कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करता है, परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करता है या ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नए प्रावधानों के अनुसार दोषी को कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा ₹50 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि सख्त दंड व्यवस्था परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगी।
संगठित अपराध पर और भी कठोर प्रावधान
यदि किसी संगठित गिरोह, संस्था या नेटवर्क द्वारा पेपर लीक या परीक्षा में धांधली की जाती है, तो कानून और अधिक कठोर होगा।
ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष की सजा तथा ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में संगठित परीक्षा माफिया सक्रिय पाए गए हैं, जिन्हें समाप्त करने के लिए यह कदम आवश्यक था।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
Anti Paper Leak Bill की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था है। संशोधित कानून के अनुसार सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर सकेंगे। इन अदालतों में मामले की सुनवाई प्रतिदिन होगी और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों तक मुकदमे लंबित रहने की समस्या को समाप्त करना है।
दो महीने में पूरी होगी जांच
कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाएगी। इसके अलावा केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी मिलेगा, जो बड़े और संगठित मामलों की जांच करेगी। सरकार का मानना है कि तेज जांच और शीघ्र सुनवाई से दोषियों को जल्दी सजा मिल सकेगी।
विशेष लोक अभियोजकों की होगी नियुक्ति
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकें। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और तकनीकी कारणों से मामलों में देरी की संभावना कम होगी।
हाई कोर्ट में अपील की भी तय समय सीमा
यदि किसी आरोपी या संबंधित पक्ष को अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करनी होगी तो उसकी सुनवाई भी समयबद्ध तरीके से होगी।
संशोधित कानून के अनुसार अपील हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी और अपील स्वीकार होने के बाद तीन महीने के भीतर उसका निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार ने कानून को बताया जरूरी सुधार
लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन सरकार की सीखने और सुधार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि Anti Paper Leak Bill को मजबूत बनाने का उद्देश्य युवाओं का विश्वास बहाल करना है। मंत्री के अनुसार 2024 में कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और विभिन्न राज्यों में कार्रवाई लगातार जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में त्वरित कार्रवाई की और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी तथा कानूनी दोनों स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं।
लोकसभा में विपक्ष ने उठाए सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने भी अपनी राय रखी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और इस संबंध में सरकार को जवाब देना चाहिए। हालांकि उनके बयान पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
स्पीकर और सरकार ने जताई आपत्ति
राहुल गांधी के आरोपों पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं है और यदि कोई गंभीर आरोप लगाया जाता है तो उसके समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और उनसे अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना तथ्य के ऐसे आरोप सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ेगा भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि Anti Paper Leak Bill के नए प्रावधान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। यदि जांच, सुनवाई और सजा की समयबद्ध व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे पेपर लीक जैसे अपराधों पर अंकुश लग सकता है।
सरकार का दावा है कि यह कानून केवल दोषियों को दंडित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य की रक्षा करने का प्रयास भी है। आने वाले समय में इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर ही इसकी वास्तविक सफलता निर्भर करेगी।
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