Stock Market Crash as Sensex falls 382 points and Nifty declines 118 points amid heavy selling in IT and metal stocks
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को निवेशकों के लिए कारोबारी सत्र निराशाजनक रहा। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान खासतौर पर IT, मेटल, रियल्टी और सरकारी बैंकिंग शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 382.62 अंक टूटकर 76,132.81 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का निफ्टी 118.55 अंक की गिरावट के साथ 23,779.15 के स्तर पर बंद हुआ। Stock Market Crash के दौरान निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी और कई प्रमुख शेयरों में ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिली।
सेंसेक्स 382 अंक और निफ्टी 118 अंक नीचे बंद
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में शुरुआत से ही दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए जोखिम वाले शेयरों में खरीदारी से दूरी बनाई। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन कारोबार के अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव बढ़ने से प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद हुए।
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Stock Market Crash का असर सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। बाजार के कई सेक्टर्स में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा जरूर दिया। निवेशकों के लिए सोमवार का सत्र यह संकेत भी लेकर आया कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
IT शेयरों में बिकवाली से बढ़ा बाजार पर दबाव
सोमवार की गिरावट में सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT सेक्टर की बड़ी भूमिका रही। IT कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ने से निफ्टी और सेंसेक्स दोनों पर दबाव दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर IT कंपनियों की कारोबारी संभावनाओं पर पड़ सकता है। भारतीय IT कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों, खासतौर पर अमेरिका और यूरोप से आता है।
ऐसे में वहां की आर्थिक स्थिति, ब्याज दरें और कॉर्पोरेट खर्च में बदलाव भारतीय IT कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। Stock Market Crash के दौरान IT शेयरों में कमजोरी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रही। बाजार में यह आशंका भी दिखाई दी कि अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कमजोर बनी रहती हैं तो टेक्नोलॉजी सेक्टर में दबाव कुछ समय तक जारी रह सकता है।
मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में भी गिरावट
IT सेक्टर के साथ मेटल शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की। वैश्विक मांग और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर मेटल कंपनियों के शेयरों पर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर मेटल सेक्टर में सतर्क रुख अपनाते हैं।
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इसके अलावा सरकारी बैंकों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। रियल्टी और मीडिया सेक्टर में भी निवेशकों की बिकवाली जारी रही। निफ्टी में सबसे ज्यादा नुकसान वाले प्रमुख शेयरों में इन्फोसिस, SBI Life और HDFC Life जैसे नाम शामिल रहे। इन शेयरों में गिरावट का असर पूरे बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने दिया सहारा
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बावजूद कुछ सेक्टर्स मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिसने Stock Market Crash के दौरान बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखने में मदद की।
जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अपेक्षाकृत रक्षात्मक सेक्टर्स की ओर रुख कर सकते हैं। फार्मा और हेल्थकेयर को अक्सर ऐसे सेक्टर्स में गिना जाता है, जिनकी मांग आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। मिडकैप सूचकांक 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक मामूली 0.02 प्रतिशत की बढ़त बचाने में सफल रहा।
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वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल पर बाजार की नजर
भारतीय शेयर बाजार की दिशा फिलहाल कई अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित हो सकती है। वैश्विक बाजारों की चाल, प्रमुख देशों की ब्याज दर नीति, अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के फैसलों पर असर डाल सकती हैं।
भारत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। सोमवार के Stock Market Crash ने यह भी दिखाया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम लेने के बजाय सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।
निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर बना अहम
बाजार विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार इस स्तर के आसपास टिके रहने या इसे मजबूती से पार करने में सफल होता है तो आगे की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
वहीं तकनीकी रूप से 24,000 का स्तर निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर बना हुआ है। जब तक निफ्टी इस स्तर को मजबूती से पार नहीं करता, तब तक ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है।
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नीचे की ओर 23,750 से 23,700 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर के नीचे जाता है तो बाजार में गिरावट बढ़ने की संभावना बन सकती है और सूचकांक 23,600 के स्तर की ओर भी बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसले लेना जोखिम भरा हो सकता है। Stock Market Crash जैसी स्थिति में निवेशकों को अपने निवेश की अवधि, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट और तेज उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। वहीं छोटे समय के ट्रेडर्स को महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
सोमवार की गिरावट के बाद आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख सेक्टर्स की चाल पर रहेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है और IT तथा मेटल शेयरों की अगली चाल भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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