Artificial lake formed after landslide blocked the Chameliya River near the India-Nepal border
Chameliya River Artificial Lake: उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे नेपाल के दार्चुला जिले में हुए भारी भूस्खलन ने भारत और नेपाल दोनों देशों के प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के अपिहिमाल क्षेत्र के भट्टाड़ इलाके में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा खिसकने के बाद चमेलिया नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी में मलबा जमा होने से वहां पानी रुकने लगा और एक कृत्रिम झील बनने की स्थिति पैदा हो गई।
Chameliya River Artificial Lake बनने की खबर के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है और मलबे से बना प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है, तो बड़ी मात्रा में जमा पानी तेज बहाव के साथ निचले इलाकों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि झील का जलस्तर कम होने के बाद फिलहाल स्थिति कुछ हद तक सामान्य बताई जा रही है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में लगातार भूस्खलन के कारण खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
भारी बारिश के बाद पहाड़ी दरकी और रुक गया नदी का बहाव
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को नेपाल के सीमांत दार्चुला जिले की अपि हिमाल गांव पालिका के वार्ड नंबर-1 भट्टाड़ में भारी बारिश के दौरान भीषण भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर नीचे आने के बाद चमेलिया नदी का बहाव प्रभावित हुआ। मलबा नदी के प्रवाह क्षेत्र तक पहुंचने से पानी एक स्थान पर जमा होने लगा।
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इसी वजह से Chameliya River Artificial Lake बनने की स्थिति पैदा हुई। पहाड़ी नदियों में इस तरह मलबा जमा होने से बनने वाले अस्थायी अवरोधों को काफी संवेदनशील माना जाता है। क्योंकि पानी लगातार जमा होता रहता है और किसी समय दबाव बढ़ने पर प्राकृतिक अवरोध टूट सकता है। ऐसी स्थिति में अचानक आने वाला तेज बहाव निचले क्षेत्रों में नुकसान पहुंचा सकता है।
प्राकृतिक बांध टूटने पर काली नदी तक पहुंच सकता है पानी
नेपाल प्रशासन की चिंता का मुख्य कारण चमेलिया नदी का आगे का प्रवाह है। चमेलिया नदी भारत के गेठीगाड़ा क्षेत्र के पास काली नदी में मिलती है। इसके बाद काली नदी का प्रवाह झूलाघाट और पंचेश्वर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर बढ़ता है। ऐसे में यदि Chameliya River Artificial Lake में जमा पानी अचानक बड़ी मात्रा में निकलता है, तो इससे नदी के निचले हिस्सों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों की नजर में पहाड़ी क्षेत्रों में बनने वाले ऐसे अस्थायी जल अवरोधों पर लगातार निगरानी जरूरी होती है। लगातार बारिश के दौरान यदि भूस्खलन का दायरा बढ़ता है, तो नदी का रास्ता दोबारा अवरुद्ध हो सकता है और पानी फिर तेजी से जमा होना शुरू हो सकता है।
भारत में भी काली नदी के जलस्तर पर बढ़ी निगरानी
नेपाल में चमेलिया नदी के बहाव में रुकावट की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय क्षेत्र में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन काली नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
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भारत और नेपाल के बीच बहने वाली काली नदी सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बरसात के मौसम में जलस्तर बढ़ने पर इसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है। फिलहाल भारतीय प्रशासन की ओर से नदी की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि नेपाल की तरफ मौसम और भूस्खलन की स्थिति में होने वाले किसी बड़े बदलाव की जानकारी समय पर मिल सके।
जलस्तर कम हुआ, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह नहीं टला
भूस्खलन के बाद बनी झील को लेकर शुरुआती चिंता काफी बढ़ गई थी। हालांकि दो दिन बाद पानी का स्तर कम होने से हालात में कुछ सुधार हुआ। इससे तत्काल बड़े खतरे की आशंका कम हुई है। लेकिन क्षेत्र में लगातार भूस्खलन होने की जानकारी के कारण प्रशासन अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। अपि हिमाल गांव पालिका के अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन की गतिविधियां अभी भी जारी हैं।

फिलहाल मलबा बड़ी मात्रा में नदी तक नहीं पहुंच रहा, लेकिन यदि बारिश दोबारा तेज हुई और पहाड़ी का कोई बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया, तो चमेलिया नदी का बहाव फिर प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में Chameliya River Artificial Lake दोबारा बनने या पहले से ज्यादा पानी जमा होने का खतरा पैदा हो सकता है।
प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का फैसला किया। गांव पालिका अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा और स्थानीय वार्ड प्रतिनिधियों की मदद से प्रभावित लोगों को घोरसाड में स्थित सुरक्षित सरकारी भवन में शिफ्ट किया गया।
सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के पालतू जानवरों को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। प्रशासन ने लोगों को तब तक सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी है, जब तक भूस्खलन और नदी की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती।
सुरक्षा बलों ने पहुंचाई राहत सामग्री
भूस्खलन के बाद सशस्त्र बल के बलाच बेस कैंप से डीएसपी पुष्कर सिंह के नेतृत्व में जवानों की एक टीम प्रभावित क्षेत्र में पहुंची। टीम ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई।
लोगों के बीच खाद्य सामग्री, कंबल, तिरपाल और जरूरी दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही उन्हें संभावित भूस्खलन वाले स्थानों से दूर रहने की हिदायत दी गई। बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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नेपाल प्रशासन ने कहा, फिलहाल हालात सामान्य
दार्चुला के मुख्य जिला अधिकारी वर्त राज पौडेल के अनुसार, फिलहाल क्षेत्र की स्थिति सामान्य बनी हुई है। झील का जलस्तर कम होने के बाद तत्काल राहत मिली है। इसके बावजूद मौसम और भूस्खलन की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति इस पूरे इलाके के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
नेपाल में बनी Chameliya River Artificial Lake ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और भूस्खलन किस तरह अचानक नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बदल सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों की एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अगर बारिश और भूस्खलन का दौर थमा रहा तो खतरा कम हो सकता है, लेकिन पहाड़ी का कोई बड़ा हिस्सा दोबारा नदी में गिरने पर हालात तेजी से बदल सकते हैं। यही वजह है कि नेपाल के साथ-साथ उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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