Roshibina Devi wins silver medal in wushu at Asian Games 2026.(PC- PTI)
Asian Games 2026 में भारत की वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने इतिहास रच दिया है। मणिपुर की 25 वर्षीय खिलाड़ी ने महिलाओं की 60 किग्रा सैंडा स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। फाइनल में उनका सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ, जहां उन्हें 0-2 से हार मिली। इसके बावजूद रोशिबिना ने लगातार तीसरे एशियन गेम्स में पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की।
रोशिबिना देवी के लिए Asian Games 2026 तक का सफर आसान नहीं रहा। खास बात यह है कि शुरुआती चयन के बाद उनका नाम भारतीय टीम में नहीं था। बाद में टीम में हुए बदलाव ने उन्हें एक और मौका दिया। इस मौके को उन्होंने पदक में बदल दिया।
Asian Games 2026 में रोशिबिना को मिला दूसरा मौका
रोशिबिना देवी ने जून में हुए चयन ट्रायल में हिस्सा लिया था। महिलाओं की 60 किग्रा सैंडा कैटेगरी के सेमीफाइनल में उन्हें दिव्यांशी चौधरी से हार का सामना करना पड़ा था। दिव्यांशी ने आगे ट्रायल जीता और उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली थी। रोशिबिना के लिए इसका मतलब था कि उन्हें लगातार तीसरे एशियन गेम्स में खेलने का मौका शायद नहीं मिलेगा।
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हालांकि, इसके बाद परिस्थितियां बदल गईं। वुशू एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार दिव्यांशी की मेडिकल जांच में हाई-ग्रेड ACL टियर सामने आया। इसके बाद उन्हें प्रतियोगिता से बाहर किया गया और रोशिबिना को टीम में शामिल किया गया। इस चयन को लेकर विवाद भी सामने आया। दिव्यांशी ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। बाद में उन्होंने कहा कि वह चोट से उबरने पर ध्यान देंगी। यानी जिस Asian Games 2026 टीम में रोशिबिना का नाम शुरुआत में नहीं था, उसी टीम में उन्हें बाद में चोटिल खिलाड़ी के स्थान पर जगह मिली।
मौके को रोशिबिना ने बनाया ऐतिहासिक उपलब्धि
टीम में शामिल होने के बाद रोशिबिना ने दबाव को अपने प्रदर्शन पर हावी नहीं होने दिया। महिलाओं की 60 किग्रा सैंडा स्पर्धा में उन्होंने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया।
क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मकाऊ की चू मैन सिन को 5-0 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की थानिया कुसुमानिंगत्यास को 2-0 से मात दी। सेमीफाइनल जीतते ही उनका कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो गया था। इसके साथ ही Asian Games 2026 में रोशिबिना की पदक की हैट्रिक भी तय हो गई थी। अब फाइनल में उनके सामने गोल्ड मेडल की चुनौती थी।
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फाइनल में चीन की झांग शियाओयू से मुकाबला
फाइनल में रोशिबिना देवी का सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला हुआ। झांग ने दोनों राउंड में बढ़त बनाए रखी और मुकाबला 2-0 से अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ रोशिबिना को सिल्वर मेडल मिला। हालांकि, यह उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं रहा। Asian Games 2026 का यह पदक उनका एशियन गेम्स में लगातार तीसरा मेडल है।
2018 में ब्रॉन्ज, 2023 में सिल्वर और अब फिर सिल्वर
रोशिबिना देवी ने 2018 के एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने बड़े अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। अब Asian Games 2026 में भी उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस तरह उनके नाम एशियन गेम्स में तीन लगातार पदक हो गए हैं।
वह वुशू में एशियन गेम्स के लगातार तीन संस्करणों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। उनके रिकॉर्ड में 2018 का ब्रॉन्ज और 2023 तथा 2026 का सिल्वर शामिल है।
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गोल्ड के रास्ते में हर बार आई चीनी चुनौती
रोशिबिना के एशियन गेम्स करियर में एक दिलचस्प पैटर्न भी देखने को मिलता है। तीनों संस्करणों में उनका सामना मजबूत चीनी चुनौती से रहा है।
Asian Games 2026 के फाइनल में भी उनके सामने चीन की झांग शियाओयू थीं। इस बार झांग ने गोल्ड जीता। इससे पहले भी रोशिबिना को एशियन गेम्स में चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबलों का सामना करना पड़ा है। वुशू में चीन की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए रोशिबिना की लगातार पदक जीतने की उपलब्धि खास मानी जा रही है।
मणिपुर की खिलाड़ी ने बढ़ाया देश का मान
रोशिबिना देवी मणिपुर से आती हैं। Asian Games 2026 में उनका सिल्वर मेडल राज्य और भारतीय वुशू दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले मीराबाई चानू भी मणिपुर से भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। ऐसे में रोशिबिना की उपलब्धि ने राज्य के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी को भी सामने रखा है।
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रोशिबिना के लिए यह सफर इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ समय पहले तक उनका एशियन गेम्स में हिस्सा लेना तय नहीं था। चयन ट्रायल में हार के बाद उनका नाम मूल टीम में नहीं था। फिर टीम में बदलाव हुआ और उन्हें मौका मिला।
किस्मत से मिले मौके को मेहनत से बदला
खेल में मौके कई बार अचानक मिलते हैं, लेकिन उन्हें उपलब्धि में बदलना खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। रोशिबिना देवी ने Asian Games 2026 में यही किया। टीम में जगह मिलने के बाद उन्होंने पहले पदक पक्का किया। फिर सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में पहुंचीं। गोल्ड से भले ही वह एक कदम दूर रह गईं, लेकिन सिल्वर के साथ उन्होंने इतिहास जरूर रच दिया।
लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली रोशिबिना अब भारतीय वुशू की उन खिलाड़ियों में शामिल हो गई हैं, जिनका नाम एशियन गेम्स के रिकॉर्ड में लंबे समय तक याद किया जाएगा। Asian Games 2026 ने उनके करियर में एक और सिल्वर जोड़ा, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह रही कि उन्होंने मेडल की हैट्रिक पूरी कर भारतीय खेल इतिहास में अपनी जगह बना ली।
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