UPSC 100 years journey and rising women participation in civil services
UPSC: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने 1 अक्टूबर 2026 को अपने 100 साल पूरे कर लिए। एक सदी के इस सफर में आयोग की परीक्षा व्यवस्था के साथ सिविल सर्विस की सामाजिक तस्वीर भी बदली है। खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1952 में सिविल सर्विस के लिए नियुक्ति की सिफारिश किए गए 83 उम्मीदवारों में सिर्फ 3 महिलाएं थीं। यानी सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 3.6 फीसदी थी। वहीं CSE 2025 में 958 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई। इनमें 299 महिलाएं थीं। इस तरह महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 31.2 फीसदी हो गई।
1 अक्टूबर 1926 को हुई थी शुरुआत
UPSC की संस्थागत यात्रा 1 अक्टूबर 1926 से शुरू हुई थी। इसी दिन भारत में पहली बार Public Service Commission की स्थापना की गई थी। शुरुआत में यह एक सलाहकार संस्था थी। समय के साथ इसकी भूमिका और संवैधानिक स्थिति में बदलाव आया।
Read: दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद EC ने लिया बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला
1937 में इसका नाम Federal Public Service Commission किया गया। संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को इसे Union Public Service Commission यानी UPSC का नाम मिला। आज यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें Civil Services Examination सबसे चर्चित परीक्षाओं में शामिल है। इसके जरिए IAS, IPS, IFS समेत कई केंद्रीय सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।
1952 में 83 सफल उम्मीदवारों में सिर्फ 3 महिलाएं
UPSC Women Participation की कहानी समझने के लिए शुरुआती आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। 1952 में सिविल सर्विस परीक्षा के जरिए नियुक्ति के लिए कुल 83 उम्मीदवारों की सिफारिश हुई थी। इनमें केवल तीन महिलाएं थीं। इसका मतलब है कि उस समय सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 3.6 फीसदी थी। यानी 100 सफल उम्मीदवारों में औसतन करीब चार महिलाएं भी नहीं थीं।
Also Read: यूसमर्ग में लश्कर का आतंकी ढेर, सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी
यह आंकड़ा उस दौर में सरकारी सेवाओं में महिलाओं की सीमित मौजूदगी को दिखाता है। अगले कई दशकों में शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं तक महिलाओं की पहुंच बढ़ी। इसका असर सिविल सर्विस के आंकड़ों में भी दिखाई दिया।
CSE 2025 में 299 महिलाओं का चयन
अब तस्वीर काफी अलग है। CSE 2025 के अंतिम परिणाम में UPSC ने विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति के लिए 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की। इनमें 659 पुरुष और 299 महिलाएं थीं। महिलाओं की हिस्सेदारी 31.2 फीसदी रही।
यानी 1952 के 3.6 फीसदी आंकड़े की तुलना में 2025 में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कई गुना बढ़ा है। UPSC के शताब्दी वर्ष पर जारी आधिकारिक आंकड़ों में इसे संस्थान के 100 साल के सफर में समावेशिता से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल किया गया है। CSE 2025 के शीर्ष पांच सफल उम्मीदवारों में भी एक महिला शामिल रही। वहीं आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक टॉप 25 में 11 महिलाएं थीं।
एक दशक में करीब 20 से बढ़कर 31 फीसदी
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल 1952 और 2025 के बीच का बदलाव नहीं है। पिछले करीब एक दशक में भी इसमें लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
Read: CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी मार्च, ‘गिरफ्तार करो’ के नारे से गरमाई सियासत
केंद्र सरकार के अनुसार, लगभग एक दशक पहले सिविल सर्विस परीक्षा के सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी थी। CSE 2025 में यह आंकड़ा 31 फीसदी से ऊपर पहुंच गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अप्रैल 2026 में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह आंकड़ा अब एक-तिहाई के करीब पहुंच गया है।
इस बदलाव के पीछे परीक्षा की तैयारी तक बढ़ती पहुंच, डिजिटल माध्यमों का विस्तार और अलग-अलग क्षेत्रों से उम्मीदवारों की भागीदारी जैसे कारकों का उल्लेख सरकार ने किया है। हालांकि इन आंकड़ों से किसी एक कारण को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना संभव नहीं है।
सिर्फ संख्या नहीं, रैंक में भी दिखा बदलाव
UPSC Women Participation का बदलाव केवल कुल संख्या तक सीमित नहीं है। महिला उम्मीदवारों ने ऊंची रैंक भी हासिल की हैं। CSE 2025 में शीर्ष पांच सफल उम्मीदवारों में एक महिला शामिल थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार टॉप 25 में 11 महिला उम्मीदवार रहीं। इससे यह भी पता चलता है कि महिलाएं केवल बड़ी संख्या में परीक्षा में सफल नहीं हो रही हैं, बल्कि शीर्ष रैंक में भी अपनी जगह बना रही हैं।
यह बदलाव सिविल सर्विस की बदलती सामाजिक संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी एक परीक्षा के परिणाम से पूरे सरकारी तंत्र में लैंगिक प्रतिनिधित्व का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
ALSO READ: Today Haryana News| The World News Insights | TV TODAY BHARAT NEWS | LATEST BOLLYWOOD NEWS
UPSC के 100 साल में बदली परीक्षा तक पहुंच
UPSC के 100 साल के सफर में केवल उम्मीदवारों की प्रोफाइल नहीं बदली। परीक्षा का पैमाना भी काफी बड़ा हुआ है। PIB के अनुसार, 1950-51 में आयोग की विभिन्न परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए कुल आवेदन 42,727 थे। 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 45 लाख से ज्यादा हो गई। इसी अवधि में परीक्षा केंद्रों की संख्या भी बढ़ी। 1950 में जहां 8 परीक्षा केंद्र थे, वहीं 2026 में 86 केंद्र हैं।
भाषा के स्तर पर भी बदलाव आया। शुरुआती दौर में इंटरव्यू केवल अंग्रेजी में कराने की स्थिति थी। बाद में उम्मीदवारों को भारतीय भाषाओं में व्यक्तित्व परीक्षण देने की सुविधा मिली। आयोग ने समय के साथ अपनी प्रक्रिया में कई तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव भी किए हैं।
शताब्दी वर्ष में आगे की तैयारी
UPSC ने 1 अक्टूबर 2025 से 1 अक्टूबर 2026 तक अपना शताब्दी वर्ष मनाया। इस दौरान अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। 30 सितंबर 2026 से नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘Manthan’ नाम से शताब्दी समारोह शुरू हुआ। इसमें सिविल सर्विस के बदलते स्वरूप, प्रशासन में नवाचार और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा हुई।
UPSC के 100 साल पूरे होने पर महिलाओं की भागीदारी का आंकड़ा इस लंबे सफर के एक महत्वपूर्ण हिस्से को सामने रखता है। 1952 में 83 सफल उम्मीदवारों में तीन महिलाओं से शुरू हुई यह संख्या CSE 2025 में 958 में 299 तक पहुंची है। आंकड़े बताते हैं कि सिविल सर्विस परीक्षा में महिलाओं की मौजूदगी अब पहले की तुलना में कहीं अधिक है।
UTTAR PRADESH |UTTARAKHAND UPDATE |CM YOGI BREAKING |EXPLAINER TV TODAY BHARAT|WEB STORY |NATIONAL NEWS TODAY | Business Bharat

1 ने “UPSC के 100 साल… कभी 83 में सिर्फ 3 महिलाएं, अब 958 में 299, सिविल सर्विस में ऐसे बदली तस्वीर” पर विचार किया;