CJP Protest Delhi: Union Minister Ramdas Athawale responds to CJP protest demanding Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar resignation in Delhi । IMAGE :
Tv Today Bharat | राष्ट्रीय समाचार | नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026, सोमवार
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली में CJP Protest Delhi को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने रविवार, 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन करने के बजाय छात्रों की समस्याएं उठाने की सलाह दी। वहीं, दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों के प्रस्तावित मार्च के बीच चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ गया है।
छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन करे CJP: आठवले
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने CJP Protest Delhi के बीच संगठन की आंदोलन संबंधी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने CJP को उसके शुरुआती छात्र आंदोलन की याद दिलाई। साथ ही, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग छोड़कर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं से जुड़े सवाल उठाने की सलाह दी।

आठवले ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन नीट परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुआ था। उस समय तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी थी। इसके अलावा, उन्होंने सवाल किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन करने वाला संगठन अब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग क्यों कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि छात्रों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था मिले, परीक्षाएं निष्पक्ष हों और शिक्षा नीति में क्या सुधार किए जाएं, संगठन को इन विषयों पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, CJP अपने मौजूदा आंदोलन को मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कब हुआ था?
CJP Protest Delhi की मौजूदा चर्चा में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के विरोध में जुलाई 2026 के दौरान छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। इसी क्रम में CJP ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पद छोड़ने की मांग की थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल किसी एक संगठन के प्रदर्शन का परिणाम बताना उचित नहीं होगा। उस समय परीक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध और राजनीतिक दबाव था। वहीं, आठवले ने CJP को याद दिलाया कि छात्रों से जुड़ी उसकी प्रमुख मांगों में एक मांग पहले ही पूरी हो चुकी है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर क्या बोले मंत्री?
CJP Protest Delhi का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। आठवले ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में कई प्रशासनिक कारण शामिल हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे जानबूझकर नाम हटाने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, लगभग 13 करोड़ मतदाता प्रविष्टियों को हटाए जाने के पीछे निवास स्थान में बदलाव और अन्य कारण बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि करीब छह करोड़ लोगों के स्थान परिवर्तन का मामला है। इसके अलावा, उन्होंने दोहरी प्रविष्टियों और अनुपस्थित मतदाताओं का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े मंत्री के बयान का हिस्सा हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित मतदाता-वार निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, विपक्ष और CJP का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना प्रक्रिया का उद्देश्य है और गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के लिए दोबारा नाम दर्ज कराने का रास्ता उपलब्ध है।
राहुल गांधी के मार्च पर भी उठाए सवाल
CJP Protest Delhi के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनावी परिणाम जनता के फैसले से तय होते हैं। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस की सीटों में हुई बढ़ोतरी का उदाहरण देकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े किए।
आठवले ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध करना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन किसी भी आंदोलन के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली में हिंसा की घटनाओं की आलोचना की। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शन आम नागरिकों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। हालांकि, CJP नेताओं ने अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया है।
सुप्रीम कोर्ट मार्च पर क्या है अपडेट?
CJP Protest Delhi के साथ ही सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर भी गतिविधियां तेज रहीं। राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। विपक्ष की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी शामिल है।
हालांकि, इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के मुलाकात संबंधी अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित मुद्दे अदालत में लंबित हैं और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही उन पर विचार किया जाना चाहिए।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, मेट्रो सेवाएं प्रभावित
CJP Protest Delhi और विपक्षी गतिविधियों को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। सोमवार को दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशनों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए और मध्य दिल्ली के कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई।
इसके अलावा, 10 और 11 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों तथा CJP नेताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में प्रमुख नेताओं को रिहा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता बताई। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है।
CJP ने दोबारा प्रदर्शन की तैयारी की
CJP Protest Delhi को लेकर संगठन ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वापस नहीं ली गई है। संगठन के नेताओं ने दिल्ली पुलिस से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति और समय तय करने की बात कही। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि 24 घंटे के भीतर अनुमति संबंधी निर्णय नहीं मिलने पर आंदोलन की अगली रणनीति घोषित की जाएगी।
CJP के नेताओं ने अपने समर्थकों से दिल्ली में बने रहने की अपील भी की थी। वहीं, संगठन ने दावा किया कि उसका आंदोलन मतदाता अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए है। खास बात यह है कि अब संगठन की गतिविधियां शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर चुनाव सुधार से जुड़े मुद्दों तक पहुंच गई हैं।
आगे क्या होगा?
CJP Protest Delhi के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ रामदास आठवले और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता चुनाव आयोग का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और CJP मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, आंदोलन की अगली तारीख और अनुमति को लेकर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही, मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित अदालत में लंबित मामलों और चुनाव आयोग की आगामी प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। इस पूरे विवाद में चुनावी पारदर्शिता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था तीन अहम विषय बने हुए हैं।
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