Kolkata Durga Puja Pandal Collapse: 17 Dead, Eyewitnesses Describe Stampede (pic-x)
Kolkata Durga Puja Pandal Collapse:पश्चिम बंगाल के कोलकाता के चोरबागान में दुर्गा पूजा के दौरान हुए हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। पूजा पंडाल का एक हिस्सा गिरने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।
घटना के बाद सामने आए चश्मदीदों के बयान हादसे के दौरान बने हालात की गंभीरता बताते हैं। लोगों का कहना है कि पंडाल गिरने के बाद मची भगदड़ में कई लोग जमीन पर गिर गए और भीड़ उनके ऊपर से गुजरती रही। स्थानीय लोगों ने भीड़ को संभालने, घायलों की मदद करने और आपातकालीन इंतजामों को लेकर (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) भी सवाल उठाए हैं।
पंडाल गिरने की खबर सुनते ही मची अफरा-तफरी
एक चश्मदीद ने बताया कि उसने मंडप का एक हिस्सा गिरने की आवाज सुनी थी। इसके बाद वहां मौजूद लोगों के बीच डर फैल गया। हर कोई सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए भागने लगा। इस दौरान भगदड़ जैसे हालात बन गए और लोग एक-दूसरे से टकराकर गिरने लगे।चश्मदीद के मुताबिक, जमीन पर गिरे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उनके ऊपर से दूसरे लोग गुजर रहे थे। घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी के बीच कुछ लोगों की हालत देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उनकी जान (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) चली गई हो।
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‘मेरे सामने पांच लोग गिर पड़े’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि हादसे के दौरान उसकी आंखों के सामने पांच लोग गिर पड़े थे। पंडाल का हिस्सा गिरने के बाद वहां मौजूद लोगों में डर और भ्रम का माहौल बन गया था। लोग किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। चश्मदीद ने कहा कि भगदड़ के दौरान जो लोग नीचे गिर गए थे, उनके ऊपर से दूसरे लोग निकल रहे थे। ऐसे में जमीन पर गिरे लोगों को बचाना मुश्किल हो रहा था।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ को संभालने और किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए थे। उनका कहना है कि अगर समय रहते लोगों को सुरक्षित (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) निकालने और मदद पहुंचाने की व्यवस्था होती, तो नुकसान कम हो सकता था।
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मदद में देरी का आरोप
हादसे के बाद एक अन्य चश्मदीद ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों की भूमिका पर सवाल उठाए। उसने दावा किया कि घटनास्थल पर हजारों स्वयंसेवक और पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन घायल लोगों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था। चश्मदीद के अनुसार, कोलकाता पुलिस की एक गाड़ी घटनास्थल के पास खड़ी थी। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर घायलों की मदद करनी पड़ी। उसने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के समय पूजा समिति का कोई सदस्य मौके पर दिखाई नहीं दिया। हालांकि, ये बातें चश्मदीदों के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) उपलब्ध नहीं है।
एंबुलेंस की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बावजूद मौके पर एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) नहीं थी। लोगों के मुताबिक, हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्थानीय निवासियों और पुलिस की मदद लेनी पड़ी। इस घटना ने बड़े आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
कोलकाता के चोरबागान में हुए इस हादसे के बाद चश्मदीदों के बयान से घटनास्थल पर बने हालात की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति से निपटने (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) के लिए जरूरी इंतजाम पर्याप्त नहीं थे।
फिलहाल, हादसे में 17 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत (Kolkata Durga Puja Pandal Collapse) को सामने ला दिया है।
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