Infosys Chairman Nandan Nilekani speaking about how AI in IT Companies will strengthen the IT sector and create new opportunities.
AI in IT Companies को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। कई रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के बाद यह धारणा बन गई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में लाखों नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर आईटी सेक्टर में काम करने वाले लोगों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ी है। लेकिन देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक और चेयरमैन नंदन नीलेकणी का मानना है कि AI किसी खतरे का संकेत नहीं, बल्कि विकास और अवसरों का नया द्वार है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि AI आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें पहले से अधिक सक्षम और मजबूत बनाएगा। उनका मानना है कि जो कंपनियां तेजी से बदलती तकनीक को अपनाएंगी, वही भविष्य में सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएंगी।
2030 तक 400 अरब डॉलर का अवसर बन सकता है AI
इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में नंदन नीलेकणी ने कहा कि वर्ष 2030 तक AI आधारित सेवाओं का वैश्विक बाजार करीब 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में भारतीय आईटी कंपनियों के सामने अभूतपूर्व अवसर मौजूद हैं।
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उन्होंने कहा कि Generative AI के आने के बाद तकनीकी दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, लेकिन इसके बावजूद आईटी कंपनियों की जरूरत खत्म नहीं हुई है। बल्कि अब कंपनियों को ऐसे अनुभवी साझेदारों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, जो AI के जटिल ढांचे को समझकर बेहतर समाधान उपलब्ध करा सकें।
AI in IT Companies से बढ़ रही है उत्पादकता
नंदन नीलेकणी का कहना है कि AI के जरिए कोडिंग, डेटा एनालिसिस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की गति पहले से तेज हुई है। इससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ी है और कंपनियां कम समय में बेहतर परिणाम देने में सक्षम हो रही हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का क्षेत्र इतना विशाल है कि AI केवल एक सहयोगी की भूमिका निभा सकता है, इंसानी विशेषज्ञता की जगह नहीं ले सकता। नई तकनीक कर्मचारियों को अधिक कुशल बनाने में मदद कर रही है।
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इंफोसिस के 90 फीसदी बड़े ग्राहक AI प्रोजेक्ट्स पर कर रहे काम
इंफोसिस इस समय अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित परियोजनाओं पर काम कर रही है। इससे साफ है कि दुनिया भर की कंपनियां तेजी से AI तकनीक को अपना रही हैं।
नंदन नीलेकणी ने कहा कि बड़ी कंपनियों के सामने AI को अपनाने और उसे प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती है। ऐसे में Infosys जैसी कंपनियां अपने अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के दम पर ग्राहकों की मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि एंटरप्राइज AI के क्षेत्र में अभी बहुत बड़ा अंतर मौजूद है और यही आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा अवसर साबित होगा।
सिर्फ AI टूल नहीं, साइबर सुरक्षा भी है जरूरी
AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी का महत्व भी बढ़ गया है। नंदन नीलेकणी के अनुसार, किसी भी एंटरप्राइज स्तर के AI समाधान के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र, डेटा गवर्नेंस और कठोर परीक्षण आवश्यक हैं।
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उन्होंने कहा कि केवल बाहरी प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहकर बड़ी कंपनियों की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए मजबूत तकनीकी संरचना और अनुभवी आईटी कंपनियों की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि AI in IT Companies का महत्व भविष्य में और बढ़ने वाला है।
पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने का अवसर
AI क्रांति ने कंपनियों को अपने पुराने तकनीकी सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए प्रेरित किया है। कई कंपनियां अब अपने डिजिटल ढांचे को AI फ्रेंडली बना रही हैं, जिससे कार्यक्षमता और उत्पादकता दोनों में सुधार हो रहा है।
नंदन नीलेकणी का मानना है कि यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संरचनात्मक परिवर्तन है, जिसका फायदा आईटी कंपनियों को लंबे समय तक मिलेगा।
रोजगार खत्म नहीं होंगे, नए अवसर पैदा होंगे
AI को लेकर सबसे बड़ी चिंता नौकरियों को लेकर है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हर तकनीकी क्रांति की तरह AI भी नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से मांग बढ़ रही है। आने वाले समय में नई स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत पहले से कहीं अधिक होगी।
भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है AI
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आईटी सेवा केंद्र माना जाता है। ऐसे में AI in IT Companies भारतीय अर्थव्यवस्था और तकनीकी उद्योग के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
नंदन नीलेकणी का मानना है कि जो कंपनियां बदलाव को स्वीकार करेंगी और नवाचार को प्राथमिकता देंगी, वही भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेंगी। AI का उद्देश्य इंसानों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाना है।
यही कारण है कि AI को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में AI भारतीय आईटी उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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