Plastic Currency: Modern polymer banknotes displayed as an example of highlighting enhanced durability, security features and global adoption.
Plastic Currency: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्लास्टिक करेंसी को लेकर विचार किए जाने की खबर ने देशभर में नई चर्चा शुरू कर दी है। नकली नोटों पर रोक, नोटों की लंबी उम्र और छपाई लागत में कमी जैसे कई कारणों से दुनिया के कई देशों ने पहले ही पॉलीमर आधारित मुद्रा को अपनाया है। अब भारत भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय मुद्रा व्यवस्था में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल सकता है। इसी वजह से Plastic Currency एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है।
RBI के विचार के बाद बढ़ी चर्चा
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि पॉलीमर या प्लास्टिक नोटों के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।
Read: Crude Oil Prices में नरमी का असर, पेट्रोल-डीजल पर लगातार 8वें दिन राहत, जानिए क्या हैं ताजा रेट
बताया जा रहा है कि शुरुआती चरण में 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों को चुना जा सकता है, क्योंकि इनका उपयोग सबसे अधिक होता है और ये जल्दी खराब भी हो जाते हैं। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी Plastic Currency के रूप में जारी किए जा सकते हैं।
दुनिया के 60 से अधिक देशों में चलन में है Plastic Currency
आज दुनिया के करीब 60 देशों में पॉलीमर आधारित मुद्रा का उपयोग किया जा रहा है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया और थाईलैंड जैसे विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं।
इन देशों ने पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि Plastic Currency के बढ़ते उपयोग का मुख्य कारण इसकी लंबी उम्र और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था है।
ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले की थी शुरुआत
पॉलीमर नोटों का इतिहास ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का पहला पॉलीमर बैंक नोट जारी किया था। इसका उद्देश्य नकली नोटों पर नियंत्रण और नोटों की गुणवत्ता में सुधार करना था।
Read: पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बिगड़ेगा आम आदमी का बजट, जून में 5% तक पहुंच सकती है खुदरा मुद्रास्फीति
समय के साथ यह प्रयोग बेहद सफल साबित हुआ और ऑस्ट्रेलिया की मुद्रा प्रणाली दुनिया के लिए एक मॉडल बन गई। बाद में कई देशों ने इसी तकनीक को अपनाया। आज ऑस्ट्रेलिया को Plastic Currency के क्षेत्र में अग्रणी देश माना जाता है।
प्लास्टिक नोटों की सबसे बड़ी ताकत है उनकी लंबी उम्र
विशेषज्ञों के अनुसार कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट कई गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। सामान्य कागजी नोट जहां दो से तीन वर्षों में खराब हो सकते हैं, वहीं प्लास्टिक नोट पांच से दस वर्षों या उससे अधिक समय तक चल सकते हैं।
बार-बार इस्तेमाल, मोड़ने और नमी के संपर्क में आने के बावजूद ये नोट आसानी से खराब नहीं होते। इसी कारण Plastic Currency को लंबे समय में अधिक किफायती विकल्प माना जाता है।
पानी और धूल का कम असर
भारत जैसे देश में जहां विभिन्न मौसम परिस्थितियां होती हैं, वहां नोटों का जल्दी खराब होना एक आम समस्या है। बारिश, नमी, धूल और लगातार उपयोग के कारण कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं या अपनी गुणवत्ता खो देते हैं।
इसके विपरीत पॉलीमर नोट पानी और नमी से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। यही कारण है कि Plastic Currency को व्यावहारिक रूप से अधिक उपयोगी माना जाता है।
Read More: 100 Gram Gold बेचकर कैसे घट सकता है भारत का Import Bill? समझिए पूरा कैलकुलेशन और अर्थव्यवस्था पर असर
नकली नोटों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच
हाल के वर्षों में नकली नोटों की समस्या को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की गई है। विशेष रूप से उच्च मूल्यवर्ग के नोटों में नकली नोटों के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Plastic Currency में उन्नत सुरक्षा फीचर जोड़ना आसान होता है। पारदर्शी विंडो, विशेष होलोग्राम और आधुनिक प्रिंटिंग तकनीक के कारण इनकी नकल करना बेहद कठिन हो जाता है। इसी वजह से कई देशों ने नकली मुद्रा पर नियंत्रण के लिए पॉलीमर नोटों को प्राथमिकता दी है।
नोट छपाई की लागत में भी हो सकती है बड़ी बचत
भारत में हर वर्ष खराब हो चुके नोटों को बदलने और नए नोट छापने पर भारी खर्च होता है। नोटों की छपाई, परिवहन और रखरखाव पर सरकार को हजारों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
Also Read: सिर्फ ₹2000 महीने निवेश कर 30 साल में कहां बनेगा बड़ा फंड? समझिए पूरा गणित
विशेषज्ञों का मानना है कि Plastic Currency की लंबी उम्र के कारण नोटों को बार-बार बदलने की आवश्यकता कम होगी। इससे दीर्घकाल में मुद्रा प्रबंधन की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
भारत में लागू होने पर क्या होगा बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत में पॉलीमर नोट लागू किए जाते हैं तो यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी। मौजूदा कागजी नोटों को अचानक बंद नहीं किया जाएगा।
कुछ समय तक दोनों प्रकार की मुद्राएं साथ-साथ चल सकती हैं ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। फिलहाल RBI इस विकल्प का अध्ययन कर रहा है, लेकिन यदि योजना आगे बढ़ती है तो Plastic Currency भारत की मुद्रा प्रणाली को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
Follow Us: TV TODAY BHARAT Live | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram | YOUTUBE |
