Haridwar Kanwar Mela Traffic Plain: Police managing vehicles and Kanwariyas under the new traffic plan and route diversion.
Haridwar Kanwar Mela Traffic Plan को लेकर उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। गुरुवार 30 जुलाई से शुरू हो रहे कांवड़ मेले के मद्देनजर हरिद्वार में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लाखों शिवभक्तों के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टरों में विभाजित किया है। प्रत्येक क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस बल और आपदा प्रबंधन टीमों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले Haridwar Kanwar Mela Traffic Plan की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। इससे अनावश्यक जाम, लंबा इंतजार और वैकल्पिक मार्गों को लेकर होने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा।
सावन के चार सोमवार और शिवरात्रि पर रहेगा सबसे अधिक दबाव
इस वर्ष श्रावण मास 28 जुलाई से शुरू हो चुका है और पूरे महीने चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को रहेगा। वहीं 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इन तिथियों पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू कर दी है।
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अधिकारियों का कहना है कि शिवरात्रि और सोमवार के दौरान वाहनों का दबाव सबसे अधिक रहेगा। इसलिए कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा और वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक ही जाने की अनुमति होगी।
कांवड़ वाहनों के लिए बदले गए प्रमुख रूट
Haridwar Kanwar Mela Traffic Plan के तहत सहारनपुर, दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हरियाणा और पंजाब से आने वाले कांवड़ वाहनों के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। सहारनपुर की ओर से आने वाले वाहन मंडावर, अब्दुल कलाम चौक, नगला इमरती और लक्सर होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग तक पहुंचेंगे।
यदि यातायात का दबाव बढ़ता है तो दिल्ली और मेरठ से आने वाले कांवड़ वाहनों को रामपुर तिराहा, कोलकी टोल प्लाजा, मंडावर और लक्सर के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा। वहीं मुरादाबाद, बिजनौर और नजीबाबाद की ओर से आने वाले वाहनों को चिड़ियापुर, गैण्डीखाता और 4.2 डायवर्जन के जरिए गौरीशंकर और नीलधारा पार्किंग तक भेजा जाएगा।
देहरादून और ऋषिकेश से आने वाले कांवड़ वाहन नेपाली तिराहा, सप्तऋषि तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर होते हुए लालजीवाला एवं चमगादड़ टापू पार्किंग तक पहुंचेंगे।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर रहेगा विशेष नियम
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि Delhi-Dehradun Expressway पर कांवड़ वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह मार्ग सामान्य बसों और अन्य निर्धारित वाहनों के लिए उपयोग किया जाएगा ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य श्रद्धालुओं और सामान्य यात्रियों दोनों के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात सुनिश्चित करना है।
रोडवेज और प्राइवेट बसों के लिए अलग व्यवस्था
मेले के दौरान रोडवेज और निजी बसों की आवाजाही भी निर्धारित मार्गों से ही होगी। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाली रोडवेज बसें दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के माध्यम से मंडावर और ऋषिकुल मैदान तक पहुंचेंगी। वहीं देहरादून और ऋषिकेश से आने वाली बसों को मोतीचूर पार्किंग तक भेजा जाएगा।
निजी बसों के लिए भी लगभग इसी प्रकार की व्यवस्था लागू रहेगी। नजीबाबाद और मुरादाबाद रूट की बसों को नीलधारा और गौरीशंकर पार्किंग क्षेत्र में पार्क कराया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य शहर के भीतर बसों की भीड़ कम करना और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराना है।
भारी वाहनों पर रहेगी सख्ती
29 जुलाई से 11 अगस्त तक भारी मालवाहक वाहनों पर विशेष प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रारंभिक दिनों में इन्हें केवल रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक ही आवाजाही की अनुमति मिलेगी। जबकि 5 अगस्त से 11 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
दिल्ली और मेरठ की ओर से आने वाले भारी वाहनों को मंडावर में रोका जाएगा, जबकि मुरादाबाद और बिजनौर की दिशा से आने वाले वाहनों को चिड़ियापुर और कांगड़ी पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा।
चारधाम यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय
कांवड़ मेले के दौरान चारधाम यात्रा को प्रभावित न होने देने के लिए भी प्रशासन ने अलग ट्रैफिक व्यवस्था बनाई है। बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले वाहनों को मेरठ, गढ़मुक्तेश्वर, नजीबाबाद, कोटद्वार और श्रीनगर मार्ग से भेजा जाएगा। वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए हिल बाईपास को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।
पैदल कांवड़ियों के लिए भी अलग मार्ग
हर की पैड़ी से जल लेकर लौटने वाले पैदल कांवड़ियों के लिए भी अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और हरियाणा की ओर जाने वाले श्रद्धालु रोडीबेलवाला, केशव आश्रम, सिंहद्वार और बहादराबाद नहर पटरी मार्ग का उपयोग करेंगे।
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वहीं नजीबाबाद और मुरादाबाद की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को चंडी चौक, दीनदयाल पार्किंग, 4.2 तिरछा पुल और नहर पटरी मार्ग से भेजा जाएगा। ऋषिकेश और देहरादून जाने वाले श्रद्धालु हर की पैड़ी, भीमगोड़ा, खड़खड़ी और दूधाधारी तिराहे से राष्ट्रीय राजमार्ग-34 का उपयोग करेंगे।
प्रशासन की अपील
पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे Haridwar Kanwar Mela Traffic Plan का पालन करें, केवल निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और यात्रा से पहले मौसम तथा ट्रैफिक अपडेट अवश्य देखें। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही कांवड़ मेला सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संपन्न कराया जा सकेगा। इस बार तकनीक, निगरानी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के जरिए प्रशासन का लक्ष्य है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की यात्रा बिना किसी बड़ी बाधा के सफलतापूर्वक पूरी हो सके।
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