West Asia War: Qatar LNG tankers sailing through the Strait of Hormuz amid tensions and ongoing US-Iran peace negotiations.
West Asia War: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक ओर जहां क्षेत्रीय तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। इस बीच, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माने जाने वाले हॉरमुज जलडमरूमध्य में कतर के चार एलएनजी टैंकरों के प्रवेश ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को राहत दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि West Asia War के बीच यह घटनाक्रम वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
60 दिनों में अंतिम समझौते की दिशा में बढ़े अमेरिका और ईरान
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों देशों ने युद्ध समाप्त करने के लिए 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति व्यक्त की है। संयुक्त बयान में कहा गया कि उच्च स्तरीय समिति ने आगे की तकनीकी बातचीत के लिए आधार तैयार कर लिया है और जल्द ही औपचारिक वार्ता शुरू होगी।
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इसके साथ ही लेबनान में सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” बनाने का फैसला भी किया गया है, ताकि संघर्ष के विस्तार को रोका जा सके। इस पहल को West Asia War के बीच शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हॉरमुज जलडमरूमध्य में पहुंचे कतर के चार बड़े LNG टैंकर
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद कतर के नियंत्रण वाले चार बड़े एलएनजी टैंकर, वादी अल सैल, मेकाइन्स, अल साद और मेसाइमीर, सोमवार को हॉरमुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करते दिखाई दिए। जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियों के अनुसार, यह पहली बार है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद इन जहाजों ने ईरानी मार्ग का इस्तेमाल किया।
इन टैंकरों की आवाजाही से यह संकेत मिल रहा है कि तमाम खतरों के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। West Asia War के कारण कतर की गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ा था, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
जहाजों की संख्या में आई भारी गिरावट
ईरान द्वारा सप्ताहांत में एक बार फिर हॉरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद जहाजों की आवाजाही में अचानक कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, जहां एक दिन पहले 26 जहाज इस मार्ग से गुजरे थे, वहीं अगले दिन यह संख्या घटकर सिर्फ पांच रह गई।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद करके भी यात्रा कर रहे हैं, इसलिए वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। इस दौरान तीन बड़े तेल टैंकर लगभग 20 लाख बैरल सऊदी तेल लेकर जापान की ओर रवाना हुए।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है हॉरमुज जलडमरूमध्य
हॉरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में West Asia War के कारण यहां पैदा होने वाला कोई भी संकट दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हाल ही में 55 व्यापारिक जहाज इस मार्ग से होकर गुजरे, जिनके जरिए 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया गया।
ईरान का दावा, 2.5 करोड़ बैरल तेल पहुंचा बाजार तक
ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के प्रमुख हमीद बोवार्ड ने दावा किया है कि 15 जून के बाद से 2.5 करोड़ बैरल से अधिक ईरानी तेल तथाकथित नाकेबंदी के बावजूद वैश्विक बाजार तक पहुंच चुका है। इससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है और निर्यात गतिविधियां जारी हैं।
इस बीच अबू धाबी और कुवैत की तेल कंपनियों ने भी ऐसे टेंडर जारी किए हैं जिनमें हॉरमुज के अंदर और बाहर दोनों स्थानों से तेल लोड करने का विकल्प दिया गया है।
भारत तक पहुंची गैस की खेप, ऊर्जा सुरक्षा को मिली राहत
West Asia War के बीच भारत के लिए भी राहत भरी खबर सामने आई है। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो एलएनजी टैंकर भारत पहुंच चुके हैं। इनमें से “अल हमरा” चेन्नई के एन्नोर एलएनजी टर्मिनल पर गैस उतार रहा है, जबकि “मुबाराज” टैंकर कोच्चि टर्मिनल पर अपनी खेप पहुंचाने वाला है।
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भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आवश्यक है।
वैश्विक बाजार की नजरें शांति वार्ता पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता सफल होती है, तो West Asia War से प्रभावित वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों, तेल कंपनियों और दुनिया के कई देशों की नजरें इन वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
हालांकि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों और ऊर्जा आपूर्ति की बहाली से यह उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
दुनिया के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं अगले कुछ सप्ताह
पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और व्यापार पर पड़ रहा है। ऐसे में अगले कुछ सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं।
अगर शांति वार्ता आगे बढ़ती है और हॉरमुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल होती है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं। वहीं, किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात फिर से बिगड़ने का खतरा भी बना हुआ है।
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