Maa Nanda palanquin during Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 in Chamoli Uttarakhand
Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026: उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ी Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 को लेकर चमोली जिले में उत्साह चरम पर है। मां नंदा की बड़ी जात यात्रा 5 सितंबर को नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना होगी। इस पावन यात्रा को लेकर नंदानगर ब्लॉक समेत आसपास के गांवों में धार्मिक माहौल बना हुआ है और श्रद्धालु मां नंदा की विदाई की तैयारियों में जुटे हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर को अपराह्न तीन बजे मां नंदा की तीनों डोलियां कुरुड़ सिद्धपीठ से कैलाश की ओर प्रस्थान करेंगी। यात्रा कई धार्मिक पड़ावों और दुर्गम हिमालयी रास्तों से गुजरते हुए होमकुंड तक पहुंचेगी, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद चौसिंग्या खाडू को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा।
कुरुड़ सिद्धपीठ से कैलाश की ओर शुरू होगा मां नंदा का सफर
कुरुड़ मंदिर समिति के अनुसार Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 के लिए तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। 5 सितंबर को मां नंदा की तीनों डोलियां विधि-विधान और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद कुरुड़ से रवाना होंगी। यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सदियों पुरानी लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।
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पहाड़ के लोग मां नंदा को अपनी बेटी और बहन के रूप में मानते हैं। इसलिए कैलाश के लिए उनकी विदाई का यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद खास होता है। मां नंदा की डोली के साथ हजारों श्रद्धालु अलग-अलग पड़ावों तक यात्रा करेंगे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों, जयकारों तथा धार्मिक अनुष्ठानों के बीच देवी को कैलाश के लिए विदा करेंगे।
12 सितंबर को रामणी में होगा देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन
यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 12 सितंबर को रामणी पहुंचेगी। यहां Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव होगा। रामणी में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा।
देव डोलियों और छंतोलियों के इस मिलन को यात्रा की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में शामिल माना जाता है। अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों के श्रद्धालु अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस आयोजन में शामिल होंगे। रामणी से यात्रा आला, सितेल और कनोंल होते हुए आगे बढ़ेगी। पहाड़ के दुर्गम रास्तों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आगे बढ़ने वाली यह यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और हिमालयी संस्कृति की अनूठी तस्वीर पेश करेगी।
15 सितंबर को वाण के लाटू मंदिर में होगा प्रवास
यात्रा का अगला प्रमुख पड़ाव वाण गांव होगा। 15 सितंबर को मां नंदा की डोली वाण स्थित लाटू मंदिर में प्रवास करेगी। लाटू देवता को नंदा देवी यात्रा की परंपरा से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 के दौरान वाण और लाटू मंदिर का धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। यहां मां नंदा की डोली के पहुंचने पर विशेष पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
इसके बाद यात्रा वाण से गैरोली पाताल की ओर आगे बढ़ेगी और 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। हिमालय की गोद में स्थित वेदनी बुग्याल नंदा देवी से जुड़ी धार्मिक यात्राओं का एक प्रमुख पड़ाव माना जाता है।
वेदनी बुग्याल में होगी सप्तमी की विशेष पूजा
18 सितंबर को मां नंदा की उत्सव डोली वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। यहां सप्तमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। बुग्यालों के बीच होने वाला यह धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
वेदनी बुग्याल से आगे Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 और अधिक दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगी। यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से भी गुजरना होगा, इसलिए प्रशासन और स्थानीय समितियों ने सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया है।
रूपकुंड और ज्यूंरागली होते हुए पहुंचेगी यात्रा शिलासमुद्र
19 सितंबर को यात्रा बगुवावासा, पातरनचैणियां और कैलवा विनायक से होते हुए रूपकुंड और ज्यूंरागली की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसके बाद श्रद्धालु शिलासमुद्र पहुंचेंगे।
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यह यात्रा मार्ग हिमालय के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह यात्रा उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाती है। नंदा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ही उन्हें इन कठिन रास्तों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हर पड़ाव पर पारंपरिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
20 सितंबर को होमकुंड में होगी चौसिंग्या खाडू की कैलाश विदाई
Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्षण 20 सितंबर को होमकुंड में देखने को मिलेगा। यहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद चौसिंग्या खाडू की कैलाश विदाई की जाएगी। चौसिंग्या खाडू को इस यात्रा में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसे मां नंदा की यात्रा का मार्गदर्शक माना जाता है।
चौसिंग्या खाडू के आगे बढ़ने के साथ यात्रा भी अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ती है। होमकुंड में धार्मिक विधि-विधान से पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालु मां नंदा को कैलाश के लिए विदा करेंगे। इसके बाद नंदा भक्त जामुनडाली में रात्रि प्रवास करेंगे।
30 सितंबर को कुरुड़ लौटेगी उत्सव डोली, यात्रा का होगा समापन
कैलाश विदाई के बाद मां नंदा की उत्सव डोली वापसी यात्रा पर निकलेगी। यह यात्रा सुतोल, पेरी, सितेल, गुलाड़ी, नांरगी और फरखेत जैसे विभिन्न पड़ावों से होते हुए 30 सितंबर को कुरुड़ मंदिर पहुंचेगी।
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कुरुड़ सिद्धपीठ में डोली के पहुंचने के साथ Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 का समापन होगा। यात्रा के दौरान विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय समितियों को व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई है। दुर्गम क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात रहेंगी।
सदियों पुरानी परंपरा और मां नंदा को कैलाश विदा करने की मान्यता
मां नंदा की राजजात यात्रा उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। मान्यता है कि मां नंदा को मायके से उनके पति भगवान शिव के निवास कैलाश के लिए विदा किया जाता है। लोक परंपराओं में मां नंदा को पहाड़ की बेटी माना गया है। इसलिए जब देवी कैलाश के लिए रवाना होती हैं तो मायके के लोग उन्हें श्रद्धा और भावनाओं के साथ विदा करने जाते हैं।
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा को गढ़वाल के राजाओं ने विशेष स्वरूप दिया और समय के साथ यह यात्रा उत्तराखंड की पहचान बन गई। आज भी पहाड़ के गांवों में मां नंदा की बड़ी जात को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और सामूहिक आस्था के पर्व के रूप में देखा जाता है।
इस बार 5 सितंबर से शुरू होने वाली Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 एक बार फिर उत्तराखंड की आस्था को कैलाश की ओर ले जाएगी, जहां चौसिंग्या खाडू के मार्गदर्शन में मां नंदा की प्रतीकात्मक विदाई की सदियों पुरानी परंपरा जीवंत होगी।
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