Security forces uncover Jaish-e-Mohammed terror hideout in Kishtwar forest, Jammu and Kashmir
Kishtwar Jaish Terror Hideout: जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भारतीय सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में एक अहम सफलता हाथ लगी है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपकर बैठे आतंकियों के मंसूबों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक सीक्रेट ठिकाने का पर्दाफाश किया। यह ठिकाना किश्तवाड़ के चतरू इलाके के जंगलों में बना हुआ था, जहां से तीन महीने का राशन और रोजमर्रा के इस्तेमाल का भारी सामान बरामद हुआ है। यह बरामदगी साफ इशारा करती है कि आतंकी किसी बड़े और लंबे ऑपरेशन की तैयारी में थे।
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सैफुल्लाह ग्रुप पर शक
खुफिया एजेंसियों के आकलन के मुताबिक यह ठिकाना जैश-ए-मोहम्मद के सैफुल्लाह ग्रुप का हो सकता है। इस ग्रुप में सैफुल्लाह के साथ फारमान और आदिल जैसे आतंकी शामिल बताए जा रहे हैं। कुल मिलाकर इस मॉड्यूल में 3 से 4 आतंकियों के सक्रिय होने की जानकारी है। सूत्रों के अनुसार, ये सभी आतंकी 2022–23 के दौरान भारत में घुसपैठ कर चुके थे और तभी से जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में अपने लिए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में थे।
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ठिकाने से क्या-क्या मिला?
सुरक्षा बलों ने जब जंगल के भीतर बने इस अस्थायी ठिकाने की तलाशी ली, तो वहां से रोजमर्रा के इस्तेमाल का इतना सामान मिला कि एजेंसियां भी हैरान रह गईं। बरामद सामग्री में शामिल हैं,
- गेहूं, दाल और चावल की बोरियां
- आटा, रिफाइंड तेल और घी के डिब्बे
- अंडों की पेटियां
- 50 से ज्यादा इंस्टेंट नूडल्स के पैकेट
- चाय पत्ती, चीनी और नमक के पैकेट
- एलपीजी सिलेंडर और गैस चूल्हा
- कंबल और अन्य जरूरी सामान
- सिगरेट के पैकेट और दैनिक उपयोग की वस्तुएं
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खुफिया एजेंसियों के अनुसार यह राशन कम से कम चार आतंकियों की तीन महीने की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त था। इससे साफ है कि आतंकी लंबे समय तक इसी इलाके में टिककर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे थे।
ये है आतंकी रणनीति का अहम हिस्सा
किश्तवाड़ का चतरू इलाका घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और सीमित आबादी के लिए जाना जाता है। आतंकी संगठन अक्सर ऐसे इलाकों को इसलिए चुनते हैं ताकि वे सुरक्षाबलों की नजर से दूर रह सकें और लंबे समय तक अपनी मौजूदगी छुपाए रख सकें। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ठिकाना सिर्फ छिपने के लिए नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक बेस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां से आसपास के इलाकों में गतिविधियां संचालित की जा सकें।
पाकिस्तान में मिली ट्रेनिंग, पहाड़ों में रहने की खास तैयारी
खुफिया सूत्रों के अनुसार इस ग्रुप को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हंगू इलाके में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप में ट्रेनिंग दी गई थी। यहां इन्हें,
- पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक रहने
- सीमित संसाधनों में जिंदा रहने
- जंगलों में छिपने और मूवमेंट
- सुरक्षाबलों से बचकर लड़ाई लड़ने
जैसी ट्रेनिंग दी गई थी। बताया जा रहा है कि इस ट्रेनिंग की कमान जैश के कमांडर मुराद अजहर के हाथों में थी।
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सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन तेज, घेरे में आतंकी
ठिकाने के भंडाफोड़ के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में सर्च और कॉर्डन ऑपरेशन तेज कर दिया है। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर जंगलों, पहाड़ियों और संभावित मूवमेंट रूट्स पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ठिकाना उजागर होने के बाद आतंकी दबाव में हैं और उनके मूवमेंट की संभावना बढ़ गई है, जिससे उन्हें पकड़ना या निष्क्रिय करना आसान हो सकता है।
स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की भी जांच शुरू
बरामद सामान की मात्रा और प्रकार को देखते हुए एजेंसियों को शक है कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद मिली होगी। इतने बड़े पैमाने पर राशन और गैस सिलेंडर जैसी चीजों का जंगल तक पहुंचना बिना किसी सहयोग के आसान नहीं होता। इसी वजह से अब जांच एजेंसियां
- स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs)
- सप्लाई चैन
- संदिग्ध संपर्कों
की भी गहन जांच में जुट गई हैं। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
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जम्मू कश्मीर में आतंक के खिलाफ निर्णायक मोड़
विशेषज्ञों का कहना है कि किश्तवाड़ में यह बरामदगी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इससे न सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद के इस मॉड्यूल की कमर टूटी है, बल्कि यह भी साफ संदेश गया है कि सुरक्षाबल हर इलाके में सतर्क हैं। जम्मू और कश्मीर में आतंक के खिलाफ चल रही यह मुहिम आने वाले समय में और तेज होने के संकेत दे रही है। सुरक्षाबलों का दावा है कि जब तक आखिरी आतंकी को ढूंढकर निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक ऑपरेशन जारी रहेगा। किश्तवाड़ के जंगलों में मिले जैश-ए-मोहम्मद के इस ठिकाने ने आतंकियों की गहरी साजिश को उजागर कर दिया है। तीन महीने का राशन, सुरक्षित लोकेशन और विशेष ट्रेनिंग सब कुछ इस बात की ओर इशारा करता है कि आतंकी लंबे खेल की तैयारी में थे। लेकिन सुरक्षाबलों की सतर्कता ने उनके मंसूबों को वक्त रहते बेनकाब कर दिया। अब पूरा फोकस आतंकियों की गिरफ्तारी और उनके स्थानीय नेटवर्क के सफाए पर है, जिससे इलाके में स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सके।
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