Somnath Amrit Parv 2026: भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग माने जाने वाले Somnath Temple में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर Somnath Amrit Parv 2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी, फूलों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया है। देशभर से हजारों श्रद्धालु और साधु-संत इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए सोमनाथ पहुंचे हैं।
इस बार का आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर पहली बार ‘कुंभाभिषेक’ अनुष्ठान किया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत शुभ और दुर्लभ अवसर माना जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह अनुष्ठान वैदिक परंपराओं और विशेष शुभ मुहूर्त में संपन्न होगा।
11 पवित्र तीर्थों के जल से होगा शिखर का कुंभाभिषेक
Somnath Amrit Parv 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण मंदिर के शिखर पर होने वाला कुंभाभिषेक है। जानकारी के मुताबिक, देश के 11 पवित्र तीर्थों से लाया गया जल इस अनुष्ठान में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से विशाल कलश तैयार किए गए हैं, जिनमें पवित्र जल भरा गया है।
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अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच विशाल क्रेन की मदद से कलश को मंदिर के शिखर तक पहुंचाया जाएगा। वहां पुरोहित और वेदाचार्य भगवान शिव के मंदिर के शिखर का अभिषेक करेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस आयोजन की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं और सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी की गई है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह आयोजन आने वाले वर्षों तक सोमनाथ मंदिर के इतिहास में याद रखा जाएगा। कई भक्तों ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम बताया है।
क्या होता है कुंभाभिषेक?
हिंदू मंदिर परंपरा में कुंभाभिषेक को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसका उद्देश्य मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को पुनर्जीवित करना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना होता है। इस प्रक्रिया में मंदिर के शिखर, कलश और गर्भगृह में स्थापित देव प्रतिमा पर पवित्र जल, औषधियों और वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक किया जाता है।
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दक्षिण भारत के कई प्राचीन मंदिरों में यह परंपरा लंबे समय से प्रचलित है, लेकिन सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार इस तरह का आयोजन होना इसे ऐतिहासिक बना रहा है। धार्मिक मान्यता है कि कुंभाभिषेक से मंदिर की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।
75 साल पहले हुआ था मंदिर का पुनर्निर्माण
Somnath Temple का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव यानी सोम ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा। ऋग्वेद सहित कई प्राचीन ग्रंथों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है।
इतिहास में कई विदेशी आक्रमणों के दौरान मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। आजादी के बाद देश के पहले गृह मंत्री Sardar Vallabhbhai Patel ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। इसके बाद मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया गया और 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने इसकी प्राण प्रतिष्ठा की थी।
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अब उसी ऐतिहासिक दिन के 75 वर्ष पूरे होने पर Somnath Amrit Parv 2026 मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है।
श्रद्धालुओं में दिखा भारी उत्साह
सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। गुजरात सहित देश के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए पूरे इलाके में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।
मंदिर के आसपास के होटल और धर्मशालाएं श्रद्धालुओं से भरी हुई हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि Somnath Amrit Parv 2026 के कारण क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा फायदा मिला है।
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हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है सोमनाथ
सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजा करने से भक्तों के जीवन से दुख और कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस बार का आयोजन मंदिर के इतिहास में एक नई पहचान जोड़ रहा है। Somnath Amrit Parv 2026 न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था के भव्य उत्सव के रूप में भी देखा जा रहा है।
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