Nepal Flood 2026: Rising Bhotekoshi River water level in flood-affected areas.(pc- ANI)
Nepal Flood 2026: नेपाल में आई भीषण अचानक बाढ़ के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुए थे कि एक बार फिर मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने के बाद नदी के आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने रसुवा समेत आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश और आंधी की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।
26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। इस हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इसी बीच नदी के जलस्तर में फिर वृद्धि ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। Nepal Flood 2026 के तहत सामने आई इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है।
भोटेकोशी के आसपास फिर बढ़ा खतरा(Nepal Flood 2026)
NDRRMA की ओर से जारी चेतावनी के मुताबिक रसुवा क्षेत्र में तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है। इसके चलते भोटेकोशी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन समेत आसपास के क्षेत्रों में राहत, खोज और बचाव अभियान में जुटे कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबा आने का खतरा लगातार बना रहता है। नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से पहले से प्रभावित इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब तक 675 लोगों की मौत का दावा
बाढ़ के बाद नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और लापता होने की खबर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 675 लोगों की मौत बताई जा रही है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के अलावा दूसरे देशों के लोग भी शामिल हैं।
भारत के भी कई नागरिकों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। बताया गया है कि करीब 320 भारतीय नागरिकों के लापता होने की बात सामने आई है। राहत अभियान के दौरान 7,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 108 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, आपदा के बाद जारी आंकड़ों में बदलाव संभव है। अलग-अलग एजेंसियों की ओर से राहत और खोज अभियान जारी रहने के कारण मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या की स्थिति लगातार अपडेट हो सकती है।
खराब मौसम ने बढ़ाई बचाव अभियान की मुश्किल
बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। करीब 18 हजार पुलिसकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचने और मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
लेकिन लगातार खराब मौसम राहत कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। वहीं भारी मलबे के कारण कई इलाकों में आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
भयानक बाढ़ के बाद कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक 200 से ज्यादा शव ऐसे हैं, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। लंबे समय तक शवों की पहचान नहीं होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ने की चिंता है।
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अधिकारियों के अनुसार पहचान सुनिश्चित करने के लिए शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित किए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक शव को एक पहचान संख्या देकर उसका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। भविष्य में डीएनए मिलान के जरिए परिवारों को अपने लापता परिजनों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत सामग्री
इस मुश्किल समय में भारत की ओर से भी नेपाल को सहायता दी जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत की चौथी राहत उड़ान नेपाल पहुंची है। इस विमान में करीब 11 टन राहत सामग्री और खोज एवं बचाव अभियान में इस्तेमाल होने वाला जरूरी सामान भेजा गया।
भारत की ओर से नेपाल में चल रहे राहत अभियान में आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन के स्तर पर सहयोग जारी है।
नेपाल से सुरक्षित लौटे करीब 100 भारतीय पर्यटक
बाढ़ के दौरान नेपाल में फंसे नागपुर के करीब 100 पर्यटक भी सुरक्षित भारत लौट आए हैं। यात्रियों ने नेपाल में बिताए अपने अनुभव को बेहद डरावना बताया। यात्रियों के अनुसार खराब मौसम और बढ़ते जलस्तर के कारण कई स्थानों पर स्थिति बेहद मुश्किल हो गई थी।
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एक यात्री ने बताया कि उनका समूह बाढ़ प्रभावित स्थान से करीब 50 किलोमीटर दूर था और काठमांडू में फंस गया था। उन्होंने बताया कि भारी बारिश के दौरान उन्होंने एक बस को पानी में डूबते हुए भी देखा।
आगे भी सतर्क रहने की जरूरत
Nepal Flood 2026 की इस आपदा के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक लगातार सहायता पहुंचाना और संभावित नई आपदा से उन्हें सुरक्षित रखना है। भोटेकोशी का बढ़ता जलस्तर और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
बारिश और आंधी का खतरा पूरी तरह टलने तक स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और सुरक्षा एजेंसियां मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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