Indian lawn bowls player Pinky Singh competing at the Commonwealth Games 2026 after inspiring comeback and multiple international medal wins.
Pinky Singh Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में आयोजित अभियान भारत के लिए शानदार साबित हो रहा है। महिला लॉन बॉल्स पेयर्स स्पर्धा में अनुभवी खिलाड़ी पिंकी सिंह और उनकी जोड़ीदार रूपा रानी तिर्की ने लगातार दूसरी जीत दर्ज कर भारत की पदक उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। भारतीय जोड़ी ने साउथ अफ्रीका को 2-0 (6-4, 7-5) से हराकर अपनी शानदार लय बरकरार रखी। इससे पहले टीम ने पहले मुकाबले में माल्टा को टाई-ब्रेकर में हराकर विजयी शुरुआत की थी।
लगातार दो जीतों के बाद भारतीय टीम नॉकआउट चरण की ओर मजबूती से बढ़ रही है। इस सफलता के पीछे सबसे अधिक चर्चा 45 वर्षीय अनुभवी खिलाड़ी पिंकी सिंह की हो रही है, जिन्होंने अपने अनुभव और शांत खेल से टीम को लगातार मजबूती प्रदान की है।
क्रिकेट कोच से अंतरराष्ट्रीय लॉन बॉल्स खिलाड़ी बनने तक का सफर
Pinky Singh Commonwealth Games 2026 की कहानी केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि पिंकी सिंह का खेल करियर लॉन बॉल्स से नहीं बल्कि क्रिकेट से शुरू हुआ था।
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साल 2007 में उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में क्रिकेट कोच के रूप में काम करना शुरू किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात लॉन बॉल्स खेल से हुई। शुरुआत में यह केवल एक नया अनुभव था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसी खेल को अपना लक्ष्य बना लिया। लगातार अभ्यास और मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया और फिर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
2022 में रचा था इतिहास
भारत में लॉन बॉल्स को नई पहचान दिलाने में पिंकी सिंह का अहम योगदान रहा है। वर्ष 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने भारतीय महिला टीम के साथ ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गर्व का अवसर दिया।
उस जीत ने न केवल भारतीय लॉन बॉल्स के इतिहास को बदल दिया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कम लोकप्रिय खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। अब Pinky Singh Commonwealth Games 2026 में एक बार फिर उनसे स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
निजी जिंदगी की कठिनाइयों के बीच नहीं टूटा आत्मविश्वास
मैदान पर हमेशा मुस्कुराती नजर आने वाली पिंकी सिंह का निजी जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। वर्ष 2019 में उनकी शादी हुई, लेकिन कुछ समय बाद रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। वर्ष 2021 में उन्होंने तलाक की प्रक्रिया शुरू की और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2022 में उनका तलाक अंतिम रूप से संपन्न हुआ।
यह वही समय था जब कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम का चयन होना था। मानसिक तनाव, पारिवारिक चुनौतियों और व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अभ्यास जारी रखा और उसी वर्ष भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
एशियाई स्तर पर भी शानदार उपलब्धियां
Pinky Singh Commonwealth Games 2026 से पहले भी पिंकी सिंह का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने एशियन लॉन बॉल्स चैंपियनशिप में कई बार भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है।
उन्होंने 2017 में ट्रिपल्स स्पर्धा में गोल्ड जीता। इसके बाद 2023 में फोर्स स्पर्धा और 2025 में एक बार फिर ट्रिपल्स वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा उनके खाते में एक रजत और दो कांस्य पदक भी दर्ज हैं। एशिया पैसिफिक प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने भारत के लिए पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की है
अनुभव बन रहा भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत
कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में अनुभव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 45 वर्ष की उम्र में पिंकी सिंह भारतीय दल की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं। मैच के दबाव में शांत रहना, रणनीति बनाना और सही समय पर सटीक प्रदर्शन करना उनकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।
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रूपा रानी तिर्की के साथ उनकी समझ और तालमेल भी भारतीय टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लगातार दो जीत इस बात का संकेत हैं कि भारतीय जोड़ी इस बार भी पदक जीतने की मजबूत दावेदार है।
भारत की बढ़ीं पदक जीतने की उम्मीदें
भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम का प्रदर्शन इस बार बेहद संतुलित नजर आ रहा है। शुरुआती दोनों मुकाबलों में मिली जीत ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। यदि टीम इसी लय को बनाए रखती है तो Pinky Singh Commonwealth Games 2026 अभियान भारत के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि पिंकी सिंह का अनुभव और रूपा रानी तिर्की की ऊर्जा भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा
पिंकी सिंह की कहानी केवल एक सफल खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से समझौता करने लगते हैं।
उन्होंने यह साबित किया कि असफल रिश्ते, मानसिक तनाव या व्यक्तिगत चुनौतियां किसी भी इंसान की मंजिल तय नहीं करतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो हर कठिन दौर को पीछे छोड़कर सफलता हासिल की जा सकती है।
Pinky Singh Commonwealth Games 2026 केवल एक खिलाड़ी के प्रदर्शन की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। क्रिकेट कोच के रूप में करियर शुरू करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय लॉन बॉल्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने तक उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। निजी जीवन की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर बार खुद को पहले से अधिक मजबूत बनाकर मैदान पर उतरीं। अब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एक बार फिर देश की निगाहें पिंकी सिंह पर टिकी हैं और उम्मीद है कि वह अपने अनुभव और शानदार प्रदर्शन से भारत के लिए एक और पदक जीतकर इतिहास रचेंगी।
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