Punjab Custodial Assault Case as NHRC seeks report over alleged police torture and custodial assault
Punjab Custodial Assault Case: पंजाब में कथित पुलिस हिरासत के दौरान मारपीट और टॉर्चर के आरोपों से जुड़े मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। Punjab Custodial Assault Case में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने मामले से जुड़े CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।
मामले में पंजाब पुलिस के कुछ जवानों पर एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों के साथ कथित रूप से मारपीट करने, हिरासत में प्रताड़ित करने और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद अब NHRC ने संबंधित अधिकारियों को जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
सांसद की शिकायत पर NHRC ने लिया संज्ञान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की ओर से की गई शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने पहुंचा। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पंजाब में एक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों के साथ पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुआ।
शिकायत के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति पंजाब में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान विरोध कर रहा था। आरोप है कि व्यक्ति ने विरोध के तौर पर काला झंडा दिखाया था। इसके बाद कथित रूप से उसे पुलिस हिरासत में ले लिया गया।
यही घटना अब Punjab Custodial Assault Case के रूप में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आई है। शिकायत में हिरासत के दौरान कथित मारपीट और टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश
इस मामले पर NHRC की सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई करते हुए पंजाब प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, संगरूर के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट को मामले की जांच कराने के लिए कहा है।
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मामले से संबंधित विस्तृत और पॉइंट-वाइज Action Taken Report दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने को कहा गया है।
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Punjab Custodial Assault Case में आयोग की कार्रवाई के बाद अब पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से की जाने वाली जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। NHRC यह जानना चाहता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के दौरान क्या परिस्थितियां थीं और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
पीड़ित की मेडिको-लीगल जांच कराने के निर्देश
NHRC ने मामले में पीड़ित की तत्काल मेडिको-लीगल जांच कराने के भी निर्देश दिए हैं। किसी भी कथित कस्टोडियल असॉल्ट मामले में मेडिकल जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे चोटों और शारीरिक स्थिति से संबंधित तथ्यों की जानकारी मिल सकती है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि पीड़ित की जांच से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। जांच रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों को मामले की आगे की जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है। NHRC ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि घटना से संबंधित कोई भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड नष्ट, बदला या प्रभावित न हो।
CCTV फुटेज की बिना एडिट कॉपी सुरक्षित रखने का आदेश
Punjab Custodial Assault Case में NHRC ने CCTV रिकॉर्डिंग को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। आयोग ने संबंधित पुलिस परिसर या स्थान की पूरी और बिना एडिट की गई CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने को कहा है।
आयोग के निर्देश के अनुसार, CCTV फुटेज की एक प्रमाणित कॉपी सुरक्षित माध्यम से उपलब्ध कराई जानी है। डिजिटल साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो, इसके लिए फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
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कथित हिरासत और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में CCTV फुटेज घटनाक्रम को समझने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित व्यक्ति को कब और किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया तथा पुलिस परिसर में उसके साथ क्या घटनाक्रम हुआ।
FIR और हिरासत रिकॉर्ड की भी होगी जांच
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस अधिकारियों को FIR और हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, मामले में शामिल पुलिसकर्मियों और पूछताछ या हिरासत की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का विवरण भी मांगा गया है।
आयोग ने पीड़ित के परिवार के सदस्यों से जुड़े आरोपों पर भी रिपोर्ट मांगी है। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि शिकायत में जिन लोगों के साथ कथित मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, उनके मामले में पुलिस की भूमिका क्या रही।
इस तरह Punjab Custodial Assault Case की जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिकायत में शामिल सभी आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
सभी इलेक्ट्रॉनिक और पुलिस रिकॉर्ड संरक्षित रखने पर जोर
NHRC ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी प्रकार के सबूत तुरंत सुरक्षित किए जाएं। इनमें मेडिकल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा शामिल हैं।
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किसी भी जांच में साक्ष्यों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। खासकर ऐसे मामलों में, जहां पुलिस हिरासत के दौरान कथित मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हों, वहां रिकॉर्ड की उपलब्धता जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जांच से पहले या जांच के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या डिजिटल डेटा प्रभावित न हो।
पंजाब पुलिस की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगा मामला
अब इस मामले में पंजाब सरकार और संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से NHRC को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी। दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट में प्रशासन को शिकायत के हर बिंदु पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
Punjab Custodial Assault Case में NHRC का संज्ञान यह दर्शाता है कि आयोग ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की जांच के लिए संस्थागत प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
फिलहाल आयोग ने जांच से पहले ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि CCTV फुटेज, मेडिकल दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रहें। आने वाले दिनों में पंजाब प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट से इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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