Ram Mandir Donation Theft Case: Supreme Court Disposes of 5 Petitions (Pic-X)
Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दाखिल पांच याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया कि विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले में आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने (Ram Mandir Donation Theft Case) का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने साफ किया कि अब मामले पर ट्रायल कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता चाहें तो मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर अदालत की मदद कर सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले में लगाए गए आरोपों की सच्चाई या उनके गुण-दोष (Ram Mandir Donation Theft Case)पर कोई राय नहीं दी है।
SIT ने 105 घटनाओं की जानकारी दी थी
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 27 जुलाई को राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आदेश का पालन करते हुए नई SIT गठित कर दी गई है। इस टीम की (Ram Mandir Donation Theft Case) कमान लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस को सौंपी गई। टीम में एक डीआईजी और एक एसएसपी को भी शामिल किया गया। 21 सितंबर को SIT ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी।
जांच टीम ने बताया था कि चढ़ावे की चोरी से जुड़ी कुल 105 घटनाओं की जानकारी मिली है। जांच के दौरान 8 लोगों के खिलाफ सबूत मिलने की बात भी कही गई थी। इन सबूतों में सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) और बैंक खातों के रिकॉर्ड शामिल थे। रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIT को आरोपपत्र दाखिल करने की (Ram Mandir Donation Theft Case) अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को क्या अधिकार दिया?
सोमवार, 2 नवंबर को हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि SIT ने अयोध्या के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इस जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं समझी और उनका निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि अब ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश मामले को कानून के मुताबिक देखेंगे।
साथ ही, याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी गई कि वे चाहें तो मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर ट्रायल कोर्ट (Ram Mandir Donation Theft Case) की सहायता कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि याचिकाओं का निपटारा करने का मतलब आरोपों पर कोई फैसला देना नहीं है। मामले की सुनवाई और आगे की कार्रवाई निचली अदालत में होगी।
CBI जांच से लेकर फोरेंसिक ऑडिट तक की गई थी मांग
सुप्रीम कोर्ट में कुल पांच याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन्हें वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, हिंदू धर्म परिषद और अखिल भारत हिंदू महासभा ने दाखिल किया था। याचिकाओं में मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने और विशेष SIT गठित करने की मांग की गई थी। इसके अलावा राम मंदिर ट्रस्ट के दान प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने, ट्रस्ट का फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) कराने और मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे का पूरा ब्योरा आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग भी (Ram Mandir Donation Theft Case) शामिल थी।
राम मंदिर ट्रस्ट में भी हुए बड़े बदलाव
चढ़ावे की रकम की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी कुछ बदलाव किए गए। ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया और वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, 27 जून को ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी पांचों याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अब आरोपपत्र के आधार पर अयोध्या की निचली अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया (Ram Mandir Donation Theft Case) चलेगी। मामले में आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला ट्रायल कोर्ट में होगा।
News Source: ANI
