Saharanpur Mosque Demolition with bulldozers deployed inside the Collectorate complex.(pc- team)
Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार सुबह बड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल गया। रातभर कार्रवाई की चर्चाओं और अफवाहों के बीच शनिवार तड़के प्रशासन ने परिसर में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह होते-होते मस्जिद का एक हिस्सा गिराया जा चुका था। इस Saharanpur Mosque Demolition कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा।
कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में देर रात अचानक बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था ने शहर में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया। जैसे-जैसे रात आगे बढ़ी, सोशल मीडिया पर मस्जिद को गिराए जाने की खबरें फैलने लगीं। हालांकि, सुबह करीब चार बजे जब बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई तो रातभर की चर्चाएं वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई में बदल गईं।
छह बुलडोजरों के साथ शुरू हुई कार्रवाई
शनिवार तड़के प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा कड़ी कर दी। परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसके बाद बुलडोजरों को परिसर के भीतर पहुंचाया गया।
Read: छात्रा को मुर्गा बनाने पर भड़का पिता, स्कूल में घुसकर प्रिंसिपल से मारपीट का आरोप
जानकारी के अनुसार, पूरी इमारत को हटाने के लिए करीब छह बुलडोजर लगाए गए। कार्रवाई शुरू होने के बाद मस्जिद का एक हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया। Saharanpur Mosque Demolition के दौरान किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे।
जिला अदालत ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश
इस कार्रवाई के पीछे लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद बताया जा रहा है। 2 सितंबर 2026 को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने मस्जिद पक्ष की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया था। अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की ओर से 16 जुलाई 2026 को दिए गए आदेश को बरकरार रखा।
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को जिला अदालत में अपील दाखिल की थी। इस मामले में अदालत में कई तारीखों पर सुनवाई हुई। उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार के बाद जिला अदालत ने अपील को स्वीकार नहीं किया।
सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए दिया गया था आदेश
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में विवादित निर्माण को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया था। आदेश में तय समय के भीतर बेदखली के निर्देश भी दिए गए थे।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, संबंधित पक्ष को 30 दिनों के भीतर परिसर खाली करने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति का भी उल्लेख किया गया था। मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि संबंधित संपत्ति वक्फ की है और मस्जिद काफी पुरानी है। पक्ष की ओर से इसके लगभग 150 वर्ष पुराना होने का दावा किया गया। हालांकि, अदालत में इस दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद निचली अदालत के आदेश को जिला अदालत ने भी बरकरार रखा।
रातभर फैलती रही कार्रवाई की चर्चा
Saharanpur Mosque Demolition की चर्चा शुक्रवार देर रात तेजी से शुरू हुई। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास अचानक पुलिस बल की संख्या बढ़ने लगी। कुछ समय बाद शहर में यह खबर फैल गई कि प्रशासन रात में ही मस्जिद पर कार्रवाई कर सकता है।
सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में लगातार चर्चाएं होने लगीं। जानकारी मिलने के बाद मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग और कई राजनीतिक नेता सक्रिय हो गए। लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी।
राजनीतिक नेताओं की भी बढ़ी सक्रियता
मामले को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी। उनके परिवार की ओर से भी घटनाक्रम पर नजर रखे जाने की जानकारी सामने आई। वहीं समाजवादी पार्टी के कुछ नेता भी कलेक्ट्रेट परिसर की ओर पहुंचे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।
बताया गया कि सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेताओं को कलेक्ट्रेट के बाहर रोक दिया गया। परिसर के पांच प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। भारी पुलिस बल के साथ स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की भी तैनाती की गई।
डीएम से मुलाकात के बाद भी बदल गया घटनाक्रम
रात के दौरान कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात भी की। नेताओं की ओर से मस्जिद पर संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। बताया गया कि उस समय प्रशासन की ओर से केवल परिसर को सील करने की बात कही गई थी और तत्काल ध्वस्तीकरण नहीं होने का भरोसा दिया गया था।
इसी कारण रात में मौजूद लोगों को उम्मीद थी कि शनिवार सुबह कोई बड़ा एक्शन नहीं होगा। लेकिन तड़के करीब चार बजे प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गईं और कुछ ही समय बाद बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
सुबह चार बजे से शुरू हुआ बुलडोजर एक्शन
शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर पूरी तरह सुरक्षा घेरे में था। आम लोगों को परिसर से दूर रखा गया और बाहरी आवाजाही को नियंत्रित किया गया। इसके बाद बुलडोजर विवादित निर्माण तक पहुंचाए गए।
Saharanpur Mosque Demolition की कार्रवाई सुबह तक जारी रही। पुलिस ने आसपास किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी। प्रशासन का पूरा फोकस कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर रहा।
2025 में शुरू हुआ था पूरा विवाद
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज हुआ।
ALSO READ: BOLLYWOOD NEWS |COMMONWEALTH GAME 2026 | SPORT NEWS | CRIME NEWS
मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत हुई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने विवादित निर्माण को अवैध मानते हुए बेदखली का आदेश दिया। इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया, लेकिन 2 सितंबर को अपील खारिज हो गई।
अब आगे क्या होगा?
शनिवार की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा का केंद्र बन गया है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश और उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है। वहीं मस्जिद पक्ष की ओर से आगे कानूनी विकल्पों और अन्य स्तरों पर कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल Saharanpur Mosque Demolition के बाद कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मस्जिद पक्ष इस मामले में आगे कौन सा कानूनी कदम उठाता है और इस विवाद का अगला चरण किस दिशा में बढ़ता है।
