Sugar Price in India rises to ₹74 per kg amid supply and production concerns.(pc- getty Images)
Sugar Price in India: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में कई जगह चीनी 60 रुपये किलो से ऊपर बिक रही है, जबकि कुछ बाजारों में इसकी कीमत 74 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। सरकार की ओर से आयात और स्टॉक को लेकर उठाए गए कदमों के बावजूद कीमतों में राहत नहीं दिख रही है।
रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली चीनी अब घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। चाय से लेकर मिठाई और कई दूसरे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़ी है। Sugar Price in India को लेकर उपलब्ध सरकारी आंकड़े बताते हैं कि खुदरा बाजार में औसत कीमत लगातार ऊपर जा रही है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अगस्त को देश में चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलोग्राम रही। एक सप्ताह पहले यह औसत कीमत 63.12 रुपये प्रति किलो थी। यानी केवल एक सप्ताह में इसमें करीब 1.77 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एक महीने में करीब 30 फीसदी बढ़ी कीमत
चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा चिंता इसकी हालिया तेजी को लेकर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा औसत खुदरा कीमत एक महीने पहले की तुलना में करीब 30 फीसदी अधिक है। वहीं पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 38.63 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
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30 अगस्त को अलग-अलग बाजारों में चीनी की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला। देश में इसकी अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम कीमत 40 रुपये प्रति किलो रही। बड़े शहरों की बात करें तो दिल्ली में चीनी करीब 62 रुपये, मुंबई में 66 रुपये, चेन्नई में 63 रुपये और रांची में 68 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रही थी। इससे साफ है कि स्थानीय बाजारों में कीमतें अलग-अलग बनी हुई हैं।
थोक बाजार में भी नहीं मिली राहत
केवल खुदरा बाजार ही नहीं, थोक कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीनी की औसत थोक कीमत 59.73 रुपये प्रति किलोग्राम रही। एक सप्ताह पहले यह कीमत 58.66 रुपये थी।
एक महीने के मुकाबले थोक कीमत करीब 31 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 38.63 फीसदी ज्यादा बताई गई है। थोक बाजार में तेजी का असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है।
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हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी की कमी आने की बात सामने आई है।
मिल से दुकान तक क्यों बढ़ रहा अंतर?
चीनी की कीमतों को समझने के लिए मिल, थोक बाजार और खुदरा बाजार के बीच के अंतर को देखना जरूरी है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, मिल स्तर और थोक कीमत के बीच दो से तीन रुपये प्रति किलो का अंतर सामान्य माना जाता है।
इसी तरह मिल स्तर की कीमत और खुदरा बाजार की कीमत के बीच करीब सात से आठ रुपये प्रति किलो का अंतर भी सामान्य दायरे में माना जाता है। लेकिन जब खुदरा कीमतों में तेजी बनी रहती है, तब सप्लाई चेन और वितरण लागत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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सरकार ने उठाए कई कदम
बढ़ती Sugar Price in India को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा थोक उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। सरकार पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगा चुकी है। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों का ऊंचा बने रहना एक अलग सवाल खड़ा करता है।
उत्पादन अनुमान ने बढ़ाई चिंता
चीनी की कीमतों के पीछे उत्पादन का अनुमान भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए देश में चीनी उत्पादन पहले लगाए गए 343 लाख टन के अनुमान से घटकर करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है।
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वहीं देश की सालाना घरेलू चीनी खपत करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी उत्पादन और घरेलू मांग के बीच अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में सप्लाई, स्टॉक और बाजार में वितरण की स्थिति कीमतों को प्रभावित करने वाली अहम कड़ी बन सकती है।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
फिलहाल आम उपभोक्ता की नजर इस बात पर है कि सरकार के आयात संबंधी फैसलों और स्टॉक नियंत्रण का असर खुदरा बाजार तक कब पहुंचता है। मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट के बावजूद दुकानों पर महंगी चीनी मिलने से उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली है।
अगर सप्लाई में सुधार होता है और बाजार में पर्याप्त स्टॉक पहुंचता है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन फिलहाल Sugar Price in India में तेजी घरेलू बजट के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और लोगों को चीनी के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
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