Nitin Gadkari addressing explains mileage impact and clarifying that E20 fuel does not damage vehicle engines in India.
E20 Petrol को लेकर देशभर में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और अफवाहों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि E20 Petrol से वाहन का इंजन खराब होने या इंजन सीज होने जैसी बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में मामूली कमी महसूस हो सकती है, लेकिन यह सामान्य तकनीकी कारणों से होता है और इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
पिछले कुछ महीनों से E20 Petrol को लेकर वाहन मालिकों के बीच कई तरह की शंकाएं सामने आ रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि नए ईंधन के इस्तेमाल से इंजन की लाइफ कम हो जाएगी, वाहन के पार्ट्स खराब हो जाएंगे और माइलेज में भारी गिरावट आएगी। अब केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद इन दावों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आ गया है।
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क्या है E20 Petrol और क्यों किया जा रहा है इसका इस्तेमाल?
E20 Petrol ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण को घटाना है। भारत लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर काम कर रहा है और चरणबद्ध तरीके से E20 Petrol को पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल एक स्वदेशी ईंधन है, जिसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है।
माइलेज में क्यों आ सकती है हल्की कमी?
नितिन गडकरी ने बताया कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इसी कारण E20 Petrol का उपयोग करने पर कुछ परिस्थितियों में माइलेज थोड़ा कम महसूस हो सकता है। हालांकि यह अंतर बहुत अधिक नहीं होता और आम उपयोगकर्ताओं को इसकी वजह से किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने यह भी कहा कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल, गाड़ी की सर्विसिंग और टायर प्रेशर जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। महानगरों में बार-बार ब्रेक लगाने और धीमी गति से वाहन चलाने के कारण वैसे भी माइलेज कम हो जाता है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी E20 Petrol पर डालना सही नहीं होगा।
इंजन खराब होने की बात क्यों गलत है?
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि E20 Petrol से इंजन खराब होने का दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। उन्होंने बताया कि देशभर में इस ईंधन को लागू करने से पहले पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने व्यापक परीक्षण किए हैं।
इन परीक्षणों में पाया गया कि निर्धारित मानकों के अनुसार निर्मित और मेंटेन किए गए वाहनों पर E20 Petrol का कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। सरकार ने वाहन निर्माताओं को यह भी निर्देश दिए हैं कि पुराने मॉडलों में जहां आवश्यकता हो, वहां सर्विसिंग के दौरान कुछ छोटे तकनीकी बदलाव बिना अतिरिक्त शुल्क के किए जाएं।
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विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में इंजन की समस्या का कारण ईंधन में मिलावट, खराब रखरखाव या समय पर सर्विसिंग न होना होता है, न कि E20 Petrol का उपयोग।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक बनेगी भविष्य की दिशा
सरकार अब फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। ऐसे इंजन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर आसानी से काम कर सकते हैं। ARAI की रिपोर्ट के अनुसार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में प्रदर्शन और माइलेज दोनों बेहतर बनाए रखे जा सकते हैं।
देश की कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां जैसे टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, महिंद्रा, हुंडई और टोयोटा भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। इससे E20 Petrol और भविष्य के उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों का उपयोग और अधिक आसान हो जाएगा।
ब्राजील का उदाहरण भी बना आधार
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन कोई नया प्रयोग नहीं है। ब्राजील जैसे देश में दशकों से 27 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का सफल उपयोग किया जा रहा है। वहां करोड़ों वाहन लंबे समय से ऐसे ईंधन पर चल रहे हैं और इसे एक सफल मॉडल माना जाता है।
भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाई जा सके और स्वदेशी ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
डीजल के विकल्प पर भी तेजी से काम
सरकार केवल E20 Petrol तक सीमित नहीं है बल्कि डीजल के विकल्पों पर भी लगातार काम कर रही है। भारी वाहनों के लिए मेथेनॉल आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के प्रयोग पर कई परियोजनाएं चल रही हैं। कुछ राज्यों में मेथेनॉल मिश्रित ईंधन से बसों का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
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सरकार का मानना है कि यदि वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ता है तो इससे ईंधन आयात पर होने वाला भारी खर्च कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
विशेषज्ञों की सलाह क्या है?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनी ने आपके मॉडल को E20 Petrol के लिए उपयुक्त बताया है, तो इस ईंधन के उपयोग को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। नियमित सर्विसिंग, गुणवत्ता वाले ईंधन का इस्तेमाल और वाहन की समय-समय पर जांच कराने से इंजन लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करता है।
सरकार भी लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि E20 Petrol को लेकर फैल रही अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रमाणिक जानकारी पर विश्वास करना चाहिए। आने वाले वर्षों में एथेनॉल आधारित ईंधन भारत की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं और इसका उद्देश्य आम लोगों को स्वच्छ, किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।
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