Hormuz Strait Closure by Iran raises concerns over global crude oil supply and possible petrol-diesel price hike.
Hormuz Strait: मध्य पूर्व में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल Hormuz Strait को अगली सूचना तक बंद कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि एक जहाज ने निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन नहीं किया और अपना ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद कर दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की आपूर्ति और पेट्रोल-डीजल की संभावित कीमतों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
हालांकि इस तरह के दावों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि और समुद्री गतिविधियों की निगरानी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यदि Hormuz Strait में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो इसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। भारत सहित दुनिया के कई बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के अनुसार, एक जहाज निर्धारित समुद्री कॉरिडोर से हटकर चल रहा था और उसने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली भी बंद कर दी थी। ईरान का दावा है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने के बाद जहाज को रोका गया और इसके बाद Hormuz Strait को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया।
ईरानी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अन्य जहाज भी बिना अनुमति वाले मार्गों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें चेतावनी देने के बावजूद कथित तौर पर निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसी कारण सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव
इस घटनाक्रम के साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरानी नौसेना ने यहां तक कहा कि क्षेत्र में मौजूद विरोधी देशों के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दे कि Hormuz Strait से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित आवागमन की अनुमति दी जाएगी। अमेरिका का मानना है कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे खुला रखना अंतरराष्ट्रीय हित में है।
Hormuz Strait क्यों है दुनिया के लिए इतना अहम?
Hormuz Strait दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर, से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि यहां लंबे समय तक बाधा आती है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत पर कितना पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। यदि Hormuz Strait में लंबे समय तक व्यवधान रहता है और तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ सकता है।
कच्चा तेल महंगा होने की स्थिति में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, विमान ईंधन और माल परिवहन की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य आवश्यक सामानों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतिम प्रभाव कई अन्य आर्थिक और सरकारी नीतिगत कारकों पर भी निर्भर करता है।
बाजारों में क्यों बढ़ी चिंता?
अंतरराष्ट्रीय निवेशक किसी भी भू-राजनीतिक तनाव को गंभीरता से लेते हैं, विशेषकर तब जब मामला ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा हो। Hormuz Strait को लेकर सामने आए दावों के बाद वैश्विक बाजारों में सतर्कता बढ़ गई है।
ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि यदि समुद्री यातायात सामान्य बना रहता है तो कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है या समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे हालात में शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम भी बढ़ने की संभावना रहती है।
क्या महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी दावे के आधार पर तुरंत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव तय नहीं होता। घरेलू ईंधन मूल्य अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर, टैक्स संरचना और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति सहित कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
यदि Hormuz Strait लंबे समय तक प्रभावित रहता है और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तभी इसका असर धीरे-धीरे घरेलू ईंधन कीमतों पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल के भाव पर बनी हुई है।
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बातचीत से निकल सकता है समाधान
मौजूदा हालात में दुनिया की निगाहें अमेरिका, ईरान और अन्य संबंधित देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं। यदि बातचीत सफल रहती है और Hormuz Strait में समुद्री यातायात सामान्य होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का विषय है। इसलिए आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल ऊर्जा बाजार सतर्क है और निवेशकों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि Hormuz Strait को लेकर स्थिति कितनी जल्दी सामान्य होती है। यदि तनाव कम होता है तो तेल बाजार स्थिर रह सकता है, लेकिन यदि संकट गहराता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर महसूस किया जा सकता है।
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