India Steel Growth driven by infrastructure development, manufacturing expansion, and the Make in India initiative.
India Steel Growth: दुनिया की स्टील इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले दो दशकों तक वैश्विक स्टील मांग का केंद्र रहे चीन की रफ्तार अब धीमी पड़ रही है, जबकि भारत तेजी से नए विकास केंद्र के रूप में उभर रहा है। वैश्विक खनन और स्टील कंपनियां अब भारत को भविष्य के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में India Steel Growth वैश्विक स्टील उद्योग की दिशा बदल सकती है।
भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, औद्योगिक विस्तार और सरकार की मेक इन इंडिया नीति ने स्टील की मांग को नई ऊर्जा दी है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक और उद्योग जगत की बड़ी कंपनियां भारतीय बाजार पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।
कम खपत लेकिन सबसे ज्यादा संभावनाएं
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम प्रति व्यक्ति स्टील खपत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत में प्रति व्यक्ति तैयार स्टील की खपत लगभग 108 किलोग्राम रही। यह चीन की तुलना में काफी कम है, जहां प्रति व्यक्ति स्टील उपयोग 600 किलोग्राम से अधिक रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यही अंतर भविष्य में India Steel Growth की सबसे बड़ी वजह बन सकता है। जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, शहरों का विस्तार होगा और औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी, वैसे-वैसे स्टील की मांग में भी तेजी आएगी।
भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश है, लेकिन घरेलू मांग और उत्पादन क्षमता दोनों में विस्तार की काफी गुंजाइश अभी भी मौजूद है।
चीन के रास्ते पर नहीं चलेगा भारत
विश्लेषकों का मानना है कि भारत का विकास मॉडल चीन से अलग होगा। चीन में स्टील की मांग मुख्य रूप से रियल एस्टेट और बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाओं से पैदा हुई थी। वहीं भारत में स्टील की मांग कई क्षेत्रों से एक साथ आ रही है।
India Steel Growth की नींव इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, हाईवे, औद्योगिक कॉरिडोर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, इंजीनियरिंग उत्पादों और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर आधारित है। यही वजह है कि भारत की स्टील मांग अधिक संतुलित और टिकाऊ मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विकास भले ही चीन जितना तेज न हो, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से अधिक स्थिर साबित हो सकता है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर बना सबसे बड़ा स्टील उपभोक्ता
भारत में स्टील की कुल मांग का लगभग 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से आता है। केंद्र सरकार द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे पूंजीगत व्यय ने इस क्षेत्र को नई गति दी है।
देशभर में एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल, रेलवे स्टेशन आधुनिकीकरण, एयरपोर्ट, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन परियोजनाओं के कारण India Steel Growth को मजबूत आधार मिल रहा है।
इसके अलावा स्मार्ट सिटी मिशन, औद्योगिक पार्क और शहरी आवास परियोजनाएं भी स्टील की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मेक इन इंडिया से बढ़ेगी स्टील की खपत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया पहल का असर अब औद्योगिक क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उत्पादन और इंजीनियरिंग सेक्टर में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
नई फैक्ट्रियों, उत्पादन इकाइयों और औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में स्टील की आवश्यकता होती है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि India Steel Growth का अगला चरण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से संचालित होगा।
भारत वैश्विक कंपनियों के लिए वैकल्पिक उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे स्टील की मांग और अधिक बढ़ सकती है।
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उत्पादन बढ़ाने में सामने हैं कई चुनौतियां
हालांकि भारत के सामने कई चुनौतियां भी हैं। बड़े प्रोजेक्ट्स में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और स्थानीय स्तर पर विरोध जैसी समस्याएं अक्सर देरी का कारण बनती हैं।
विशेष रूप से पूर्वी भारत में, जहां लौह अयस्क और अन्य खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है, कई परियोजनाएं प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पातीं।
इसके बावजूद उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि India Steel Growth का सफर जारी रहेगा, भले ही इसकी गति चीन की तुलना में कुछ धीमी हो।
कच्चे माल की उपलब्धता बनी बड़ी चुनौती
भारत के पास लौह अयस्क की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन स्टील निर्माण के लिए आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाले मेटालर्जिकल कोयले के लिए देश को बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, रूस और मोजाम्बिक जैसे देशों से कोयले की आपूर्ति भारत की स्टील इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण बन गई है। जैसे-जैसे India Steel Growth आगे बढ़ेगी, कच्चे माल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होगा।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 500 मिलियन टन स्टील उत्पादन क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए संसाधनों की दीर्घकालिक उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होगी।
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ग्रीन स्टील की ओर बढ़ रहा भारत
दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर जोर दिया जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। स्टील उद्योग को भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए सरकार कई नई नीतियों पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में India Steel Growth केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रीन स्टील और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों पर भी केंद्रित होगी। स्क्रैप आधारित उत्पादन, गैस आधारित स्टील निर्माण और ऊर्जा दक्ष तकनीकों का उपयोग बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक स्टील बाजार का नया अध्याय
चीन अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है, लेकिन उसकी मांग में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसे में वैश्विक कंपनियां भविष्य की मांग के लिए भारत की ओर देख रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत चीन का विकल्प नहीं बल्कि वैश्विक स्टील उद्योग का अगला बड़ा अध्याय बनने जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, औद्योगिक विस्तार, संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के आधार पर आगे बढ़ रही India Steel Growth आने वाले वर्षों में दुनिया की स्टील इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकती है। भारत की यह यात्रा केवल उत्पादन बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो सकती है।
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