TDS Refund checking status online through the Income Tax e-filing portal to receive excess tax directly in a bank account.
TDS Refund: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है और लाखों करदाता अपने वित्तीय दस्तावेजों को व्यवस्थित करने में जुटे हैं। इसी दौरान कई लोगों के मन में एक सामान्य सवाल उठता है कि यदि सालभर के दौरान उनकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक टैक्स कट गया है, तो वह पैसा वापस कैसे मिलेगा? अच्छी बात यह है कि आयकर विभाग ऐसी स्थिति में करदाताओं को TDS Refund का दावा करने की सुविधा देता है।
कई बार नौकरीपेशा कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, निवेशकों और फ्रीलांसरों के खाते से आवश्यकता से अधिक टैक्स कट जाता है। यह अतिरिक्त राशि सरकार के पास जमा रहती है और सही प्रक्रिया अपनाने पर इसे वापस प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम समय पर और सही तरीके से आयकर रिटर्न दाखिल करना है।
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किन परिस्थितियों में मिलता है TDS Refund?
आयकर कानून के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के नाम पर वर्षभर में जमा हुआ कुल टीडीएस उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक है, तो वह TDS Refund का पात्र होता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की कंपनी ने अनुमानित आय के आधार पर अधिक टैक्स काट लिया हो, लेकिन वर्ष के अंत में विभिन्न छूटों और कटौतियों के कारण उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी कम निकलती है, तो अतिरिक्त राशि रिफंड के रूप में वापस मिल सकती है।
इसी प्रकार बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज, डिविडेंड आय, प्रोफेशनल फीस, कमीशन या अन्य आय स्रोतों पर भी कई बार आवश्यकता से अधिक टैक्स कट जाता है। ऐसी स्थिति में भी TDS Refund का दावा किया जा सकता है।
Form 26AS की जांच क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार TDS Refund प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले Form 26AS की जांच करना बेहद आवश्यक है। यह दस्तावेज आपके पैन नंबर से जुड़ा होता है और इसमें वर्षभर के दौरान जमा हुए टैक्स की पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है।
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Form 26AS में दर्ज आंकड़ों का मिलान अपनी आय और टैक्स रिकॉर्ड से करना चाहिए। यदि किसी संस्था द्वारा काटा गया टैक्स इसमें दिखाई नहीं दे रहा है, तो पहले उस त्रुटि को ठीक करवाना आवश्यक है।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) का मिलान कर लेने से बाद में रिफंड संबंधी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।
ITR फाइल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
TDS Refund पाने के लिए आयकर रिटर्न में अपनी पूरी आय का सही विवरण देना अनिवार्य है। कई बार लोग केवल सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज या अन्य आय स्रोतों को शामिल नहीं करते। इससे रिटर्न प्रोसेसिंग में समस्या आ सकती है।
रिटर्न भरते समय आय के सभी स्रोतों का उल्लेख करें और सुनिश्चित करें कि कटे हुए टैक्स की जानकारी Form 26AS से मेल खा रही हो। यदि टीडीएस अधिक जमा हुआ है तो आयकर पोर्टल स्वतः रिफंड राशि की गणना कर देता है।
इसके बाद रिटर्न जमा करने के साथ-साथ ई-वेरिफिकेशन करना भी बेहद जरूरी है। बिना ई-वेरिफिकेशन के TDS Refund की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।
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ई-वेरिफिकेशन के बाद कब आता है रिफंड?
आयकर विभाग द्वारा रिटर्न की प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद TDS Refund सीधे करदाता के बैंक खाते में भेज दिया जाता है। सामान्य परिस्थितियों में ई-वेरिफिकेशन के बाद रिफंड आने में लगभग 4 से 5 सप्ताह का समय लग सकता है।
हालांकि कुछ मामलों में दस्तावेजों की जांच या तकनीकी कारणों से यह अवधि बढ़ भी सकती है। यदि सभी जानकारियां सही हैं और कोई विसंगति नहीं है तो रिफंड अपेक्षाकृत जल्दी जारी हो सकता है।
ऑनलाइन ऐसे चेक करें TDS Refund का स्टेटस
आज के डिजिटल दौर में TDS Refund का स्टेटस जानना बेहद आसान हो गया है। इसके लिए करदाता को आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करना होगा।
इसके बाद ‘e-File’ सेक्शन में जाकर ‘Income Tax Returns’ और फिर ‘View Filed Returns’ विकल्प चुनना होगा। संबंधित असेसमेंट वर्ष का चयन करने पर रिटर्न की स्थिति दिखाई दे जाएगी।
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यहां ‘Refund Issued’, ‘Refund Failed’, ‘Processed’ या ‘Partially Adjusted’ जैसे स्टेटस दिखाई दे सकते हैं। इससे करदाता को अपने रिफंड की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल जाती है।
इन गलतियों से अटक सकता है आपका TDS Refund
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार छोटी-छोटी गलतियां TDS Refund मिलने में बड़ी बाधा बन जाती हैं। सबसे आम समस्या पैन और आधार लिंक न होना है। यदि दोनों दस्तावेज लिंक नहीं हैं तो रिफंड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा बैंक खाते का प्री-वैलिडेशन न होना, गलत IFSC कोड दर्ज करना, बंद बैंक खाता देना या बैंक रिकॉर्ड और पैन रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग अलग होना भी रिफंड फेल होने के प्रमुख कारण हैं। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक विवरणों की दोबारा जांच अवश्य करें।
वित्तीय जागरूकता से मिलेगा पूरा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि TDS Refund केवल अतिरिक्त टैक्स वापस पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह करदाताओं को अपने वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के लिए भी प्रेरित करता है।
यदि किसी व्यक्ति की आय टैक्स छूट सीमा से कम है और फिर भी उसके खाते से टैक्स कट गया है, तो उसे अवश्य रिटर्न दाखिल करना चाहिए। इससे उसका पैसा सुरक्षित रूप से वापस मिल सकता है।
आयकर विभाग की डिजिटल सेवाओं ने TDS Refund प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी सरल और पारदर्शी बना दिया है। इसलिए करदाताओं को समय पर ITR दाखिल करके अपने अधिकार का लाभ उठाना चाहिए और अतिरिक्त कटे टैक्स की राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त करनी चाहिए।
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