Crude Oil prices fall nearly 6 percent after easing of US-Iran tensions, with oil barrels and global market chart.
Crude Oil: वैश्विक ऊर्जा बाजार में लंबे समय बाद राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव में कमी आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार के कारोबार में कच्चे तेल के दाम करीब 6 प्रतिशत तक टूट गए, जिससे तेल आयात करने वाले देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बीते कुछ सप्ताह से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी और Crude Oil की कीमतें कई महीनों के उच्च स्तर तक पहुंच गई थीं। अब हालात में नरमी के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा लौटा है और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
US-Iran तनाव कम होते ही बदला बाजार का रुख
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। रेड सी और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इसी वजह से Crude Oil की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली थी और कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था।
हालांकि सप्ताहांत में दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई में कमी आने और अमेरिका द्वारा आगे के हमलों को रोकने के संकेत मिलने के बाद बाजार का माहौल बदल गया। निवेशकों को उम्मीद है कि अब विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए निकाला जा सकता है। इसी भरोसे ने Crude Oil बाजार में दबाव बनाया और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड दोनों में भारी गिरावट
सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में Crude Oil के दोनों प्रमुख बेंचमार्क लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 5.8 प्रतिशत टूटकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड भी करीब 5.5 प्रतिशत गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट केवल मुनाफावसूली का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे भू-राजनीतिक जोखिम में आई कमी सबसे बड़ी वजह है। यदि आने वाले दिनों में हालात और सामान्य रहते हैं तो Crude Oil की कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।
रेड सी और होर्मुज स्ट्रेट पर बनी हुई है नजर
हालांकि कीमतों में गिरावट के बावजूद बाजार पूरी तरह निश्चिंत नहीं हुआ है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर अब भी निगरानी बनी हुई है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तभी Crude Oil की आपूर्ति पहले जैसी हो पाएगी। फिलहाल कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं। कुछ जहाजों ने वैकल्पिक मार्ग भी अपनाए हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
कूटनीतिक समाधान की उम्मीद ने बढ़ाया भरोसा
अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि सैन्य कार्रवाई की बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश जारी रहेगी। इसी संभावना ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है।
ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच सकारात्मक वार्ता आगे बढ़ती है तो Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। हालांकि मध्य-पूर्व की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है, इसलिए निवेशक अभी भी हर घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है Crude Oil?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का अधिकांश Crude Oil विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने का सीधा असर आयात लागत पर पड़ सकता है।
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यदि लंबे समय तक Crude Oil की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इससे तेल कंपनियों का खर्च कम होगा। साथ ही सरकार पर भी ईंधन से जुड़ा वित्तीय दबाव घट सकता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जिनमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति शामिल है।
फिलहाल स्थिर हैं पेट्रोल और डीजल के दाम
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। पिछले संशोधन के बाद प्रमुख महानगरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर से ऊपर और डीजल 95 रुपये प्रति लीटर से अधिक के स्तर पर बिक रहा है। मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में भी पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई है।
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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Crude Oil की कीमतों में गिरावट लगातार बनी रहती है और वैश्विक आपूर्ति सामान्य होती है, तो आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
आगे क्या रहेगा बाजार का फोकस?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत, मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही और वैश्विक तेल मांग के आंकड़ों पर रहेगी। यदि तनाव दोबारा बढ़ता है तो Crude Oil की कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है। वहीं शांति प्रक्रिया मजबूत रहने पर तेल बाजार में स्थिरता और कीमतों में नरमी का दौर जारी रह सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताह Crude Oil बाजार की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे।
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