Piyush Goyal at BRICS Business Forum discussing UPI and BRICS Trade.(pc- PTI)
BRICS Trade: भारत ने BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS Business Forum 2026 में सदस्य और पार्टनर देशों से आपसी व्यापार को आसान बनाने, बाजारों को अधिक खुला रखने और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक साझेदारी के लिए केवल व्यापार बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भुगतान व्यवस्था और सप्लाई चेन को भी बेहतर बनाना जरूरी है।
गोयल ने कहा कि BRICS Trade को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों को एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजारों में ज्यादा अवसर पैदा करने चाहिए। इसमें कच्चे माल से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स तक की उपलब्धता और आपूर्ति शामिल है। भारत की ओर से पेश किए गए इन सुझावों को BRICS के भीतर व्यापारिक संबंधों को अधिक सुगम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
BRICS देशों के बीच बाजार खोलने पर जोर
BRICS Business Forum 2026 में पीयूष गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार भरोसेमंद और संतुलित होना चाहिए। उनके मुताबिक ऐसी सप्लाई चेन तैयार करने की जरूरत है जो दोनों दिशाओं में काम करे और किसी देश की आर्थिक प्रगति में बाधा न बने।
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उन्होंने BRICS देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजारों को अधिक खुला बनाने की अपील की। साथ ही नियमों को सरल करने और कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया। गोयल का कहना था कि व्यापार को बढ़ाने के लिए कंपनियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और देरी से राहत मिलनी चाहिए।
टैरिफ नहीं, गैर-टैरिफ बाधाएं भी बड़ी चुनौती
पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में केवल टैरिफ यानी आयात शुल्क को ही बाधा नहीं माना जा सकता। कई बार अलग-अलग देशों के जटिल नियम, प्रमाणन, मंजूरी और अन्य प्रक्रियाएं कारोबार की लागत बढ़ा देती हैं।
BRICS Trade को मजबूत करने के लिए इन गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की जरूरत है। यदि नियमों को आसान और पारदर्शी बनाया जाता है तो कंपनियों के लिए BRICS के दूसरे बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचाना आसान होगा। इससे व्यापार की गति बढ़ाने के साथ कारोबार की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।
UPI और लोकल करेंसी से पेमेंट आसान करने की तैयारी
भारत ने BRICS देशों के बीच डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा है। गोयल ने भारत के UPI मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों को अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई। इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को अधिक आसान बनाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पारंपरिक भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करना है।
गोयल ने बताया कि भारत का UPI फिलहाल 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में UPI पर हर साल 250 अरब से अधिक लेनदेन होते हैं। भारत के अनुभव का इस्तेमाल BRICS देशों के बीच डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी को बढ़ाने में किया जा सकता है।
प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान करने की मांग
भारत ने केवल वस्तुओं के व्यापार पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। गोयल ने BRICS देशों के बीच प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाने की जरूरत बताई।
उनके अनुसार अलग-अलग देशों में डिग्री और पेशेवर योग्यताओं की मान्यता की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। इससे डॉक्टर, इंजीनियर, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और दूसरे प्रोफेशनल्स के लिए BRICS देशों में सेवाएं देना आसान हो सकता है। सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से BRICS Trade का दायरा केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज्ञान, तकनीक और पेशेवर सेवाओं तक भी विस्तार होगा।
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ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में भारत की नजर
पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों के लिए बड़ी संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल्स को ऐसे प्रमुख क्षेत्र बताया जहां भारत निर्यात बढ़ा सकता है।
इसके अलावा कृषि, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में भी BRICS देशों के बीच सहयोग की संभावना है। नई तकनीक और इनोवेशन के जरिए इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्टार्टअप और एग्री-टेक में सहयोग बढ़ाने का सुझाव
भारत ने BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने का सुझाव भी दिया। गोयल के मुताबिक, अलग-अलग देशों के स्टार्टअप एक-दूसरे के साथ साझेदारी करके नई तकनीक और कारोबारी समाधान विकसित कर सकते हैं।
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खासकर एग्री-टेक के क्षेत्र में सहयोग से किसानों के लिए नई तकनीक, बेहतर उत्पादन और बाजार से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। खाद्य सुरक्षा को भी BRICS सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाया जा सकता है।
भारत की BRICS अध्यक्षता में आर्थिक एजेंडा पर जोर
भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे में व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। गोयल ने कहा कि BRICS देश वैश्विक व्यापार, आबादी और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे समूह के भीतर व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत के प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य BRICS Trade को अधिक सुगम, डिजिटल और भरोसेमंद बनाना है। बाजारों को खोलने, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने जैसे कदम आने वाले समय में BRICS देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं।
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