PM Narendra Modi and Vladimir Putin discuss India Russia Trade and economic cooperation
India Russia Trade: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक में भारत और रूस के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों का लक्ष्य India Russia Trade को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत रहे हैं, लेकिन अब दोनों देश आर्थिक साझेदारी का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। रेलवे, स्टील, परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, उर्वरक और कुशल भारतीय कामगारों से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हुई।
2030 तक 100 अरब डॉलर का कारोबार
वर्तमान में भारत और रूस के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर के आसपास है। इस व्यापार में रूस से भारत को होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है। अब दोनों देश अगले कुछ वर्षों में व्यापार में करीब 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
India Russia Trade को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए दोनों देशों को व्यापार के नए क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारोबार में लगातार दोहरे अंकों की वृद्धि की जरूरत बताई थी। इसके लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने, भारतीय उत्पादों का रूस में विस्तार करने और नए बिजनेस अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा सकता है।
रेलवे और स्टील सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग
भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में रेलवे और स्टील जैसे क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकते हैं। नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार और साझेदारी के नए अवसर तलाशने का मंच माना जा रहा है।
रेलवे परियोजनाओं, टनल निर्माण और स्टील की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे कारोबारी संबंध मजबूत हो सकते हैं। भारत की कंपनियों के लिए रूस के बाजार में अपने उत्पाद पहुंचाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
परमाणु ऊर्जा में लंबी साझेदारी पर जोर
भारत और रूस पहले से ही परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। अब इस साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इसमें परमाणु ईंधन की उपलब्धता से लेकर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के संचालन और तकनीकी सहयोग तक कई पहलू शामिल हैं।
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India Russia Trade का विस्तार केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देश ऊर्जा और तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय की साझेदारी विकसित करने पर भी ध्यान दे रहे हैं।
रूस में बढ़ सकते हैं भारतीय स्किल्ड वर्कर्स
बैठक में कुशल भारतीय कामगारों के रूस जाने से जुड़ा मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। दोनों देश ऐसा तंत्र विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं, जिससे भारतीय स्किल्ड वर्कर्स के लिए रूस में रोजगार के अवसर बढ़ें।
इससे एक तरफ रूस की श्रम जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय तकनीकी और पेशेवर लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच लोगों और विशेषज्ञों की आवाजाही बढ़ने से आर्थिक संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है।
क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन पर फोकस
आज के दौर में क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं। ऐसे में इन खनिजों की सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई भारत की रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। भारत और रूस इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। इससे भविष्य की तकनीकी और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
खाद की सप्लाई भी रहेगी अहम
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए उर्वरकों की नियमित उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। रूस भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच खाद की सप्लाई को स्थिर बनाए रखना आर्थिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रणनीतिक ज्वाइंट वेंचर और दीर्घकालिक परियोजनाओं के जरिए इस क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाएं हैं। इससे भारत की कृषि जरूरतों के लिए सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
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डिजिटल करेंसी और नए भुगतान तंत्र पर भी नजर
भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार के लिए भुगतान व्यवस्था को आसान बनाना भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के इस्तेमाल से दोनों देशों के कारोबारियों के लिए लेनदेन को सरल बनाने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। आने वाले समय में India Russia Trade का स्वरूप पारंपरिक ऊर्जा और रक्षा कारोबार से आगे बढ़कर डिजिटल पेमेंट, तकनीक, औद्योगिक उत्पादन और सप्लाई चेन तक फैल सकता है।
रक्षा से आगे बढ़ रही भारत-रूस साझेदारी
भारत और रूस की दोस्ती को लंबे समय से रक्षा सहयोग के लिए जाना जाता है, लेकिन अब दोनों देशों के रिश्तों का आर्थिक पक्ष भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। रेलवे, न्यूक्लियर एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, उर्वरक, तकनीक और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिल सकती है।
2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य आसान नहीं है, लेकिन अगर दोनों देश बाजार पहुंच, निवेश, भुगतान व्यवस्था और नए औद्योगिक क्षेत्रों में ठोस कदम उठाते हैं, तो India Russia Trade को अगले कुछ वर्षों में एक नई ऊंचाई मिल सकती है।
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