FMCG stocks under pressure as foreign investors withdraw $5.25 billion from Indian consumer companies
12 अगस्त 2026 |नई दिल्ली: रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बनाने वाली FMCG कंपनियों को आमतौर पर शेयर बाजार में अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है। साबुन, टूथपेस्ट, बिस्कुट, चाय, पैकेज्ड फूड और घरेलू इस्तेमाल के दूसरे उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से FMCG Stocks पर विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर दिखाई दे रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार इस सेक्टर से पैसा निकाल रहे हैं और पिछले 12 महीनों में करीब 5.25 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं।
इस बिकवाली ने निवेशकों के बीच सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या FMCG सेक्टर की तेज ग्रोथ का दौर कमजोर पड़ रहा है या फिर मौजूदा गिरावट भविष्य में निवेश का अवसर बन सकती है।
FMCG Stocks से लगातार बाहर जा रहा विदेशी पैसा
विदेशी निवेशकों की बिकवाली केवल FMCG सेक्टर तक सीमित नहीं है। सितंबर 2024 में भारतीय शेयर बाजार के पिछले बड़े शिखर के बाद से विदेशी निवेशकों ने कुल मिलाकर करीब 57 अरब डॉलर बाजार से निकाले हैं। इनमें लगभग 27 अरब डॉलर की निकासी 2026 में हुई है।
हालांकि जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया। यह पिछले 13 महीनों में उनका सबसे बड़ा मासिक निवेश बताया जा रहा है। इसके बावजूद FMCG Stocks में उनकी बिकवाली जारी रही। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की FMCG को लेकर चिंता व्यापक बाजार की तुलना में अलग है।
2026 में FMCG सेक्टर से निकले ₹28,276 करोड़
NSDL के आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अब तक हर महीने FMCG सेक्टर से विदेशी पूंजी बाहर गई है। जुलाई में ही विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर से करीब 1,103 करोड़ रुपये निकाले। पूरे 2026 में अब तक निकासी का आंकड़ा करीब 28,276 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
पिछले 12 महीनों को देखें तो विदेशी निवेशकों ने FMCG कंपनियों के शेयरों से लगभग 5.25 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली का असर कई प्रमुख कंपनियों के शेयर भाव पर भी नजर आया है।
HUL, ITC और Dabur के शेयरों में गिरावट
प्रमुख FMCG Stocks के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक साल में हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी HUL के शेयर करीब 18 फीसदी नीचे आए हैं। ITC के शेयरों में लगभग 34 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई, जबकि Dabur के शेयर करीब 20 फीसदी तक कमजोर हुए।
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Tata Consumer के शेयरों में भी इस अवधि में लगभग 9 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। हालांकि पूरा FMCG सेक्टर एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर रहा है। Nestle India के शेयरों में करीब 35 फीसदी की तेजी रही, जबकि Britannia Industries ने लगभग 4 फीसदी की बढ़त दर्ज की।
आखिर FMCG Stocks से क्यों दूरी बना रहे FII?
विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण कंपनियों की धीमी होती ग्रोथ और ऊंचा वैल्यूएशन है। FMCG कंपनियों की बिक्री और कमाई की रफ्तार अब पहले जैसी नहीं रही है। कई कंपनियों की ग्रोथ सिंगल डिजिट में सिमट गई है।
जब किसी कंपनी की कमाई धीमी होती है और उसके शेयर पहले से ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे होते हैं, तो निवेशकों के लिए संभावित रिटर्न आकर्षक नहीं रह जाता। यही वजह है कि FII अपना पैसा दूसरे सेक्टरों की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
महंगा कच्चा माल भी बढ़ा रहा परेशानी
FMCG Stocks पर दबाव का एक और कारण कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी है। कच्चा तेल, पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
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कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे बढ़ी हुई लागत का बोझ पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल सकतीं। कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी होने पर ग्राहक सस्ते विकल्पों की तरफ जा सकते हैं और बिक्री की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीण मांग और Quick Commerce की चुनौती
FMCG कंपनियों के लिए ग्रामीण बाजार बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग की रफ्तार कमजोर रहने पर कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ पर असर पड़ता है। दूसरी तरफ शहरी ग्राहक भी कीमतों को लेकर ज्यादा संवेदनशील हो रहे हैं और कम कीमत वाले विकल्प तलाश रहे हैं।
इसके अलावा Quick Commerce कंपनियों की बढ़ती पहुंच ने पारंपरिक FMCG कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक तेजी से खरीदारी कर रहे हैं। इससे पारंपरिक वितरण व्यवस्था और बाजार हिस्सेदारी पर दबाव बढ़ सकता है।
FY27 में कमाई कितनी बढ़ सकती है?
वित्त वर्ष 2027 के लिए FMCG कंपनियों की कमाई को लेकर बाजार में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है। पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि कंपनियों को पहले से मौजूद कम कीमत वाले कच्चे माल का फायदा मिला है।
अगर कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। Crisil के अनुमान के मुताबिक संगठित FMCG कंपनियों की कमाई इस साल करीब 8-10 फीसदी बढ़ सकती है, जबकि वॉल्यूम ग्रोथ केवल 2-3 फीसदी रहने की संभावना है।
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विदेशी निवेशक कब लौट सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि FMCG Stocks में विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण होंगी। पहली, ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार होना चाहिए। दूसरी, कच्चे माल और कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता जरूरी है। तीसरी, शेयरों का मूल्यांकन ऐसा होना चाहिए जिससे भविष्य की कमाई के मुकाबले निवेशकों को बेहतर रिटर्न की संभावना दिखाई दे।
फिलहाल निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि FMCG कंपनियों की मजबूत ब्रांड वैल्यू और स्थिर मांग के बावजूद क्या मौजूदा कमाई की रफ्तार उनके ऊंचे मूल्यांकन को सही ठहरा सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
FMCG Stocks की मौजूदा स्थिति को केवल विदेशी बिकवाली के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। कंपनियों की बिक्री, मार्जिन, ग्रामीण मांग, कच्चे माल की लागत और वैल्यूएशन जैसे कई संकेतकों पर नजर रखना जरूरी है।
इसलिए FMCG सेक्टर में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन को कितना संभाल पाती हैं और उपभोक्ता मांग कितनी तेजी से वापस आती है। अगर बिक्री में मजबूत सुधार और लागत में स्थिरता आती है, तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ सकती है। फिलहाल हालांकि FMCG Stocks पर दबाव बना हुआ है और बाजार की नजर आने वाली तिमाहियों के नतीजों पर टिकी है।
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