CCPA Action on Amazon Flipkart over Cyclosinone Herbicide listing and consumer safety
CCPA Action on Amazon Flipkart: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स की निगरानी को लेकर केंद्रीय संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने बड़ा कदम उठाया है। CCPA Action on Amazon Flipkart के तहत Amazon और Flipkart पर 10-10 लाख रुपये तथा JioMart पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई ‘Cyclosinone Herbicide’ नाम के एक कथित तौर पर बिना पंजीकरण वाले एग्रो-केमिकल प्रोडक्ट की बिक्री और उसके विज्ञापन से जुड़ी है।
रेगुलेटर के मुताबिक, इन ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर इस प्रोडक्ट की लिस्टिंग और प्रचार किया जा रहा था, जबकि इसके रेगुलेटरी स्टेटस की पर्याप्त स्वतंत्र जांच नहीं की गई थी। CCPA ने कंपनियों को संबंधित प्रोडक्ट की बिक्री और विज्ञापन रोकने के साथ-साथ अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी अन्य लिस्टिंग की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं।
Amazon, Flipkart और JioMart पर क्यों हुई कार्रवाई?
CCPA Action on Amazon Flipkart का मुख्य कारण ऐसा प्रोडक्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना है, जिसकी वैधानिक स्थिति को लेकर नियामक सवाल उठे। CCPA के अनुसार, ‘Cyclosinone Herbicide’ को बेचने और उसका प्रचार करने के दौरान उसके एक्टिव इंग्रीडिएंट के केमिकल नाम और कंपोजिशन की पर्याप्त जानकारी सामने नहीं रखी गई थी। रेगुलेटर ने यह भी पाया कि मार्केटप्लेस ने प्रोडक्ट को अपनी वेबसाइट पर लाइव करने से पहले उसके रेगुलेटरी स्टेटस की पर्याप्त स्वतंत्र जांच नहीं की। इसी आधार पर उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की गई। 22 सितंबर को जारी अलग आदेश में CCPA ने तीनों कंपनियों को इस प्रोडक्ट की बिक्री और विज्ञापन तत्काल बंद करने का निर्देश दिया।
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10-10 लाख और 5 लाख रुपये का जुर्माना
CCPA के आदेश के मुताबिक Amazon और Flipkart पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं JioMart पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। यह कार्रवाई सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं है। नियामक ने तीनों ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसी लिस्टिंग की पहचान करने और सेल्फ-ऑडिट करने को भी कहा है, जो मौजूदा कानूनों का उल्लंघन कर सकती हैं या उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। कंपनियों को आदेश के 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट यानी Compliance Report जमा करने के लिए भी कहा गया है।
कृषि मंत्रालय की शिकायत से शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिली शिकायत के बाद हुई। यह शिकायत मूल रूप से Crop Care Federation of India यानी CCFI की ओर से की गई थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और कृषि मंत्रालय ने CCPA को संबंधित प्रोडक्ट की रेगुलेटरी स्थिति के बारे में जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, Insecticides Act, 1968 की संबंधित अनुसूची में ‘Cyclosinone’ नाम का कोई केमिकल सूचीबद्ध नहीं था। इसी जानकारी के आधार पर प्रोडक्ट की वैधानिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए। CCPA ने अपने आदेश में इस बात पर ध्यान दिया कि कृषि रसायनों से जुड़े उत्पादों की बिक्री में सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता से संबंधित निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण है।
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Amazon के मामले में कितने ऑर्डर सामने आए?
Amazon के खिलाफ जारी आदेश में CCPA ने बड़ी संख्या में हुए लेनदेन का उल्लेख किया। आदेश के अनुसार, इस प्रोडक्ट के 38,410 ऑर्डर किए गए थे। इन ऑर्डर्स में कुल 43,634 यूनिट शामिल थीं और इनकी कुल बिक्री वैल्यू लगभग 96.42 लाख रुपये बताई गई। रेगुलेटर ने इन आंकड़ों का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि प्रोडक्ट की ऑनलाइन उपलब्धता का उपभोक्ताओं तक कितना व्यापक पहुंच प्रभाव हो सकता था। Amazon की ओर से यह तर्क दिया गया था कि संबंधित नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी अलग-अलग सेलर्स की थी। हालांकि, CCPA ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
सेलर के साथ कॉन्ट्रैक्ट से खत्म नहीं होती कंपनी की जिम्मेदारी
CCPA Action on Amazon Flipkart में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक मार्केटप्लेस और सेलर की जिम्मेदारी से जुड़ा है। CCPA ने कहा कि किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और उसके विक्रेता के बीच हुआ निजी अनुबंध उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े वैधानिक दायित्वों से ऊपर नहीं हो सकता। रेगुलेटर के मुताबिक, यदि मार्केटप्लेस सेलर्स से नियमों का पालन करने का लिखित वचन लेता है, तो इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्लेटफॉर्म को अपनी ऑनबोर्डिंग और मॉनिटरिंग प्रक्रिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था रखनी चाहिए। सिर्फ सेलर की ओर से दी गई जानकारी पर निर्भर रहना हर परिस्थिति में पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
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सेल्फ-डिक्लेरेशन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते प्लेटफॉर्म
CCPA ने यह भी कहा कि सेलर्स द्वारा दी गई जानकारी गलत, अधूरी या भ्रामक हो सकती है। इसलिए ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी केवल सेलर के सेल्फ-डिक्लेरेशन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। रेगुलेटर ने सेलर ऑनबोर्डिंग, प्रोडक्ट वेरिफिकेशन और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में संभावित कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। इसका मतलब है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपने सिस्टम में ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोडक्ट्स की पहचान समय रहते की जा सके।
CCPA ने अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर क्या कहा?
CCPA ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि वह संबंधित एग्रो-केमिकल के निर्माण, वैज्ञानिक संरचना या तकनीकी गुणों पर फैसला नहीं दे रहा है। ऐसे मामलों पर संबंधित विशेषज्ञ और नियामक संस्थाओं का अधिकार क्षेत्र लागू होता है। CCPA की कार्रवाई का दायरा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के व्यवहार तक सीमित है। इसमें उपभोक्ता अधिकारों का संभावित उल्लंघन, भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापारिक व्यवहार जैसे पहलू शामिल हैं।
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ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए क्या संदेश?
CCPA Action on Amazon Flipkart से ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए प्रोडक्ट लिस्टिंग की निगरानी और सेलर वेरिफिकेशन की अहमियत सामने आती है। कंपनियों को केवल सेलर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद उत्पादों की जोखिम आधारित समीक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था मजबूत करनी पड़ सकती है।
इस मामले में Amazon, Flipkart और JioMart को संबंधित प्रोडक्ट की बिक्री रोकने, संभावित नियम उल्लंघन वाली लिस्टिंग की समीक्षा करने और तय समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। आगे इस कार्रवाई का असर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की प्रोडक्ट मॉडरेशन और सेलर ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं पर भी देखने को मिल सकता है।
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