Share Market Today: Sensex and Nifty performance amid market volatility.(pc- ai)
मुंबई|13अगस्त, 2026: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में दबाव के बाद बाजार ने कुछ हद तक वापसी की, लेकिन चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के कारण निफ्टी बढ़त बनाए रखने में कामयाब नहीं रहा। कारोबारी सत्र के अंत में Share Market का रुख मिला-जुला रहा। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,395.85 अंक पर बंद हुआ।
बाजार में मेटल, फार्मा और सरकारी बैंकों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। दूसरी ओर एफएमसीजी, आईटी और मीडिया सेक्टर के शेयरों में खरीदारी ने सेंसेक्स को संभालने में मदद की। निवेशकों ने महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की तेजी पर अंकुश लगाया।
Read: रूस ने भारत से क्यों मंगाया पेट्रोल? यूक्रेन के हमलों से बिगड़ा तेल बाजार का पूरा समीकरण
महंगाई के आंकड़ों से निवेशकों को राहत
गुरुवार के कारोबार में भारत और अमेरिका से आए मुद्रास्फीति संबंधी आंकड़ों ने निवेशकों की धारणा को कुछ मजबूती दी। उम्मीद से बेहतर महंगाई के आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकते हैं।
ब्याज दरों को लेकर नरमी की उम्मीद आमतौर पर शेयर बाजार के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे कंपनियों की उधारी लागत कम होने और निवेश तथा खपत को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है। इसी उम्मीद ने कारोबार के दौरान बाजार को निचले स्तरों से संभलने में मदद की।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, महंगाई के मोर्चे पर राहत ने निवेशकों के भरोसे को समर्थन दिया। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों ने भी भारतीय बाजार की घरेलू मांग और कंपनियों की मजबूती का संकेत दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
हालांकि, वैश्विक स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद Share Market के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
READ: विदेशी निवेशकों ने 12 महीने में निकाले $5.25 अरब, HUL-ITC समेत बड़े शेयरों पर दबाव क्यों?
कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल मामूली गिरावट के बावजूद 87.47 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ था। तेल की ऊंची कीमतों से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर बनाए रखी।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। वैश्विक स्तर पर किसी भी बड़े तनाव की स्थिति में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
रुपया भी कमजोर होकर बंद
विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये पर दबाव दिखाई दिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 10 पैसे कमजोर होकर 95.43 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
रुपये की कमजोरी का असर आयात करने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है। वहीं, आईटी जैसी निर्यात आधारित कंपनियों के लिए कमजोर रुपया कुछ हद तक सकारात्मक हो सकता है। निवेशक आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजारों के रुख को ध्यान से देख सकते हैं।
मेटल और फार्मा शेयरों में बिकवाली
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इसमें 1.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी फार्मा 0.42 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.58 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।
मेटल शेयरों में गिरावट का असर व्यापक बाजार की धारणा पर भी पड़ा। वहीं, सरकारी बैंकों में मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके विपरीत निफ्टी एफएमसीजी, आईटी और मीडिया इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। इस तरह अलग-अलग सेक्टरों में अलग-अलग रुझान रहने से बाजार में स्पष्ट दिशा नहीं बन सकी और कारोबार काफी अस्थिर रहा।
टाटा ग्रुप के शेयरों में मिला-जुला कारोबार
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद नहीं संभालने के फैसले की खबरों के बीच टाटा ग्रुप के शेयरों में मिला-जुला कारोबार हुआ।
टीसीएस का शेयर 0.35 प्रतिशत बढ़कर 2,358 रुपये पर बंद हुआ। टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल्स कारोबार से जुड़ा शेयर 1.52 प्रतिशत बढ़कर 348 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, टाइटन के शेयर में 1.18 प्रतिशत की गिरावट आई और यह करीब 5,036 रुपये पर बंद हुआ।
ALSO READ: BOLLYWOOD NEWS |COMMONWEALTH GAME 2026 | SPORT NEWS | CRIME NEWS
टाटा समूह से जुड़ी कॉरपोरेट खबरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में नेतृत्व और रणनीतिक बदलावों से संबंधित खबरों का असर कुछ शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
एशियाई बाजारों में तेजी
भारतीय बाजार के मुकाबले ज्यादातर प्रमुख एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.28 प्रतिशत बढ़ा। ताइवान के बाजार में करीब 1 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.44 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ।
हालांकि, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कारोबारी सत्रों में Share Market की दिशा कई वैश्विक और घरेलू संकेतकों से तय होगी। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा, रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs के निवेश पर बाजार की नजर रहेगी।
इसके अलावा घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे भी शेयरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों के सामने एक तरफ महंगाई में राहत और कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन जैसे सकारात्मक संकेत हैं, तो दूसरी तरफ महंगा कच्चा तेल और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
ऐसे में बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रम के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
UTTAR PRADESH |UTTARAKHAND UPDATE |CM YOGI BREAKING |EXPLAINER TV TODAY BHARAT|WEB STORY |NATIONAL NEWS TODAY | Business Bharat
