Aja Ekadashi 2026 puja vidhi, fasting rules and important precautions
Aja Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को Aja Ekadashi 2026 के नाम से जाना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं।
हालांकि, एकादशी व्रत में केवल उपवास रखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। पूजा-पाठ के साथ खान-पान और व्यवहार से जुड़े कुछ नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई बार लोग जानकारी के अभाव में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। आइए जानते हैं Aja Ekadashi 2026 की तिथि, पूजा विधि, जरूरी सावधानियां और पारण से जुड़े नियम।
Aja Ekadashi 2026 कब मनाई जाएगी?
पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी। एकादशी तिथि का समापन 7 सितंबर 2026 की शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा। चूंकि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार Aja Ekadashi 2026 का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए तिथि के साथ पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए द्वादशी पारण समय की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
सुबह स्नान के बाद लें व्रत का संकल्प
Aja Ekadashi 2026 के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। इसके बाद घर और विशेष रूप से पूजा स्थान की सफाई करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके दीपक जलाएं।
पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता में तुलसी को भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है। पूजा के दौरान विष्णु मंत्र का जाप करने के बाद भगवान की आरती करें।
पूजा में तुलसी दल को न करें नजरअंदाज
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए Aja Ekadashi 2026 की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। हालांकि, तुलसी दल तोड़ने से जुड़े स्थानीय धार्मिक नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री को लेकर अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा और मान्यताओं के अनुसार पूजा करना उचित रहता है।
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एकादशी पर चावल खाने से क्यों बचते हैं?
एकादशी व्रत से जुड़े धार्मिक नियमों में चावल का सेवन न करने की परंपरा प्रचलित है। इसलिए व्रत रखने वाले लोग इस दिन चावल और चावल से बनी चीजों से परहेज करते हैं। व्रत के दौरान फल, दूध और अन्य सात्विक व्रताहार का सेवन अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।

मांसाहार और तामसिक भोजन से रहें दूर
Aja Ekadashi 2026 के दिन सात्विक आहार और संयमित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान मांसाहार और शराब जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी रखनी चाहिए। प्याज और लहसुन को लेकर भी कई व्रत परंपराओं में परहेज किया जाता है।
एकादशी का उद्देश्य केवल भोजन से संयम रखना नहीं, बल्कि मन और विचारों को भी शांत रखना माना जाता है। इसलिए इस दिन सकारात्मक विचारों के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करना शुभ माना जाता है।
गुस्सा, विवाद और अपशब्दों से बचें
व्रत के दौरान व्यक्ति के व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी से अनावश्यक विवाद करना, झूठ बोलना, अपशब्द कहना या किसी का अपमान करना धार्मिक रूप से उचित नहीं माना जाता। इसलिए Aja Ekadashi 2026 के दिन मन को शांत रखने और दूसरों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करने का प्रयास करें। भक्त इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ या धार्मिक ग्रंथों का श्रवण कर सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा और भक्ति करना इस दिन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अजा एकादशी पर दान करना माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना पुण्यदायी माना जाता है। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, फल, कपड़े या जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं। भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का स्मरण भी इस दिन किया जाता है। दान करते समय दिखावे से बचने और जरूरतमंद व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखने की परंपरा को अधिक महत्व दिया जाता है।
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द्वादशी को किया जाता है व्रत का पारण
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में पारण के साथ किया जाता है। इसलिए Aja Ekadashi 2026 का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अगले दिन यानी द्वादशी को पंचांग में निर्धारित पारण समय का ध्यान रखना चाहिए। समय से पहले या बहुत देर से पारण करने के बजाय स्थानीय पंचांग में दिए गए समय के अनुसार व्रत खोलना बेहतर माना जाता है।
पारण के समय भगवान विष्णु का स्मरण करके सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या लंबे समय तक उपवास रखना कठिन है, उन्हें अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए व्रत की विधि तय करनी चाहिए।
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