GST 2.0 boosts vehicle sales and demand in India’s auto sector
GST 2.0: GST में बदलाव का असर अब भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में साफ दिखाई देने लगा है। पिछले साल लागू हुए GST 2.0 के बाद वाहनों की कीमतों में आई राहत ने मांग को बढ़ावा दिया है। उद्योग जगत के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 11 महीनों में देश में ऑटो रिटेल बिक्री करीब 20 फीसदी बढ़कर 3 करोड़ वाहनों के पार पहुंच गई।
इस तेजी को सिर्फ त्योहारी मांग से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। ऑटो कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कम टैक्स और बेहतर अफोर्डेबिलिटी ने उन ग्राहकों को भी दोबारा बाजार में लाया है, जो लंबे समय से वाहन खरीदने का फैसला टाल रहे थे। खासतौर पर पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की वापसी ने एंट्री-लेवल सेगमेंट को मजबूती दी है।
GST 2.0 के बाद कैसे बदली ऑटो मार्केट की तस्वीर?
GST 2.0 के तहत कई वाहन श्रेणियों पर टैक्स में बदलाव किया गया। छोटी कारों और कुछ दोपहिया वाहनों सहित कई सेगमेंट में प्रभावी टैक्स बोझ कम हुआ। इसका सीधा असर वाहनों की खरीद लागत पर पड़ा। कंपनियों ने टैक्स राहत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया, जिससे शोरूम पर आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ी।
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FADA के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ऑटो रिटेल बिक्री 3 करोड़ से अधिक रही। सालाना आधार पर इसमें करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसके मुकाबले GST 2.0 से पहले समान अवधि में वृद्धि 5 फीसदी से भी कम थी।
Maruti Suzuki की एंट्री-लेवल कारों की बिक्री में 96% से ज्यादा उछाल
GST 2.0 का असर Maruti Suzuki के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच Maruti Suzuki की पैसेंजर व्हीकल बिक्री में सालाना आधार पर करीब 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
सबसे बड़ा बदलाव एंट्री-लेवल सेगमेंट में देखने को मिला। इस श्रेणी की बिक्री 96 फीसदी से ज्यादा बढ़ी। कंपनी के मुताबिक, बेहतर अफोर्डेबिलिटी ने छोटे वाहनों की मांग को फिर से मजबूत किया है। ताकेउची ने मजबूत मांग को देखते हुए कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान को तेज करने की बात कही है। उनका कहना है कि घरेलू बाजार में उत्पादन और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से आगे चलकर निवेश और निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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Hyundai में हर महीने 4 लाख यूनिट का स्तर बना नया नॉर्मल
Hyundai Motor India ने भी GST 2.0 के बाद मांग में मजबूती की बात कही है। कंपनी के MD और CEO तरुण गर्ग के अनुसार, अब हर महीने 4 लाख से अधिक पैसेंजर व्हीकल की थोक बिक्री का स्तर नया नॉर्मल बनता जा रहा है।
गर्ग के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री की बिक्री में सालाना 15 फीसदी से अधिक की वृद्धि रही। इसके बाद अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान यह वृद्धि 29 फीसदी से ज्यादा रही। इससे संकेत मिलता है कि GST 2.0 का असर शुरुआती त्योहारी मांग तक सीमित नहीं रहा। कम कीमत और बेहतर उपभोक्ता भरोसे ने अगले महीनों में भी बाजार को सहारा दिया।
ग्रामीण बाजार में भी बढ़ी गाड़ियों की मांग
ऑटो सेक्टर की रिकवरी का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। FADA के अनुसार, ग्रामीण बाजारों में मांग मजबूत हुई है और कई मामलों में यह शहरी बाजार की तुलना में आगे निकल रही है। दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 2018 के स्तर तक पहुंचने की बात कही गई है।
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ऑटो बाजार में पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों की वापसी को भी अहम संकेत माना जा रहा है। कम कीमत ने उन ग्राहकों के लिए खरीदारी को आसान बनाया है, जो महंगाई और बढ़ती वाहन कीमतों के कारण लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
Alternative Fuel वाहनों की मांग में भी बदलाव
ऑटो बाजार में सिर्फ पेट्रोल और डीजल वाहनों की मांग ही नहीं बढ़ी है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों में Alternative Fuel वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी भी सामने आई है। FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में पहली बार Alternative Fuel वाहनों ने पेट्रोल मॉडल को पीछे छोड़ा है। यह बदलाव भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद की ओर भी संकेत करता है।
SUV की बिक्री 17% बढ़ी, ट्रैक्टर और LCV भी आगे
GST 2.0 का फायदा SUV और कमर्शियल वाहन सेगमेंट में भी देखने को मिला। Mahindra Group के ग्रुप CEO और MD अनीश शाह के अनुसार, GST में बदलाव के बाद SUV की बिक्री में 17 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं Light Commercial Vehicles और ट्रैक्टरों की बिक्री करीब 20 फीसदी बढ़ी।
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महिंद्रा के मुताबिक, बेहतर वाहन मांग का असर कंपनी के फाइनेंस कारोबार पर भी पड़ा है। वाहन खरीद के लिए लोन डिस्ट्रीब्यूशन में वृद्धि देखने को मिली। मजबूत ग्राहक कैश फ्लो से लोन रिपेमेंट की स्थिति में भी सुधार की बात कही गई है।
कंपनियां बढ़ा रही हैं निवेश
ऑटो सेक्टर में मांग बढ़ने के साथ कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी भी कर रही हैं। Maruti Suzuki ने कैपिटल एक्सपेंडिचर तेज करने की बात कही है। Mahindra ने भी बढ़ती मांग को देखते हुए अलग-अलग कारोबार में क्षमता विस्तार के लिए अतिरिक्त निवेश का संकेत दिया है।
ऑटो कंपनियों का मानना है कि अगर मांग इसी तरह बनी रहती है तो इसका असर सिर्फ वाहन बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन, रोजगार, ऑटो कंपोनेंट, फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
आगे की राह में चुनौतियां भी मौजूद
हालांकि ऑटो सेक्टर में मांग मजबूत हुई है, लेकिन कंपनियों के सामने कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। वैश्विक कमोडिटी कीमतों, कच्चे माल और करेंसी में उतार-चढ़ाव से लागत पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में वाहन कंपनियों के लिए बढ़ती मांग के साथ लागत को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
GST 2.0 के बाद भारतीय ऑटो बाजार में मांग का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। 3 करोड़ से ज्यादा वाहनों की रिटेल बिक्री, छोटे वाहनों की बढ़ती मांग और ग्रामीण बाजार की मजबूत भागीदारी इस बदलाव के प्रमुख संकेत हैं। आने वाले महीनों में बिक्री की रफ्तार और कंपनियों के निवेश से यह पता चलेगा कि यह तेजी कितनी स्थायी रहती है।
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1 ने “GST 2.0 का असर…11 महीने में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बिकीं, ऑटो सेक्टर में लौटी रफ्तार” पर विचार किया;