RBI Polymer Notes :Illustrative graphic of India's proposed Rs 10 and Rs 20 polymer banknote field trials । PHOTO: AI
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर 2026: RBI Polymer Notes की प्रस्तावित योजना में सामग्री आपूर्ति को लेकर कंपनियों की भागीदारी सामने आई है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, UFlex और अमेरिकी Spectra Systems ने संयुक्त बोली जमा की है। यह प्रक्रिया 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोट, उनके फील्ड ट्रायल और छपाई की तैयारी से जुड़ी है, जिसकी खरीद पहल BRBNMPL ने शुरू की थी।
हाइलाइट्स
- 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की योजना पर काम चल रहा है।
- BRBNMPL ने बैंकनोट की छपाई के लिए सुरक्षा फीचर वाली पॉलिमर शीटों के प्रस्ताव मांगे थे।
- पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, UFlex और अमेरिकी Spectra Systems ने संयुक्त बोली जमा की है।
- प्रस्तावित सामग्री की जरूरत 68,000 रीम है, जिसमें दोनों मूल्यवर्ग के लिए बराबर मात्रा शामिल है।
- ट्रायल की तैयारी का अर्थ मौजूदा कागज के नोट बंद होना नहीं है।
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वहीं, RBI Polymer Notes को लेकर उपलब्ध जानकारी में प्रस्ताव जमा करने और आपूर्ति का ठेका मिलने के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। UFlex, Spectra Systems और पॉलिमर नोट से जुड़ी बोली की खबर सूत्रों के हवाले से सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट में इन कंपनियों को अंतिम आपूर्तिकर्ता चुने जाने की पुष्टि नहीं है। इसलिए इसे चयन प्रक्रिया में भागीदारी के रूप में समझना चाहिए।
सामग्री के लिए वैश्विक प्रस्ताव
RBI Polymer Notes के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी BRBNMPL ने वैश्विक अभिरुचि प्रस्ताव यानी Global EOI आमंत्रित किया था। इसमें भारतीय बैंकनोट की छपाई के योग्य सुरक्षा फीचर वाली पॉलिमर शीटों के निर्माण और आपूर्ति का उल्लेख है। आधिकारिक टेंडर पेज पर प्रस्ताव खुलने की तारीख 17 जुलाई और अंतिम तारीख 18 अगस्त 2026 दर्ज है।
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इसके अलावा, RBI Polymer Notes की प्रक्रिया के लिए जारी BRBNMPL दस्तावेज का नंबर EOI/04/CO/2026-27 है। यह पॉलिमर सब्सट्रेट और सुरक्षा फीचर वाली सामग्री की आपूर्ति से संबंधित है। सब्सट्रेट का अर्थ वह आधार सामग्री है, जिस पर नोट छापा जाता है। इसलिए सामग्री खरीद का यह चरण तैयार नोटों के डिजाइन या उनके सार्वजनिक वितरण की घोषणा से अलग है।
UFlex और Spectra की भागीदारी
RBI Polymer Notes से जुड़ी संयुक्त बोली में UFlex की पॉलिमर निर्माण क्षमता और Spectra Systems की बैंकनोट तकनीक का संबंध सामने आता है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से दोनों कंपनियों के प्रस्ताव की जानकारी दी है। इसी रिपोर्ट के अनुसार, पॉलिमर नोट कार्यक्रम में भागीदारी पर UFlex से मांगी गई प्रतिक्रिया का जवाब नहीं मिला था।
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साथ ही, RBI Polymer Notes के तकनीकी संदर्भ में Spectra Systems की आधिकारिक वेबसाइट पर उसका Fusion उत्पाद उपलब्ध है। कंपनी इसे छपाई के लिए तैयार पॉलिमर सब्सट्रेट बताती है, जिसे केंद्रीय बैंकों की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है। इसमें बैंकनोट सुरक्षा तकनीक के विकल्प भी हैं। हालांकि, उत्पाद की ये क्षमताएं भारतीय परियोजना में ठेका मिलने का प्रमाण नहीं हैं।
68,000 रीम की जरूरत
RBI Polymer Notes कार्यक्रम की सामग्री जरूरत पर पीटीआई की रिपोर्ट में BOPP, पॉलिमर सब्सट्रेट और बैंकनोट की छपाई का विवरण दिया गया है। BOPP का पूरा नाम Biaxially Oriented Polypropylene है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित आपूर्ति में 68,000 रीम सामग्री शामिल है। इसमें 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों के लिए 34,000-34,000 रीम की जरूरत बताई गई है।
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इसी क्रम में, RBI Polymer Notes की सामग्री को समान रूप से अपारदर्शी बनाने वाली स्याही और एंटी-स्टैटिक कोटिंग का उल्लेख है। ये आवश्यकताएं BOPP, पॉलिमर नोट और स्याही के चिपकाव से संबंधित हैं। साधारण प्लास्टिक फिल्म अथवा बैंकनोट-योग्य योग्य सामग्री को एक जैसा नहीं माना जा सकता। छपाई की जरूरतों के अनुसार तैयार सतह इस परियोजना का महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा है।
ट्रायल और नियमित जारी होना अलग
RBI Polymer Notes के संबंध में लोकसभा को दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने दोनों मूल्यवर्ग में एक-एक अरब नोटों के फील्ड ट्रायल की योजना को मंजूरी दी है। 10 रुपये के नोट और 20 रुपये के नोट नियमित रूप से जारी करने का प्रस्ताव सफल परीक्षण से जुड़ा है। इसलिए परीक्षण की अनुमति को देशभर में वितरण शुरू होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
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खास बात यह है कि RBI Polymer Notes के बावजूद कागज के नोट, भारतीय मुद्रा और पॉलिमर नोट को लेकर प्रतिस्थापन का दावा सही नहीं होगा। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, पॉलिमर नोट मौजूदा कागज के नोटों के साथ जारी करने का प्रस्ताव है। कागज की मुद्रा को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव नहीं बताया गया है। इससे नोट बंद होने की आशंका का आधार नहीं बनता।
टिकाऊपन पर अंतरराष्ट्रीय अनुभव
RBI Polymer Notes की चर्चा में पॉलिमर नोट, टिकाऊ करेंसी और बैंकनोट सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुसार, पॉलिमर एक पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री है। इसकी चिकनी सतह गंदगी और नमी का बेहतर प्रतिरोध करती है। साथ ही, पारदर्शी खिड़की और होलोग्राम जैसे सुरक्षा फीचर शामिल करने की गुंजाइश भी रहती है।
हालांकि, RBI Polymer Notes के संभावित भारतीय प्रदर्शन को विदेशी अनुभव के बराबर मान लेना उचित नहीं होगा। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपने पॉलिमर नोट, उनके टिकाऊपन और कागज के नोट की तुलना में अधिक उम्र का उल्लेख किया है। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि ये नोट पूरी तरह अविनाशी नहीं हैं। भारत में प्रस्तावित सामग्री का वास्तविक प्रदर्शन परीक्षण से स्पष्ट होगा।
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आगे की घोषणा पर नजर
RBI Polymer Notes पर फिलहाल स्पष्ट तथ्य यह है कि BRBNMPL ने सामग्री आपूर्ति के प्रस्ताव आमंत्रित किए और UFlex तथा Spectra Systems की संयुक्त भागीदारी की खबर सामने आई है। उपलब्ध स्रोतों से अंतिम ठेका, तैयार भारतीय नोटों का डिजाइन या वितरण शुरू होने की निश्चित तारीख प्रमाणित नहीं होती। इन बिंदुओं पर आगे की आधिकारिक सूचना महत्वपूर्ण होगी।
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वहीं दूसरी ओर, RBI Polymer Notes को लेकर पाठकों के लिए फील्ड ट्रायल, पॉलिमर नोट और भारतीय मुद्रा के वर्तमान स्वरूप का अंतर समझना जरूरी है। प्रस्तावित नई सामग्री की जांच और मौजूदा नोटों की स्थिति अलग विषय हैं। अगली खबर में आपूर्तिकर्ता के चयन, परीक्षण की प्रगति तथा वितरण संबंधी निर्देशों की पुष्टि मिलने पर ही उन्हें तथ्य के रूप में जोड़ा जाना चाहिए।
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