Dhari Devi Temple near Srinagar Garhwal Uttarakhand on the banks of Alaknanda River
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध माँ धारी देवी मंदिर में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना ने श्रद्धा और आस्था का सुंदर संदेश दिया। अलकनंदा नदी के किनारे स्थित इस पवित्र धाम में प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, बेहतर स्वास्थ्य और आपदाओं से सुरक्षा की प्रार्थना की गई। Dhari Devi Temple में हुए इस धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर पूरे प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
पूजा में शामिल हुए जनप्रतिनिधि
Dhari Devi Temple में आयोजित पूजा-अर्चना में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (PUSHKAR SINGH DHAMI) के साथ कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल और रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी भी उपस्थित रहे। सभी ने माँ धारी देवी मंदिर में प्रदेश की शांति, समृद्धि और उत्तराखंड आपदा सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। यह आयोजन 20 सितंबर 2025 को प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के बीच हुआ था।

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आपदा से राहत की कामना
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटनाएं लोगों के जीवन को प्रभावित करती रही हैं। ऐसे समय Dhari Devi Temple में की गई विशेष प्रार्थना का भावनात्मक महत्व रहा। माँ धारी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और उत्तराखंड आपदा सुरक्षा के लिए माता से आशीर्वाद मांगा। इस अवसर ने संकट के समय सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया।
देवभूमि की रक्षक देवी
Dhari Devi Temple को उत्तराखंड की प्रमुख धार्मिक आस्थाओं में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि माँ धारी देवी मंदिर में विराजमान देवी पूरे क्षेत्र की रक्षा करती हैं। स्थानीय श्रद्धालु माता को चारधाम यात्रा की रक्षक भी मानते हैं। इसी विश्वास के कारण उत्तराखंड आपदा सुरक्षा और प्रदेश की खुशहाली के लिए यहां विशेष पूजा करने की परंपरा रही है।

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मंदिर का प्राचीन इतिहास
Dhari Devi Temple से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा के अनुसार, कभी अलकनंदा नदी में आई बाढ़ के दौरान देवी की प्रतिमा एक चट्टान पर आकर रुक गई थी। स्थानीय लोगों ने इसे देवी की इच्छा माना और वहां पूजा शुरू की। माँ धारी देवी मंदिर की यह कथा पीढ़ियों से सुनाई जाती है। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, कोई प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं। उत्तराखंड आपदा सुरक्षा की प्रार्थनाओं में भी देवी के प्रति इसी आस्था की झलक मिलती है।
अलकनंदा किनारे अद्भुत धाम
Dhari Devi Temple श्रीनगर गढ़वाल से लगभग 15 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। चारों ओर पहाड़ और नदी का सुंदर दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। माँ धारी देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क से लगभग एक किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। बरसात में यात्रियों को मौसम और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का ध्यान रखना चाहिए। उत्तराखंड आपदा सुरक्षा के लिहाज से यह सावधानी महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि में विशेष महत्व
Dhari Devi Temple में नवरात्रि के दौरान माता की विशेष आराधना की जाती है। दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है। माँ धारी देवी मंदिर आस्था के साथ स्थानीय धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आने वाले यात्रियों के लिए उत्तराखंड आपदा सुरक्षा संबंधी जानकारी और मौसम की स्थिति जानना उपयोगी रहता है। उद्देश्य था।

श्रद्धा के साथ सुरक्षा का संदेश
Dhari Devi Temple में हुई पूजा यह संदेश देती है कि कठिन समय में आस्था लोगों को मानसिक संबल और एकजुटता की प्रेरणा दे सकती है। माँ धारी देवी मंदिर में प्रदेश की खुशहाली के लिए की गई प्रार्थना के साथ आपदा प्रभावित लोगों की सहायता भी जरूरी है। उत्तराखंड आपदा सुरक्षा के लिए समय पर चेतावनी, सुरक्षित यात्रा और प्रशासनिक तैयारियां उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यही आस्था और जिम्मेदारी का सार्थक संगम है।
–समाप्त–
