Gen Alpha Protest Bhopal: 300-400 students protest proposed DMS-KV merger.(pc-itg)
Gen Alpha Protest Bhopal ने भोपाल में मंगलवार, 18 अगस्त को सभी का ध्यान खींचा। राजधानी में पहली बार किसी शैक्षणिक संस्थान से जुड़े मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में स्कूली छात्र सड़क पर उतरे। रीजनल स्कूल के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राओं ने स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में विलय किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। छात्रों ने स्कूल की मौजूदा पहचान और शैक्षणिक व्यवस्था को बनाए रखने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में ‘Save DMS’ समेत कई पोस्टर नजर आए। छात्रों ने रीजनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित संविलयन का विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में चरणबद्ध आंदोलन किया जा सकता है।
पहली बार सड़क पर उतरे ‘Gen Alpha’ छात्र
भोपाल में हुआ यह Gen Alpha Protest Bhopal इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि स्कूली उम्र के विद्यार्थियों का इतना बड़ा समूह पहली बार अपने संस्थान से जुड़े किसी फैसले के विरोध में सार्वजनिक तौर पर सामने आया है। छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और स्कूल की मौजूदा पहचान को बरकरार रखने की मांग की।
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प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों का कहना था कि रीजनल स्कूल को केवल एक सामान्य स्कूल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी अपनी अलग शैक्षणिक पहचान है और यहां पढ़ाई के साथ शिक्षा के नए प्रयोगों और नवाचारों पर भी जोर दिया जाता है।
‘स्कूल की पहचान खत्म होने का डर’
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन में विलय के बाद रीजनल स्कूल की मूल अवधारणा और काम करने का तरीका प्रभावित हो सकता है। उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्ताव लागू होने के बाद स्कूल की मौजूदा शैक्षणिक व्यवस्था किस रूप में रहेगी।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की पहचान वर्षों में विकसित हुई है। यहां शिक्षा के क्षेत्र में अलग-अलग प्रयोग किए जाते रहे हैं और विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों के अवसर भी मिलते हैं। ऐसे में किसी बड़े बदलाव से पहले स्कूल से जुड़े छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की राय लेना जरूरी है।
KVS की प्रवेश नीति को लेकर अभिभावकों की चिंता
प्रस्तावित विलय को लेकर अभिभावकों की एक बड़ी चिंता KVS Admission Policy भी है। उनका कहना है कि केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के लिए निर्धारित प्राथमिकताएं और नियम अलग होते हैं। ऐसे में अगर रीजनल स्कूल को KVS के तहत लाया जाता है तो वर्तमान विद्यार्थियों और भविष्य में यहां प्रवेश लेने वाले बच्चों की स्थिति क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
अभिभावक जानना चाहते हैं कि वर्तमान छात्रों की पढ़ाई किस व्यवस्था के तहत जारी रहेगी और आने वाले वर्षों में नए विद्यार्थियों के दाखिले की प्रक्रिया क्या होगी। उनका कहना है कि इस तरह के सवालों का जवाब मिले बिना विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
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करीब 1000 विद्यार्थी करते हैं पढ़ाई
अभिभावकों के मुताबिक रीजनल स्कूल में नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक करीब 1,000 विद्यार्थी पढ़ते हैं। अलग-अलग कक्षाओं में दो सेक्शन संचालित होते हैं। वरिष्ठ कक्षाओं में विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के विकल्प उपलब्ध हैं। स्कूल में कॉमर्स और आर्ट्स सहित अन्य विषयों की पढ़ाई के साथ व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।
यही वजह है कि अभिभावक चाहते हैं कि प्रस्तावित विलय के बाद इन सभी व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट रोडमैप सामने रखा जाए। उनका सवाल है कि क्या मौजूदा पाठ्यक्रम और विषयों की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी या इसमें बदलाव किया जाएगा।
शिक्षकों और विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल
विलय के प्रस्ताव ने केवल छात्रों और प्रवेश व्यवस्था को लेकर ही सवाल नहीं खड़े किए हैं। अभिभावक यह भी जानना चाहते हैं कि वर्तमान शिक्षकों की भूमिका क्या होगी। यदि संस्थान KVS के अधीन आता है तो शिक्षकों की सेवा शर्तों और जिम्मेदारियों में किसी तरह का बदलाव होगा या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अभिभावकों का कहना है कि करीब एक हजार विद्यार्थियों वाले संस्थान में किसी भी प्रशासनिक बदलाव का सीधा प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार और संबंधित अधिकारियों को सभी पहलुओं पर जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
‘पहले संवाद, फिर फैसला’ की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों की मुख्य मांग है कि संविलयन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों से संवाद किया जाए। उनका कहना है कि छात्रों की शिक्षा और भविष्य से जुड़े फैसले केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं लिए जाने चाहिए।
अभिभावकों ने सरकार और NCERT से भी प्रस्तावित विलय के बाद की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल की मौजूदा शैक्षणिक विशेषताओं और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
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चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
छात्रों ने ज्ञापन के जरिए अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचा दी हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल छात्रों का विरोध स्कूल की पहचान और मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की मांग पर केंद्रित है।
भोपाल का यह Gen Alpha Protest Bhopal आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग की नजर रहेगी। फिलहाल प्रदर्शन ने प्रस्तावित KVS विलय को लेकर शिक्षा व्यवस्था, प्रवेश नीति, पाठ्यक्रम और स्कूल की पहचान से जुड़े कई सवालों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
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