CM Yogi Adityanath reacts to Hamid Ansari Statement in Greater Noida
Hamid Ansari Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के हालिया बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि हामिद अंसारी के बयान में हिंदू सांप्रदायिकता की तुलना कट्टरपंथी वामपंथी उग्रवाद से करने का प्रयास किया गया है।
वहीं, हामिद अंसारी ने जिस कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी, वहां उन्होंने सीधे तौर पर अपने विचार के रूप में कोई नया ऐतिहासिक दावा रखने के बजाय पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का हवाला दिया था। अंसारी ने संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की पुस्तक The RSS: A Menace to India का भी उल्लेख किया।
Hamid Ansari Statement को लेकर क्या है पूरा विवाद?
Hamid Ansari Statement का मामला 18 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर से जुड़ा है। कार्यक्रम का विषय “Remembering a Polymath: The Life and Times of Abdul Ghafoor Noorani” था। इसमें हामिद अंसारी ने नूरानी के जीवन, उनके संवैधानिक विचारों और भारत में नागरिक राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
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अंसारी ने नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक The RSS: A Menace to India का हवाला देते हुए जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन को याद किया। उनके मुताबिक, उस समय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में नेहरू की ओर से भारत के लिए खतरे के संदर्भ में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता की बात कही गई थी। यह कथन तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए जाने का अंसारी ने उल्लेख किया।
हामिद अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद पर भी जताई चिंता
अपने संबोधन में हामिद अंसारी ने केवल नेहरू के कथन का उल्लेख नहीं किया, बल्कि भारत में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच बदलाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे रुझान सामने आए हैं जो नागरिक राष्ट्रवाद के स्थापित सिद्धांत को चुनौती देते हैं।
उनकी टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बीजेपी नेताओं और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई, जबकि उनके समर्थक पक्ष की ओर से इसे सांप्रदायिक राजनीति और राष्ट्रवाद को लेकर एक वैचारिक बहस के संदर्भ में देखा गया।
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CM योगी ने हामिद अंसारी के बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
Hamid Ansari Statement पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में इसे दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से भारत की परंपरा और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश होती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग अपने पद की गरिमा के अनुरूप सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करते हैं। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान को भारत की परंपरा के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया और आरोप लगाया कि इसमें हिंदू परंपरा को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की गई है।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां भारत के खिलाफ चलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार का हिस्सा हैं। ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि किसी स्रोत से नहीं हुई है।
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VHP ने भी जताई आपत्ति
हामिद अंसारी की टिप्पणी पर विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने भी प्रतिक्रिया दी। जैन ने उनके बयान को भारतीय परंपराओं का अपमान बताया और कहा कि अंसारी ने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर जिस तरह की टिप्पणी की है, वह आपत्तिजनक है।
जैन ने अंसारी के पुराने सार्वजनिक बयानों और राम जन्मभूमि मामले से जुड़े उनके रुख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में धार्मिक समुदायों की स्थिति को लेकर अंसारी की टिप्पणियों पर पहले भी विवाद हो चुका है। उनके बयान VHP की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
Hamid Ansari Statement के बाद विवाद केवल बीजेपी और VHP तक सीमित नहीं रहा। कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी अंसारी की टिप्पणी से दूरी बनाई और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
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विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता, नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण हैं। एक पक्ष अंसारी की टिप्पणी को ऐतिहासिक संदर्भ और सांप्रदायिक राजनीति पर चिंता के रूप में देख रहा है, जबकि आलोचक इसे हिंदू परंपरा के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी मान रहे हैं।
आगे क्या है?
फिलहाल Hamid Ansari Statement को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। अंसारी के बयान में जिस ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया गया, उसे लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और VHP की ओर से इस टिप्पणी की आलोचना की गई है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत में राष्ट्रवाद, धर्म, सांप्रदायिकता और संवैधानिक मूल्यों को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर अन्य राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।
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