Farmers protesting against the proposed India US Trade Agreement and submitting a memorandum demanding protection of Indian agriculture and dairy sectors.
India US Trade Agreement Protest: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को हरियाणा के करनाल और भिवानी सहित कई स्थानों पर किसान संगठनों ने India US Trade Agreement Protest के तहत प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन ‘देश बचाओ मोर्चा’ और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से करनाल के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। उनका कहना था कि यदि प्रस्तावित ट्रेड डील पर बिना किसानों की सहमति और हितों को ध्यान में रखे हस्ताक्षर किए गए, तो इसका सीधा असर भारतीय कृषि व्यवस्था पर पड़ेगा।
ट्रेड डील पर पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शनकारी किसान नेताओं का कहना है कि India US Trade Agreement Protest का मुख्य उद्देश्य सरकार का ध्यान उन संभावित प्रभावों की ओर आकर्षित करना है, जो इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय किसानों को झेलने पड़ सकते हैं।
किसानों का दावा है कि यदि अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद और मेवे भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में आने लगे, तो घरेलू किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाएगा। इससे फसलों के उचित दाम मिलने में परेशानी आएगी और छोटे तथा मध्यम किसान आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं।
सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों और आम नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अवसर मिलना चाहिए।
उनका आरोप था कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
दिल्ली कूच रोकने पर जताई नाराजगी
India US Trade Agreement Protest के दौरान किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, तब हरियाणा पुलिस और प्रशासन ने विभिन्न सीमाओं और टोल प्लाजा पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
किसानों का कहना है कि उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। उनका आरोप है कि इससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बाधित हुआ और किसानों की आवाज राजधानी तक पहुंचने से रोक दी गई।
कृषि और डेयरी क्षेत्र पर पड़ सकता है असर
किसान संगठनों का मानना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का सबसे अधिक प्रभाव कृषि और डेयरी क्षेत्र पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि आयात शुल्क में कमी की जाती है तो विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे।
ऐसी स्थिति में स्थानीय किसानों को अपनी उपज के उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों, कृषि विशेषज्ञों और संबंधित संगठनों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए।
युवाओं के आंदोलन को भी मिला किसानों का समर्थन
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के समर्थन का भी ऐलान किया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है।
किसान नेताओं ने कहा कि यदि संयुक्त किसान नेतृत्व भविष्य में फिर से दिल्ली कूच का आह्वान करता है तो किसान पूरी मजबूती के साथ आंदोलन में भाग लेंगे। उन्होंने युवाओं और किसानों के मुद्दों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।
संसद में किसानों की आवाज उठाने की अपील
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल खट्टर से अपील की कि वे संसद में किसानों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाएं। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार India US Trade Agreement Protest के पीछे मौजूद आशंकाओं पर गंभीरता से विचार करे और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित किए बिना किसी भी समझौते को अंतिम रूप न दिया जाए। किसानों का कहना है कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है।
भिवानी में भी किसानों का प्रदर्शन तेज
करनाल के साथ-साथ भिवानी में भी संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया। यहां किसानों ने सांसद धर्मबीर के कैंप कार्यालय का घेराव किया और उनके प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शन से पहले चौधरी छोटूराम चौक पर किसान नेताओं की सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभा में अमेरिका, यूरोपीय संघ, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित या संभावित व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।
किसान नेताओं का कहना था कि भारत को ऐसे किसी भी व्यापार समझौते से पहले अपने किसानों और कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
India US Trade Agreement Protest ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर किसानों की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों का कहना है कि किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का निर्णय लेने से पहले कृषि क्षेत्र, डेयरी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। किसानों ने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
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