Illegal Mining Blast: Villagers protesting on the Kota-Jhansi highway in Shivpuri, while damaged houses and fallen stones are seen in the background.
Illegal Mining Blast: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की करेरा तहसील स्थित सिलारपुर गांव में एक कथित Illegal Mining Blast ने ग्रामीणों की जिंदगी में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। गांव के समीप संचालित पत्थर उत्खनन क्षेत्र में डायनामाइट से किए गए विस्फोट के बाद भारी पत्थर हवा में उड़कर ग्रामीणों के घरों तक पहुंच गए। कई मकानों की छतों और दीवारों को नुकसान पहुंचा, जबकि घरों में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विस्फोट के दौरान कोई व्यक्ति उन पत्थरों की चपेट में आ जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने विरोध स्वरूप कोटा-झांसी फोरलेन पर जाम लगा दिया।
देर रात हुए धमाके ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगलवार शाम क्षेत्र में एक बार फिर Illegal Mining Blast किया गया। धमाका इतना तेज था कि कई किलोमीटर दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। विस्फोट के कुछ ही क्षण बाद बड़े आकार के पत्थर गांव की ओर आकर गिरे।
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ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना हुई हो। इससे पहले भी कई बार पत्थर गिरने और कंपन महसूस होने की शिकायत प्रशासन तक पहुंचाई गई थी। लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके कारण लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने लगाया कोटा-झांसी फोरलेन पर जाम
Illegal Mining Blast के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण रात करीब आठ बजे कोटा-झांसी फोरलेन पर पहुंच गए और सड़क जाम कर दी। देखते ही देखते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्री बसें, ट्रक, निजी वाहन और अन्य परिवहन साधन करीब डेढ़ घंटे तक जाम में फंसे रहे।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि बार-बार की शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों ने मांग की कि अवैध या नियमों के विरुद्ध चल रहे उत्खनन कार्यों को तत्काल रोका जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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घरों में गिरे भारी पत्थर, बाल-बाल बचे लोग
सिलारपुर गांव के कई परिवारों ने दावा किया कि Illegal Mining Blast के दौरान उड़कर आए पत्थरों ने उनके घरों को नुकसान पहुंचाया। कुछ मकानों की छतों पर बड़े पत्थर गिरने से दरारें आ गईं, जबकि कई घरों में रखे घरेलू सामान को भी क्षति पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय पत्थर गिरे, उस समय परिवार के सदस्य घरों के अंदर मौजूद थे। सौभाग्य से किसी की जान नहीं गई, लेकिन घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। गांव के बुजुर्गों और महिलाओं ने भी प्रशासन से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
लंबे समय से उठ रहे हैं अवैध उत्खनन के सवाल
करेरा क्षेत्र पहले भी अवैध खनन गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि Illegal Mining Blast जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं और कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि आबादी वाले क्षेत्रों के समीप डायनामाइट का उपयोग बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। यदि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाए तो इससे जान-माल का गंभीर नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार रात के समय भी ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना रहता है।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, क्रेशर को किया सील
हाईवे जाम की सूचना मिलने के बाद करेरा के एसडीएम अनुराग निगवाल और स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया और घटना की जांच का आश्वासन दिया।
प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए संबंधित क्रेशर यूनिट को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि Illegal Mining Blast से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया और हाईवे पर यातायात बहाल हो सका।
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नियमों के उल्लंघन पर लीज निरस्त करने की चेतावनी
एसडीएम अनुराग निगवाल ने बताया कि जिस क्षेत्र में उत्खनन कार्य किया जा रहा था, वह चंद्रभान सिंह सिसोदिया के नाम पर आवंटित पट्टे से संबंधित है। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि वहां किए गए Illegal Mining Blast में खनन नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रात के समय ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं होती। यदि जांच में किसी प्रकार का उल्लंघन सामने आता है तो लीज निरस्त करने और क्रेशर संचालन बंद कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरण और सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार होने वाले Illegal Mining Blast न केवल स्थानीय आबादी के लिए खतरा बनते हैं, बल्कि भूमि, जल स्रोतों और आसपास के प्राकृतिक पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास और रोजगार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका आग्रह है कि प्रशासन खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी करे और आबादी वाले क्षेत्रों के पास किसी भी प्रकार की जोखिमपूर्ण ब्लास्टिंग पर सख्ती से रोक लगाए।
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि Illegal Mining Blast मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या उन्हें भविष्य में ऐसी घटनाओं से राहत मिल पाएगी।
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