Mirabai Chanu Commonwealth Games celebrates after winning her third consecutive Commonwealth Games gold medal in women's weightlifting.
Mirabai Chanu Commonwealth Games: भारतीय वेटलिफ्टिंग की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने एक बार फिर अपनी शानदार ताकत, अनुशासन और निरंतर प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरी बार गोल्ड अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने न सिर्फ भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाला, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला वेटलिफ्टर बनने का गौरव भी हासिल किया।
यह उपलब्धि केवल एक और गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है। यह पिछले 12 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके लगातार शानदार प्रदर्शन, फिटनेस और मानसिक मजबूती की कहानी भी है। Mirabai Chanu Commonwealth Games में उनकी यह सफलता भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में शामिल हो गई है।
ग्लासगो में फिर चमकी मीराबाई की ताकत
ग्लासगो की धरती मीराबाई चानू के लिए हमेशा खास रही है। वर्ष 2014 में यहीं से उनके कॉमनवेल्थ सफर की शुरुआत हुई थी, जब उन्होंने रजत पदक जीता था। अब 12 साल बाद उसी शहर में लौटकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीतते हुए अपने करियर को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
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31 वर्षीय मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 190 किलोग्राम का प्रदर्शन किया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से कम था, लेकिन प्रतियोगिता में उनका दबदबा इतना मजबूत था कि दूसरे स्थान पर रहीं नाइजीरिया की रूथ न्योंग उनसे पूरे 22 किलोग्राम पीछे रह गईं।
12 वर्षों में लगातार बेहतर होती गईं मीराबाई
अगर मीराबाई के करियर पर नजर डालें तो उनकी सबसे बड़ी ताकत केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन करना है। वर्ष 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने कुल 170 किलोग्राम वजन उठाया था। वहीं 2026 में उन्होंने 190 किलोग्राम का कुल वजन उठाकर दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी क्षमता और आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं आई है।
एक दशक से अधिक समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन होता है। लेकिन Mirabai Chanu Commonwealth Games में लगातार सफलता हासिल कर यह साबित कर चुकी हैं कि मेहनत और अनुशासन के दम पर लंबा करियर भी बनाया जा सकता है।
विश्व चैंपियन से लेकर ओलंपिक पदक तक शानदार सफर
मीराबाई चानू का अंतरराष्ट्रीय करियर कई बड़ी उपलब्धियों से भरा हुआ है। वर्ष 2017 में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता और भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई पहचान दिलाई। इसके बाद 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
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टोक्यो ओलंपिक 2021 में उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में कुल 202 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उस समय उनका 115 किलोग्राम का क्लीन एंड जर्क ओलंपिक रिकॉर्ड भी बना था। इसके बाद पेरिस ओलंपिक में वह पदक से जरूर चूक गईं, लेकिन चौथे स्थान पर रहते हुए भी उन्होंने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी बनाया नया रिकॉर्ड
साल 2026 की शुरुआत में आयोजित राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 205 किलोग्राम का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
यह प्रदर्शन उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ रहा और इसने यह साबित किया कि वह आज भी भारत की सबसे मजबूत और भरोसेमंद वेटलिफ्टर हैं।
साफ-सुथरे करियर ने बढ़ाया सम्मान
भारतीय वेटलिफ्टिंग कई बार डोपिंग विवादों के कारण चर्चा में रही है। हाल के वर्षों में कई खिलाड़ियों के डोप टेस्ट फेल होने के कारण भारत की प्रतियोगिताओं में भागीदारी तक प्रभावित हुई।
ऐसे माहौल में मीराबाई चानू का करियर अलग पहचान रखता है। एक दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उनका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ रहा है। उन्होंने अपनी सफलता केवल मेहनत, तकनीक और अनुशासन के दम पर हासिल की है। यही वजह है कि युवा खिलाड़ी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे बड़ी प्रेरणा
मीराबाई चानू अब केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों, चोटों और कई चुनौतियों का सामना करते हुए कभी हार नहीं मानी। हर बार उन्होंने पहले से बेहतर वापसी की और देश का नाम रोशन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल मेडल जीतना नहीं, बल्कि इतने लंबे समय तक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहना है। यही कारण है कि आज भारतीय वेटलिफ्टिंग में उनका नाम एक मानक बन चुका है।
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इतिहास में दर्ज हुई नई उपलब्धि
Mirabai Chanu Commonwealth Games में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला वेटलिफ्टर बन चुकी हैं। 2014 में रजत, 2018 में स्वर्ण, 2022 में स्वर्ण और अब 2026 में तीसरा लगातार गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है।
उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई दिशा देने का काम करेगी। लगातार 12 वर्षों तक शीर्ष स्तर पर बने रहकर मीराबाई चानू ने साबित कर दिया है कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर मेहनत के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। आज वह केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व वेटलिफ्टिंग की सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल हैं।
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