Farmers selling mung crop under MSP procurement at government purchase center in Madhya Pradesh
MP MSP Mung Procurement: मध्य प्रदेश में MSP पर मूंग खरीदी को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी विवाद के बाद राज्य सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। किसानों के आंदोलन और लगातार बढ़ते दबाव के बीच मोहन यादव सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का दायरा बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। पहले केवल 25 प्रतिशत मूंग की खरीद की जा रही थी, जिससे किसानों में भारी नाराजगी थी। सरकार के इस फैसले को किसानों को तत्काल राहत देने की कोशिश माना जा रहा है, हालांकि खरीदी केंद्रों पर सामने आ रही अनियमितताओं ने नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं।
MSP पर खरीदी के लिए किसानों ने किया था बड़ा प्रदर्शन
प्रदेश के कई जिलों में किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उनकी पूरी मूंग की फसल MSP पर खरीदी जाए। 27 जुलाई को नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और भोपाल की ओर कूच करने की तैयारी की। किसानों का कहना था कि बाजार में मूंग की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम मिल रही हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार ने किसानों की मांगों पर विचार करते हुए 100 प्रतिशत खरीद की मांग तो स्वीकार नहीं की, लेकिन MSP पर खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।(MP MSP Mung Procurement)
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कितना तय किया गया है MSP और क्या बदले नियम?
राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष मूंग का MSP 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। वहीं खरीदी की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से उन किसानों को फायदा मिलेगा जो समय पर पंजीकरण नहीं करा पाए थे या तकनीकी कारणों से स्लॉट बुक नहीं कर सके थे। कृषि विभाग का दावा है कि विस्तारित समय-सीमा से अधिक किसानों की उपज सरकारी खरीद व्यवस्था में शामिल हो सकेगी।
MSP खरीदी के बीच सामने आईं गड़बड़ियों की शिकायतें
जहां एक ओर सरकार किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई खरीदी केंद्रों से गंभीर शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ केंद्रों पर गुणवत्ता के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है।
सागर जिले के रहली विकासखंड स्थित गुंजौरा खरीदी केंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर किसानों से प्रति क्विंटल 300 रुपये की मांग की जाती दिखाई दी। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि यदि किसान अतिरिक्त राशि देंगे तो कम गुणवत्ता वाली या मिट्टी मिश्रित मूंग भी MSP पर खरीद ली जाएगी।
किसानों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं और ईमानदार किसानों के साथ अन्याय करती हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में
वीडियो सामने आने के बाद कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। रहली तहसील के अधिकारियों ने खरीदी केंद्र पहुंचकर जांच की और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
प्रारंभिक जांच के आधार पर खरीदी केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु तिवारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों से किसी भी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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देवरी और केसली में भी किसानों ने लगाए गंभीर आरोप
रहली के अलावा देवरी और केसली क्षेत्र के खरीदी केंद्रों पर भी किसानों ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि कुछ केंद्रों पर गुणवत्ता जांच के नाम पर 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की अवैध मांग की जा रही है।
कई किसानों का आरोप है कि यदि कोई अतिरिक्त राशि देने को तैयार हो जाता है तो उसकी कम गुणवत्ता वाली उपज भी स्वीकार कर ली जाती है, जबकि नियमों का पालन करने वाले किसानों की उपज को विभिन्न कारण बताकर अस्वीकार किया जा रहा है। ऐसे आरोपों ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों के लिए क्यों अहम है MSP?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि MSP किसानों को बाजार में गिरती कीमतों से सुरक्षा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जब खुले बाजार में फसल का मूल्य कम हो जाता है, तब सरकारी खरीद किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी देती है।
मूंग जैसी दलहनी फसल के मामले में MSP पर प्रभावी खरीदी किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ दलहन उत्पादन को भी प्रोत्साहित करती है। हालांकि यह तभी संभव है जब पूरी खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो।
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सरकार के सामने दोहरी चुनौती
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के उद्देश्य से MSP पर मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाकर बड़ा कदम उठाया है, लेकिन अब असली चुनौती इस व्यवस्था को ईमानदारी से लागू करने की है। यदि खरीदी केंद्रों पर अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें जारी रहती हैं तो सरकार की मंशा पर असर पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जांच के आधार पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और क्या किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज MSP पर बेच पाते हैं। यदि व्यवस्था पारदर्शी रहती है तो यह फैसला प्रदेश के लाखों किसानों के लिए राहत साबित हो सकता है।
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