Nepal Tunnel Rescue operation in Trishuli as 39 workers remain missing.(pc- NEPAL ARMY)
Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद चलाया गया रेस्क्यू अभियान लगातार कई सवाल खड़े कर रहा है। त्रिशूली क्षेत्र की टनल नंबर 3-ए में फंसे मजदूरों को खोजने के लिए कई दिनों तक अभियान चलाया गया, लेकिन नौ दिन बाद भी 39 लोगों का कोई पता नहीं चल सका है। रेस्क्यू टीम ने टनल की खुदाई और तलाशी के बाद दो लोगों को जीवित बाहर निकाला है, जबकि एक मजदूर का शव बरामद किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टनल के अंदर मौजूद बताए जा रहे बाकी 39 मजदूर कहां गए। Nepal Tunnel Rescue के दौरान सुरंग की विस्तृत जांच की जा चुकी है, लेकिन लापता लोगों के बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
टनल नंबर 3-ए में मौजूद थे 42 लोग
नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ के समय त्रिशूली की टनल नंबर 3-ए में कुल 42 मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। बचाव दल ने सुरंग के भीतर पहुंचकर व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
Nepal Tunnel Rescue के दौरान दो लोगों को जीवित सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ। इसके बाद भी 39 अन्य लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि सुरंग के भीतर मौजूद बताए गए बाकी लोगों की सही स्थिति का पता कैसे लगाया जाए।
9 दिन तक चला रेस्क्यू और तलाशी अभियान
रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी और मजदूर टनल क्षेत्र में फंस गए थे। अलग-अलग टनलों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार बचाव अभियान चलाया गया।
टनल नंबर 3-ए तक पहुंचने और वहां तलाशी लेने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। शुक्रवार को खुदाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा होने के बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीम सुरंग के अंदर पहुंची। टीम ने अंदर मौजूद हिस्सों की जांच की, जिसके बाद दो जीवित लोगों और एक शव के मिलने की पुष्टि हुई। लेकिन 39 लोगों के नहीं मिलने से Nepal Tunnel Rescue अब और जटिल हो गया है।
39 मजदूर आखिर कहां गए? जांच में जुटे अधिकारी
सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की के अनुसार टनल नंबर 3-ए में चलाया गया मुख्य रेस्क्यू अभियान पूरा कर लिया गया है। हालांकि लापता लोगों के संबंध में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।
अधिकारियों ने उस कंपनी से भी संपर्क किया है, जहां ये लोग काम कर रहे थे। कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, उनके कार्यस्थल और बाढ़ के दौरान उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। अब जांच एजेंसियां इस संभावना पर भी विचार कर रही हैं कि क्या मजदूर सुरंग के किसी दूसरे हिस्से में पहुंच गए थे या बाढ़ के पानी के साथ किसी गहरे हिस्से में चले गए।
क्या टनल के गड्ढों में दबे हो सकते हैं लोग?
रेस्क्यू टीम के सामने एक संभावना यह भी है कि बाढ़ के दौरान टनल के भीतर बने गहरे गड्ढों या अन्य हिस्सों में लोग फंस गए हों। पानी और मलबे के कारण सुरंग की आंतरिक संरचना में भी बदलाव आया हो सकता है।
इसी वजह से अधिकारियों की ओर से एक और सर्च ऑपरेशन चलाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। Nepal Tunnel Rescue के अगले चरण में सुरंग के उन हिस्सों की फिर से जांच की जा सकती है, जहां अब तक पहुंचना मुश्किल रहा है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक लापता 39 लोगों के बारे में किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
टनल से जिंदा निकले संजय साह ने सुनाई आपबीती
टनल नंबर 3-ए से जीवित निकाले गए लोगों में संजय साह भी शामिल हैं। उनका बयान सामने आने के बाद सुरंग के अंदर के हालात की कुछ जानकारी मिली है। संजय साह के मुताबिक जब वे टनल में काम कर रहे थे, तभी उन्हें बाढ़ आने की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया कि उस समय हालात तेजी से बिगड़ने लगे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बचाने की कोशिश की और जल्द ही कई लोग सुरंग के अंदर फंस गए।
संजय के अनुसार आखिरी समय में उनके साथ करीब 25 लोग टनल में मौजूद थे। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि बाढ़ के बाद उन लोगों के साथ क्या हुआ।
Read: नेपाल जैसी तबाही का खतरा? कश्मीर की 5 ग्लेशियल झीलों पर वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी चिंता
बचने की उम्मीद में करते रहे प्रार्थना
संजय साह ने बताया कि टनल में फंसे रहने के दौरान उन्होंने और अन्य लोगों ने बचने की उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में वे महामंत्र का जाप करते रहे।
उनके अनुसार सुरंग के भीतर कुछ अन्य लोगों से उनका संपर्क भी बना हुआ था। संजय ने दावा किया कि वे तीन से चार लोगों के संपर्क में थे। हालांकि बाद में बाढ़ और हालात बिगड़ने के कारण बाकी लोगों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। संजय को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कार्यरत हैं संजय साह
सप्तरी जिले के रहने वाले 30 वर्षीय संजय साह नेपाल विद्युत प्राधिकरण में मैकेनिकल फोरमैन के रूप में कार्यरत बताए गए हैं। बाढ़ आने से पहले उनकी ड्यूटी टनल के कंट्रोल रूम में थी। बाढ़ के बाद उत्पन्न हालात ने पूरे टनल प्रोजेक्ट क्षेत्र को प्रभावित किया। सुरंगों में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालना बचाव दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
ALSO READ: Today Haryana News| The World News Insights | TV TODAY BHARAT NEWS | LATEST BOLLYWOOD NEWS
Nepal Tunnel Rescue पर अब अगले ऑपरेशन की नजर
टनल नंबर 3-ए की शुरुआती व्यापक जांच पूरी होने के बावजूद लापता 39 मजदूरों का पता नहीं चलना रेस्क्यू एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। दो लोगों का जिंदा मिलना उम्मीद जगाता है, लेकिन बाकी लोगों के बारे में कोई सुराग न मिलने से परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
Nepal Tunnel Rescue के अगले चरण में अधिकारियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम यह पता लगाना होगा कि बाढ़ के समय टनल में मौजूद अन्य लोग आखिर किस दिशा में गए और क्या वे सुरंग के किसी ऐसे हिस्से में फंसे हैं, जहां अभी तक रेस्क्यू टीम नहीं पहुंच सकी है।
फिलहाल नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, सेना और संबंधित कंपनी सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही हैं। 39 मजदूरों की तलाश जारी है और आगे का रेस्क्यू अभियान इस रहस्य से पर्दा उठा सकता है कि आखिर इतने लोग टनल से कहां गायब हो गए।
UTTAR PRADESH |UTTARAKHAND UPDATE |CM YOGI BREAKING |EXPLAINER TV TODAY BHARAT|WEB STORY |NATIONAL NEWS TODAY | Business Bharat
