Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami inaugurating development projects worth over ₹114 crore during Pahad Pachchayan Mahotsav 2025 in Kotabagh, Nainital and paying tribute to Atal Bihari Vajpayee.
Uttarakhand development projects Kotabagh 2025: उत्तराखंड के विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय उस समय जुड़ गया जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद नैनीताल के कोटाबाग क्षेत्र में आयोजित घोड़ा लाइब्रेरी पहाड़ पच्छयाण महोत्सव–2025 में सहभागिता की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ₹114 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार एवं प्रस्तावित विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं था, बल्कि उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में समग्र विकास की मजबूत घोषणा भी बना। कोटाबाग जैसे पर्वतीय क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर परियोजनाओं की शुरुआत यह संकेत देती है कि राज्य सरकार विकास को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि गांव, सीमांत और पहाड़ी इलाकों को भी समान प्राथमिकता दे रही है।
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घोड़ा लाइब्रेरी पहाड़ पच्छयाण महोत्सव स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री धामी ने इस मंच से यह स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की लोकसंस्कृति, भाषा और पर्वतीय जीवनशैली भी राज्य की आत्मा हैं। महोत्सव के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह दर्शाया कि विकास और विरासत एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि विकास की गति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी संरक्षित रखा जाए।
इस अवसर पर जिन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया, वे सड़क कनेक्टिविटी, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़कें न केवल आवागमन को आसान बनाती हैं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय व्यापार को भी गति देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए शुरू की गई योजनाएं आने वाले वर्षों में पलायन रोकने में सहायक सिद्ध होंगी। सरकार का फोकस स्पष्ट है स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि युवाओं को रोज़गार और बेहतर जीवन के लिए पहाड़ छोड़ने की मजबूरी न रहे।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रेरणास्रोत, ‘भारत रत्न’ और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अटल जी का उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा है और अलग राज्य निर्माण का सपना उन्हीं की दूरदर्शिता का परिणाम है। अटल बिहारी वाजपेयी की विकास सोच सड़क, संचार और सुशासन आज भी उत्तराखंड सरकार की नीतियों में झलकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अटल जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए संतुलित, टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
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मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग विकास मॉडल अपनाया जा रहा है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग हैं, इसलिए योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाला जा रहा है। पेयजल योजनाएं, ग्रामीण सड़कें, होम-स्टे, पर्यटन आधारित रोजगार और स्वरोजगार योजनाएं इसी सोच का हिस्सा हैं। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
इस आयोजन का एक अहम संदेश यह भी रहा कि सरकार युवाओं को केंद्र में रखकर नीतियां बना रही है। कौशल विकास, स्वरोजगार और पर्यटन आधारित आजीविका को बढ़ावा देकर पहाड़ के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। घोड़ा लाइब्रेरी जैसे नवाचार शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं। यह पहल दर्शाती है कि सरकार केवल भौतिक ढांचे पर नहीं, बल्कि ज्ञान और सामाजिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।
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कोटाबाग में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला संदेश भी था। ₹114 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह दौरा यह स्पष्ट करता है कि उत्तराखंड सरकार विकास, संस्कृति और विरासत तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति पर काम कर रही है। अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से प्रेरित यह विकास यात्रा राज्य को आत्मनिर्भर, सशक्त और संतुलित भविष्य की ओर ले जाती दिख रही है।
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