Uttarakhand EV Policy with electric vehicles and EV charging stations in Uttarakhand
Uttarakhand EV Policy: उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तैयार की जा रही Uttarakhand EV Policy में अब नए सिरे से बदलाव की तैयारी है। मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में फैसला लिया गया कि देश के अलग-अलग राज्यों में लागू इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों का अध्ययन किया जाएगा और वहां मौजूद बेहतर प्रावधानों को उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप शामिल कर नई नीति तैयार की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसी Uttarakhand EV Policy तैयार करना है, जिससे प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़े, चार्जिंग नेटवर्क मजबूत हो और पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही रोजगार, निवेश, तकनीकी विकास और पर्यावरण संरक्षण को भी नीति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कैबिनेट में हुई EV Policy के प्रस्तावित प्रावधानों पर चर्चा
मंत्रिमंडल की बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर तैयार किए गए प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा की गई। वर्तमान प्रारूप में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को कई तरह की वित्तीय राहत देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि सरकार अब सीधे इसे लागू करने के बजाय अन्य राज्यों की नीतियों का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहती है।
मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंसीधर तिवारी के मुताबिक मौजूदा प्रस्ताव में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में 100 फीसदी तक छूट का प्रावधान रखा गया था। इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भी अलग-अलग स्तर पर प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव था।
सरकार का मानना है कि दूसरे राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने से उत्तराखंड के लिए अधिक प्रभावी और व्यावहारिक Uttarakhand EV Policy तैयार की जा सकेगी।
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पहले परिवहन विभाग ने तैयार किया था प्रारूप
उत्तराखंड में EV नीति को लेकर प्रक्रिया पिछले कुछ समय से चल रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेतु आयोग ने परिवहन विभाग के साथ मिलकर शुरुआती नीति का प्रारूप तैयार किया था।
बाद में शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी उद्योग विभाग की ओर से तैयार की जाएगी। उद्योग विभाग ने इस दिशा में काम शुरू किया, लेकिन इसके बाद यह तय किया गया कि परिवहन विभाग और उद्योग विभाग की अलग-अलग नीतियां नहीं होंगी।
इसके बजाय उद्योग विभाग की ओर से तैयार की जाने वाली नीति में परिवहन विभाग के जरूरी सुझाव और इनपुट भी शामिल किए जाएंगे। इसी समन्वित प्रक्रिया के बाद उद्योग विभाग ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया।
100 फीसदी तक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन छूट का प्रस्ताव
प्रस्तावित Uttarakhand EV Policy में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को आकर्षक बनाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों की बात कही गई है। इनमें सबसे अहम वाहन रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में 100 फीसदी तक की छूट का प्रस्ताव है।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इससे शुरुआती दौर में EV खरीदने वाले लोगों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
हालांकि ये प्रावधान अभी अंतिम नीति का हिस्सा नहीं माने जा सकते। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दूसरे राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के बाद इनमें बदलाव संभव है।
चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को बड़ी राहत का प्रस्ताव
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने के साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए Uttarakhand EV Policy के प्रारूप में चार्जिंग स्टेशनों के लिए पूंजी निवेश पर सब्सिडी का प्रस्ताव रखा गया है।
मैदानी क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन के स्थायी पूंजी निवेश का 80 फीसदी तक और पर्वतीय क्षेत्रों में 90 फीसदी तक प्रोत्साहन देने की संभावना जताई गई है। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में यह प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा 14 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 200 चार्जिंग प्लग के लिए प्रति प्लग अधिकतम 10 लाख रुपये तक और 120 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 20 चार्जिंग प्लग के लिए प्रति प्लग अधिकतम 25 लाख रुपये तक प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
Last-Mile Logistics पर रहेगा खास फोकस
नई Uttarakhand EV Policy का फोकस केवल निजी कारों या दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं रहने वाला है। नीति में Last-Mile Logistics को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया है। इसका मतलब है कि सामान की छोटी दूरी तक डिलीवरी करने वाले वाणिज्यिक वाहनों को भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही दोपहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन और कमर्शियल चारपहिया वाहनों को भी EV अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश के सबसे अधिक EV-अनुकूल पर्वतीय राज्यों में शामिल करना है।
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EV निर्माण और बैटरी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की तैयारी
नीति के मसौदे में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी उत्पादन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इससे जुड़े उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखा गया है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना चाहती है।
इसके लिए EV असेंबली, मरम्मत और रखरखाव, बैटरी रिसाइक्लिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजाइन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने की योजना है। इससे युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
तीर्थयात्रा और पर्यटन में भी बढ़ेगा EV का इस्तेमाल
उत्तराखंड में धार्मिक और पर्यटन स्थलों की संख्या अधिक होने के कारण नई Uttarakhand EV Policy में इन क्षेत्रों को भी विशेष महत्व दिया गया है। तीर्थयात्रा मार्गों, पर्यटन स्थलों और राष्ट्रीय उद्यानों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है।
इससे पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। उत्तराखंड जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य के लिए यह पहल लंबे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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प्रदूषण कम करने और Green Mobility को बढ़ावा देने का लक्ष्य
सरकार की प्रस्तावित नीति का एक बड़ा उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। EV को बढ़ावा देकर परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जाएगी।
इसके साथ ही यह नीति भारत के दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों में योगदान देने की दिशा में भी एक कदम हो सकती है। उत्तराखंड में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देकर राज्य की परिवहन व्यवस्था को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब दूसरे राज्यों की नीतियों से सीखेगा उत्तराखंड
कैबिनेट के निर्णय के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण दूसरे राज्यों की EV नीतियों का अध्ययन होगा। सरकार यह देखेगी कि अन्य राज्यों में वाहन खरीद, टैक्स छूट, चार्जिंग नेटवर्क, निवेश और औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए कौन-से प्रावधान बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
इन प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई Uttarakhand EV Policy तैयार की जाएगी। ऐसे में आने वाले समय में नीति का स्वरूप मौजूदा प्रस्ताव से अलग और अधिक व्यापक हो सकता है।
फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन कैबिनेट की चर्चा से यह स्पष्ट है कि सरकार उत्तराखंड में EV सेक्टर को मजबूत करने के लिए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है। अब निगाह इस बात पर है कि दूसरे राज्यों के अध्ययन के बाद तैयार होने वाली नई Uttarakhand EV Policy में कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाते हैं और इसका आम लोगों, निवेशकों तथा चार्जिंग क्षेत्र पर कितना असर पड़ता है।
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