Uttarakhand Ropeway Projects: CM Dhami reviews Uttarakhand Ropeway Projects and seeks progress report in 15 days
Uttarakhand Ropeway Projects: उत्तराखंड में धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए प्रस्तावित Uttarakhand Ropeway Projects की रफ्तार को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नाराजगी जताई है। सोमवार, 24 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास में हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। काम की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी-अपनी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद इन परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी।
9 नवंबर तक धरातल पर दिखनी चाहिए प्रगति
बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट समयसीमा के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस यानी 9 नवंबर तक Uttarakhand Ropeway Projects में काम की प्रगति जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
सीएम ने कहा कि केवल फाइलों में प्रक्रिया आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है। परियोजनाओं से जुड़े लंबित मामलों को तेजी से निपटाकर निर्माण और क्रियान्वयन की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी अपने-अपने जिलों में प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
भूमि और वन मंजूरी से जुड़ी अड़चनें दूर करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी परियोजना में भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, विभागीय स्वीकृति या अन्य प्रशासनिक स्तर पर समस्या है तो उसका समाधान संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी बाधाओं को लंबे समय तक लंबित न रखा जाए। जिलाधिकारी संबंधित विभागों के साथ लगातार संपर्क में रहें और जिन मामलों में स्थानीय स्तर पर समाधान संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
NHLML की 11 परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड यानी NHLML से जुड़ी रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। पहले चरण में 11 और दूसरे चरण में प्रस्तावित छह रोपवे परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई।
इसके अलावा उत्तराखंड मेट्रो रेल, शहरी अवस्थापना एवं भवन निर्माण निगम यानी UKMRC और पर्यटन विभाग से संबंधित परियोजनाओं की प्रगति भी बैठक में रखी गई। मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं को निर्धारित समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ाने को कहा।
READ: उत्तराखंड के 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में भूस्खलन और मैदानों में जलभराव का खतरा
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे पर खास जोर
धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जानकारी ली। केदारनाथ रोपवे परियोजना की प्रस्तावित लंबाई 12.90 किलोमीटर और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना की लंबाई 12.40 किलोमीटर बताई गई है।
मुख्यमंत्री ने इन दोनों परियोजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि इन रोपवे के तैयार होने से श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने में सुविधा मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
नैनीताल और मसूरी रोपवे से यातायात का दबाव होगा कम
Uttarakhand Ropeway Projects में नैनीताल और देहरादून-मसूरी रोपवे भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नैनीताल रोपवे से संबंधित कार्रवाई में तेजी लाने को कहा। नैनीताल उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और पर्यटन सीजन के दौरान यहां सड़क मार्गों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है।
इसी तरह देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान लगने वाले जाम से राहत दिलाने में रोपवे वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
READ: 117 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, आखिरी 2 शव भी बरामद, 10 मजदूरों की मौत
यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी परियोजनाएं भी एजेंडे में
बैठक में यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी समेत अन्य प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं से संबंधित लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों तक सुगम पहुंच के लिए रोपवे कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
इसके साथ ही हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना और त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं में यात्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता देने को कहा।
READ: अमरनाथ ड्यूटी से लौटते वक्त ट्रेन हादसे में मौत, तिरंगे में लिपटे जवान को नम आंखों से अंतिम विदाई
पहाड़ों के लिए रोपवे क्यों है जरूरी?
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां रोपवे परिवहन को खास महत्व देती हैं। कई धार्मिक और पर्यटन स्थल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां सड़क निर्माण और सड़क मार्ग से यात्रा करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे क्षेत्रों में रोपवे कम समय में यात्रियों को ऊंचाई वाले स्थानों तक पहुंचाने का विकल्प उपलब्ध करा सकता है।
सरकार का मानना है कि रोपवे से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। सड़क मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी इन परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
रेल, रोड और रोपवे तीनों सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में रेल, रोड और रोपवे तीनों कनेक्टिविटी माध्यम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और चारधाम ऑल वेदर रोड जैसी परियोजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।
रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और वंदे भारत जैसी सेवाओं के जरिए उत्तराखंड को बड़े शहरों से जोड़ने की दिशा में काम होने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
अब सरकार का फोकस रोपवे नेटवर्क के विस्तार पर है। नीलकंठ, हेमकुंड साहिब, केदारनाथ, मसूरी, औली और यमुनोत्री समेत कई क्षेत्रों में रोपवे परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है। काठगोदाम-नैनीताल रोपवे समेत अन्य विस्तार प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है।
ALSO READ: BOLLYWOOD NEWS |COMMONWEALTH GAME 2026 | SPORT NEWS | CRIME NEWS
15 दिन बाद होगी प्रगति की समीक्षा
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब संबंधित कार्यदायी संस्थाओं पर समयसीमा में काम पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। सभी संस्थाओं को 15 दिनों के भीतर मुख्य सचिव को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। इसके आधार पर मुख्यमंत्री दोबारा Uttarakhand Ropeway Projects की समीक्षा करेंगे।
सरकार की कोशिश है कि लंबे समय से प्रस्तावित परियोजनाएं सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहें, बल्कि उनके निर्माण और क्रियान्वयन की तस्वीर जल्द दिखाई दे। 9 नवंबर की समयसीमा को लेकर अब संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इन परियोजनाओं की गति से साफ होगा कि उत्तराखंड का रोपवे नेटवर्क जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेता है।
UTTAR PRADESH |UTTARAKHAND UPDATE |CM YOGI BREAKING |EXPLAINER TV TODAY BHARAT|WEB STORY |NATIONAL NEWS TODAY | Business Bharat
