Paper Leak Amendment Bill: Sonam Wangchuk ending his 26-day hunger strike as CJP continues its protest over the Paper Leak Amendment Bill in New Delhi
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026: Paper Leak Amendment Bill को लेकर केंद्र सरकार ने निर्णायक कदम बढ़ाया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने परीक्षा पेपर लीक के दोषियों के विरुद्ध मौजूदा कानून को और कठोर बनाने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसी बीच Sonam Wangchuk Hunger Strike 26 दिन बाद समाप्त हो गई, लेकिन CJP Protest अभी खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं।
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कानून पर मुहर, जवाबदेही पर टकराव
पेपर लीक विवाद में एक तरफ सरकार कानूनी कार्रवाई को तेज और अधिक सख्त बनाने की तैयारी कर रही है, दूसरी तरफ आंदोलनकारी राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। यही इस पूरे घटनाक्रम का नया और महत्वपूर्ण पक्ष है। Paper Leak Amendment Bill अपराधियों को दंडित करने की व्यवस्था मजबूत करेगा, लेकिन CJP Protest का कहना है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं है। Sonam Wangchuk Hunger Strike खत्म होने के बाद भी आंदोलन की मूल मांगें जस की तस बनी हुई हैं।
केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को पेपर लीक के मामलों में अधिक कठोर सजा का प्रस्ताव रखने वाले विधेयक को मंजूरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे संसद के मानसून सत्र के अगले सप्ताह में पेश किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रणाली से जुड़े अपराधों में तेज अभियोजन के लिए विशेष व्यवस्था बनाना है।
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फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनेगा बड़ा हथियार
सरकार पहले ही पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा कर चुकी है। प्रस्तावित Paper Leak Amendment Bill में भी ऐसे मामलों के लिए समर्पित और तेज न्यायिक प्रक्रिया की व्यवस्था शामिल किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को तेजी से कठोर दंड दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, किसी मामले में अनिवार्य रूप से तीन महीने के भीतर फैसला देने का स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध आधिकारिक विवरण में अभी सामने नहीं आया है। इसलिए CJP Protest से जुड़े घटनाक्रम में “तीन महीने में फैसला” लिखते समय इसे अंतिम सरकारी प्रावधान नहीं माना जाना चाहिए। Sonam Wangchuk Hunger Strike समाप्त होने के बावजूद विधेयक का पूरा आधिकारिक मसौदा सामने आने तक दंड और समयसीमा से जुड़े दावों की पुष्टि जरूरी होगी।
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₹10 करोड़ जुर्माने का दावा अभी पुष्ट नहीं
मौजूदा केंद्रीय कानून यानी Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के अनुसार सामान्य अपराध में तीन से पांच साल तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है। किसी सेवा प्रदाता पर ₹1 करोड़ तक जुर्माने के साथ परीक्षा की लागत वसूलने का प्रावधान है।
संगठित अपराध के मामले में मौजूदा कानून पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माने की व्यवस्था करता है। किसी संस्थान के संगठित अपराध में शामिल पाए जाने पर उसकी संपत्ति जब्त करने और परीक्षा की आनुपातिक लागत वसूलने का भी प्रावधान है।
नए Paper Leak Amendment Bill में सजा और जुर्माना बढ़ाए जाने की संभावना बताई गई है, लेकिन ₹10 करोड़ तक जुर्माने का निश्चित प्रावधान अभी सार्वजनिक किए गए आधिकारिक मसौदे से प्रमाणित नहीं हुआ है। इसलिए CJP Protest और Sonam Wangchuk Hunger Strike से जुड़ी खबर में ₹10 करोड़ की राशि को कैबिनेट का पुष्ट अंतिम फैसला बताना जल्दबाजी होगी।

CJP और सरकार की बातचीत में क्या हुआ?
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में Cockroach Janta Party यानी CJP के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। सरकार के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने से संबंधित तीन प्रमुख मांगें तथा कुछ सुझाव रखे। सरकार ने इन मांगों पर अगली वार्ता करने की बात कही है।
बैठक करीब 50 मिनट चली या उससे अधिक, इस संबंध में उपलब्ध आधिकारिक सरकारी बुलेटिन में कोई निश्चित अवधि नहीं बताई गई है। इसलिए बैठक की अवधि के बजाय उसके नतीजों पर ध्यान देना अधिक तथ्यपरक होगा। CJP Protest की सबसे बड़ी शर्त धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, जबकि Paper Leak Amendment Bill पर सरकार अपनी कार्रवाई को समाधान के बड़े हिस्से के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP
वार्ता के बाद CJP प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन समाप्त करने पर सहमति नहीं बनेगी। सरकार ने इस मांग पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। दोनों पक्षों के बीच आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा CJP ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने और पेपर लीक विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग रखी है। ये मांगें बताती हैं कि CJP Protest का दायरा अब केवल परीक्षा दोबारा कराने या दोषियों को जेल भेजने तक सीमित नहीं है।
26 दिन बाद वांगचुक ने तोड़ा अनशन
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन से जारी अपना अनशन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में समाप्त किया। इससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है। वांगचुक के अनशन खत्म करने के कुछ घंटे बाद दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई।
Sonam Wangchuk Hunger Strike समाप्त करने का फैसला आंदोलन के पूर्ण समापन की घोषणा नहीं था। रिपोर्टों के अनुसार, लंबी बातचीत, सरकार की ओर से मिले आश्वासन और प्रदर्शन के हिंसक होने की आशंका के बीच वांगचुक ने उपवास समाप्त किया तथा समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की।
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अनशन खत्म, आंदोलन नहीं
वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद CJP नेतृत्व ने साफ कर दिया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और दूसरी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक CJP Protest वापस नहीं लिया जाएगा।
इस प्रकार सरकार को फिलहाल केवल एक मोर्चे पर राहत मिली है। Sonam Wangchuk Hunger Strike खत्म होने से स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से जुड़ी तत्काल चिंता कम हुई है, लेकिन राजनीतिक टकराव बरकरार है। सरकार Paper Leak Amendment Bill को परीक्षा माफिया के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई बता रही है, जबकि आंदोलनकारी इसे जवाबदेही की पूरी लड़ाई का केवल एक हिस्सा मान रहे हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक में सजा, जुर्माने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की वास्तविक समयसीमा क्या होगी। दूसरा सवाल यह है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार क्या जवाब देती है। तीसरा सवाल उन पुलिस मामलों और मुआवजे की मांग का है, जिन्हें CJP ने बातचीत के दौरान प्रमुखता से उठाया है।
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पेपर लीक के खिलाफ कानून का कठोर होना छात्रों के भरोसे के लिए जरूरी कदम है, लेकिन कानून तभी प्रभावी माना जाएगा जब जांच समयबद्ध हो, आरोपियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो और परीक्षा एजेंसियों की संस्थागत जवाबदेही भी तय की जाए। यही वजह है कि अनशन टूटने के बाद भी इस आंदोलन की असली परीक्षा अभी बाकी है।
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