Delhi Police blocks 480 Pakistan-based social media accounts during Jantar Mantar protest
Delhi Police: राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। इसी क्रम में Delhi Police ने दावा किया है कि जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर भारत के बाहर से संचालित होकर आंदोलन से जुड़ी भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, 480 से अधिक पाकिस्तान-आधारित सोशल मीडिया हैंडल्स को चिन्हित किया गया है और उन्हें ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राजधानी में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से Delhi Police डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली अफवाहों और फर्जी सामग्री पर लगातार नजर रख रही है।
सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी पर बढ़ी निगरानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए छात्रों और युवाओं को प्रभावित करने वाले संदेश, एडिटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट तेजी से साझा किए जा रहे थे। प्रारंभिक जांच के आधार पर ऐसे कई अकाउंट्स की पहचान की गई, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे भारत के बाहर से संचालित हो रहे हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि इन अकाउंट्स का उद्देश्य आंदोलन से जुड़ी गलत सूचनाएं फैलाकर भ्रम की स्थिति पैदा करना और सोशल मीडिया पर तनावपूर्ण माहौल बनाना था। इसी वजह से संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इन अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का दावा, पुराने संदिग्ध नेटवर्क भी आए सामने
Delhi Police के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे डिजिटल नेटवर्क भी सामने आए हैं, जो पहले भी विभिन्न संवेदनशील घटनाओं के दौरान कथित रूप से भ्रामक सामग्री साझा करने के आरोपों में जांच एजेंसियों के रडार पर रहे थे। पुलिस का दावा है कि ऐसे नेटवर्क समय-समय पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं और लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, प्रत्येक अकाउंट के संबंध में विस्तृत तकनीकी जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं।
आंदोलन और अफवाहों को अलग-अलग देखने की जरूरत
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हैं। इस बीच पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और प्रशासन इस अधिकार का सम्मान करता है। लेकिन यदि कोई बाहरी तत्व या फर्जी डिजिटल नेटवर्क आंदोलन का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने के लिए करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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विशेषज्ञों का भी मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर फर्जी सूचनाएं तेजी से वायरल हो सकती हैं। ऐसे में नागरिकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे किसी भी वायरल पोस्ट पर तुरंत विश्वास करने के बजाय उसकी पुष्टि करें।
अभिभावकों और युवाओं से सतर्क रहने की अपील
Delhi Police ने छात्रों, युवाओं और अभिभावकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान सोशल मीडिया अकाउंट या संदिग्ध पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि—
- किसी भी वायरल वीडियो, फोटो या संदेश को बिना सत्यापन के आगे साझा न करें।
- केवल आधिकारिक सरकारी संस्थानों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें।
- सोशल मीडिया पर भावनात्मक या भड़काऊ सामग्री देखकर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें।
- यदि कोई संदिग्ध पोस्ट दिखाई दे तो संबंधित प्लेटफॉर्म या पुलिस को इसकी सूचना दें।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सतर्कता आज के समय में सार्वजनिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
डिजिटल सुरक्षा बनी नई चुनौती
सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े आंदोलन या राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे के दौरान सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार अभियान चलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में फर्जी अकाउंट, बॉट नेटवर्क और एडिटेड वीडियो का उपयोग करके लोगों की राय प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।
इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां अब केवल जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लगातार निगरानी रख रही हैं। साइबर विश्लेषण, डेटा मॉनिटरिंग और संदिग्ध गतिविधियों की तकनीकी जांच अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
आधिकारिक जानकारी पर ही करें भरोसा
Delhi Police ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील घटना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों का ही सहारा लें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर संदेश को सही मान लेना उचित नहीं है। कई बार पुराने वीडियो, संपादित तस्वीरें या संदर्भ से हटाकर साझा की गई सामग्री भी भ्रम पैदा कर सकती है।
पुलिस का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर फर्जी सूचना फैलाता है या सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कानून-व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा दोनों पर फोकस
राजधानी में मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन का जोर दो मोर्चों पर है, एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखना और दूसरी तरफ सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली गलत सूचनाओं पर नियंत्रण करना। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समय रहते कार्रवाई करने से अफवाहों को फैलने से रोका जा सकता है और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है।
फिलहाल Delhi Police की जांच जारी है। पुलिस ने कहा है कि संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और यदि आगे भी ऐसे अकाउंट सामने आते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे संयम बनाए रखें, तथ्यों की पुष्टि करें और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें।
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