UGC NET 2026 Students with a Parliament update highlighting 6% qualification rate and 11,750 annual JRF fellowships.
UGC NET परीक्षा देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार UGC NET परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने इसकी कठिनाई और प्रतिस्पर्धा की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। सरकार ने बताया है कि UGC NET में शामिल होने वाले 100 उम्मीदवारों में से केवल लगभग 6 उम्मीदवार ही सफल हो पाते हैं। इसके अलावा हर वर्ष सिर्फ 11,750 उम्मीदवारों को ही Junior Research Fellowship (JRF) प्रदान की जाती है।
लोकसभा के मानसून सत्र में यह मुद्दा उस समय चर्चा में आया जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने UGC NET, JRF और रिसर्च फेलोशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल सरकार के सामने रखे। उनके सवालों का लिखित जवाब केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने दिया। इस जवाब में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने शोध और उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
संसद में क्या बताया सरकार ने?
सरकार ने स्पष्ट किया कि UGC NET परीक्षा का उद्देश्य केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र उम्मीदवारों का चयन करना ही नहीं, बल्कि शोध के लिए योग्य अभ्यर्थियों की पहचान करना भी है। हालांकि परीक्षा में शामिल होने वाले कुल उम्मीदवारों में से केवल लगभग 6 प्रतिशत ही ऐसे होते हैं जो असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता हासिल कर पाते हैं।
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सरकार के अनुसार, इन्हीं सफल उम्मीदवारों में से सीमित संख्या को Junior Research Fellowship (JRF) दी जाती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रत्येक वर्ष केवल 11,750 JRF स्लॉट उपलब्ध हैं। इसका मतलब यह है कि NET क्वालिफाई करने वाले सभी उम्मीदवारों को JRF नहीं मिलती।
UGC NET की प्रतिस्पर्धा क्यों है इतनी कठिन?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में UGC NET परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ी है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं के साथ-साथ पीएचडी और रिसर्च में करियर बनाने वाले छात्र भी इस परीक्षा में भाग लेते हैं।
सीमित JRF सीटें और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हर वर्ष हजारों योग्य उम्मीदवार फेलोशिप से वंचित रह जाते हैं। यही वजह है कि UGC NET केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं रह गई, बल्कि देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल हो चुकी है।
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शशि थरूर ने सरकार से क्या पूछा?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में सरकार से पूछा था कि क्या सरकार UGC NET क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों और उपलब्ध JRF सीटों के बीच बढ़ते अंतर को लेकर कोई अध्ययन कर रही है? साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार भविष्य में JRF की संख्या बढ़ाने या पात्रता नियमों में बदलाव करने की योजना बना रही है। इसके अलावा उन्होंने रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाली फेलोशिप राशि और उसमें संभावित संशोधन को लेकर भी सवाल उठाए।
सरकार का जवाब क्या रहा?
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने अपने लिखित जवाब में कहा कि UGC NET के माध्यम से हर वर्ष केवल 6 प्रतिशत उम्मीदवारों को असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता मिलती है। वहीं UGC द्वारा तय 11,750 स्लॉट के अनुसार ही Junior Research Fellowship प्रदान की जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि केवल UGC ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के कई मंत्रालय, अनुसंधान संस्थान और अन्य सरकारी संगठन भी अलग-अलग प्रकार की रिसर्च फेलोशिप उपलब्ध कराते हैं।
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सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांग (PwD) और Single Girl Child जैसी श्रेणियों के शोधार्थियों के लिए अलग-अलग विशेष फेलोशिप योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।
JRF क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
Junior Research Fellowship (JRF) केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि शोध करियर की मजबूत शुरुआत मानी जाती है। JRF मिलने वाले उम्मीदवारों को पीएचडी के दौरान मासिक फेलोशिप, शोध कार्यों के लिए अतिरिक्त सहायता और कई अकादमिक अवसर मिलते हैं।
इसी वजह से हर वर्ष लाखों उम्मीदवार UGC NET JRF हासिल करने का लक्ष्य लेकर परीक्षा देते हैं। लेकिन सीमित सीटों के कारण केवल चुनिंदा उम्मीदवार ही इस लाभ तक पहुंच पाते हैं।
शशि थरूर क्यों नहीं हुए संतुष्ट?
सरकार के जवाब के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने उनके कई महत्वपूर्ण सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि NET क्वालिफाई करने वाले योग्य उम्मीदवारों और JRF सीटों के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए कोई योजना बनाई जा रही है या नहीं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि UGC Non-NET Fellowship, जो वर्तमान में 8,000 रुपये प्रतिमाह है, उसमें संशोधन को लेकर भी सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी।
रिसर्च सेक्टर के सामने क्या हैं चुनौतियां?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए केवल UGC NET की पात्रता पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है कि अधिक संख्या में फेलोशिप उपलब्ध कराई जाएं ताकि योग्य शोधार्थी आर्थिक कारणों से शोध कार्य बीच में छोड़ने को मजबूर न हों।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों में रिक्त शिक्षकों के पदों को समय पर भरना, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और फेलोशिप राशि को महंगाई के अनुरूप संशोधित करना भी समय की मांग माना जा रहा है।
आगे क्या उम्मीद?
उच्च शिक्षा से जुड़े लाखों छात्र अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या सरकार भविष्य में UGC NET के माध्यम से मिलने वाली JRF की संख्या बढ़ाने या फेलोशिप व्यवस्था में सुधार करने का कोई बड़ा फैसला लेती है। फिलहाल संसद में दिए गए जवाब ने यह स्पष्ट कर दिया है कि UGC NET की प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में भी बेहद कठिन बनी रहने वाली है और JRF हासिल करना पहले की तरह ही बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।
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