Electronics Manufacturing projects worth ₹7,877 crore approved by government in India
Electronics Manufacturing: भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सोमवार, 17 अगस्त को Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹7,877 करोड़ का निवेश किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से देश में करीब ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने की क्षमता विकसित होगी।
इस फैसले को भारत की Electronics Manufacturing क्षमता बढ़ाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में देश की हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का फोकस इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और देश में नई तकनीक से जुड़े उद्योग विकसित करने पर है।
31 नए प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी
ECMS के तहत स्वीकृत किए गए 31 प्रोजेक्ट्स अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़े हैं। सरकार का मानना है कि इन निवेशों से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों का पूरा इकोसिस्टम मजबूत होगा।
Electronics Manufacturing को बढ़ावा देने वाली इन परियोजनाओं में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित होने और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
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75 हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद
नई परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के मोर्चे पर देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स से करीब 75,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा लगभग 2.5 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, पैकेजिंग, सर्विस और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। इस तरह Electronics Manufacturing सेक्टर आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है।
ECMS ने शुरुआती लक्ष्य को भी पीछे छोड़ा
सरकार के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत अब तक कुल ₹69,548 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। यह रकम योजना के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है।
अब तक कुल 106 कंपनियों को योजना के तहत मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 38 कंपनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि 16 कंपनियों की परियोजनाएं निर्माण के चरण में हैं। सरकार के मुताबिक उत्पादन शुरू होने के साथ देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू निर्माण को और गति मिलने की उम्मीद है।
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Wipro समेत कई बड़ी कंपनियों को मंजूरी
ताजा मंजूरियों में कई प्रमुख कंपनियों के निवेश प्रस्ताव भी शामिल हैं। Wipro Global Engineering को करीब ₹1,401 करोड़ के निवेश की अनुमति मिली है।
इसके अलावा Micromax Precision Moulding को ₹565 करोड़, PCBL Chemical को ₹329 करोड़ और Minda Instruments को ₹270 करोड़ के निवेश की मंजूरी दी गई है।
VVDN Technologies, Mitsubishi Electric, Centum Electronics और Syrma SGS जैसी कंपनियों को भी अलग-अलग परियोजनाओं के लिए स्वीकृति मिली है।
इन कंपनियों के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलने के साथ भारत की Electronics Manufacturing सप्लाई चेन में भी विस्तार होने की उम्मीद है।
शेयर बाजार में भी दिख सकता है असर
नई परियोजनाओं की मंजूरी के बाद संबंधित कंपनियों के शेयरों पर बाजार की नजर रहने की संभावना है। Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसी कंपनियों के निवेश प्रस्तावों को लेकर निवेशक गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।
हालांकि किसी कंपनी को सरकारी मंजूरी मिलना उसके शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश का फैसला कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
सिर्फ निवेश नहीं, क्वालिटी पर भी सरकार का जोर
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद सरकार ने इंडस्ट्री के सामने कुछ चुनौतियों को भी रखा है। अश्विनी वैष्णव ने स्थानीय स्तर पर डिजाइन क्षमता विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।
उनका कहना है कि भारत को केवल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में डिजाइन, रिसर्च, कंपोनेंट निर्माण और पूरी सप्लाई चेन विकसित करने की जरूरत है।
मंत्री ने उत्पादों की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग में उच्च गुणवत्ता वाले मानकों का पालन करने पर जोर दिया।
टैलेंट की कमी भी बड़ी चुनौती
भारत में Electronics Manufacturing का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ कुशल कर्मचारियों की जरूरत भी बढ़ रही है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक योग्य और प्रशिक्षित टैलेंट उपलब्ध कराना है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिजाइन, इंजीनियरिंग और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ युवाओं की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है। ऐसे में स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री आधारित ट्रेनिंग पर अधिक ध्यान देना जरूरी होगा।
बजट में भी ECMS को मिला बड़ा बढ़ावा
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बजट 2026-27 में भी योजना का आवंटन बढ़ाया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को ECMS का बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ करने का ऐलान किया था। यह बढ़ोतरी बताती है कि सरकार भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण को लंबी अवधि की औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत होगी भारत की भूमिका
भारत लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। ECMS जैसी योजनाओं के जरिए सरकार घरेलू कंपनियों के साथ वैश्विक कंपनियों को भी भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
अगर नई परियोजनाएं निर्धारित समय पर उत्पादन शुरू करती हैं और स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होती है, तो भारत की Electronics Manufacturing क्षमता में बड़ा विस्तार हो सकता है। इससे देश न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और उत्पादों का महत्वपूर्ण निर्माण केंद्र भी बन सकता है।
₹7,877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उत्पादन, निवेश और रोजगार के साथ-साथ डिजाइन और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है, तो आने वाले वर्षों में Electronics Manufacturing भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार के प्रमुख ग्रोथ इंजन में शामिल हो सकता है।
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