9 Carat Gold jewellery trend among young buyers in India
9 Carat Gold: सोने की कीमतों में लगातार तेजी के बीच भारतीय ज्वेलरी बाजार में कम कैरेट वाले सोने की मांग बढ़ती नजर आ रही है। खासकर 9 Carat Gold को युवा खरीदारों और पहली बार ज्वेलरी खरीदने वालों के बीच पसंद किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह 22 कैरेट की तुलना में कम कीमत और रोजमर्रा में पहनने के लिए उपलब्ध नए डिजाइन बताए जा रहे हैं।
सोने की महंगाई ने जहां पारंपरिक 22 कैरेट ज्वेलरी की खरीदारी को प्रभावित किया है, वहीं 9 Carat Gold Jewellery ने बाजार में एक अलग जगह बनानी शुरू कर दी है। ज्वेलर्स के मुताबिक, ग्राहक अब केवल सोने की शुद्धता ही नहीं, बल्कि कीमत, डिजाइन और पहनने की सुविधा को भी ध्यान में रख रहे हैं।
सोने की कीमत बढ़ी तो बदली खरीदारों की पसंद
वित्त वर्ष 2026 में सोने की कीमतों में करीब 52 फीसदी की वृद्धि और खपत में 21 फीसदी की गिरावट ने ज्वेलरी कारोबार के सामने नई चुनौती खड़ी की। महंगे सोने के कारण कई ग्राहक बड़ी और भारी ज्वेलरी खरीदने के बजाय हल्के और कम कीमत वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
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इसी बदलाव का फायदा 9 Carat Gold को मिलता दिखाई दे रहा है। ज्वेलर्स का मानना है कि कम कैरेट की ज्वेलरी उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बन रही है जो सोने की ज्वेलरी पहनना चाहते हैं, लेकिन ज्यादा बजट खर्च नहीं करना चाहते।
ICRA के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में सोने की खपत में और गिरावट की संभावना है। ऐसे माहौल में कम कैरेट वाले प्रोडक्ट ज्वेलरी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण कैटेगरी बन सकते हैं।
9 Carat Gold की बिक्री उम्मीद के मुताबिक बढ़ी
ज्वेलरी कंपनियां भी 9 Carat Gold Jewellery की बढ़ती मांग को लेकर उत्साहित हैं। CaratLane के चीफ कैटेगरी मर्चेंडाइजिंग एंड डिजाइन ऑफिसर पीयूष सेठ के मुताबिक, कंपनी की कुल ज्वेलरी बिक्री में 9 कैरेट कैटेगरी की हिस्सेदारी करीब 5 से 10 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
वहीं, कामा ज्वेलरी की सेल्स वाइस प्रेसिडेंट सिमरन शाह ने मीडिया रिपोर्ट्स में बताया कि कंपनी की बिक्री में 9 कैरेट कैटेगरी का योगदान 25 फीसदी से अधिक है। इसके बाद 14 कैरेट ज्वेलरी की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी और 18 कैरेट की हिस्सेदारी लगभग 12-15 फीसदी बताई गई।
हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के बिक्री आंकड़े सीधे तौर पर पूरे बाजार की हिस्सेदारी नहीं बताते। फिर भी ये आंकड़े संकेत देते हैं कि 9 Carat Gold को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
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9 कैरेट और 22 कैरेट में कितना अंतर?
सोने की ज्वेलरी खरीदते समय कैरेट उसकी शुद्धता बताता है। 24 कैरेट सोना सबसे ज्यादा शुद्ध माना जाता है, जबकि ज्वेलरी में मजबूती और डिजाइन के लिहाज से दूसरी धातुओं को मिलाकर अलग-अलग कैरेट तैयार किए जाते हैं।
- 24 Carat Gold: करीब 99.9 फीसदी शुद्ध सोना
- 22 Carat Gold: करीब 91.6 फीसदी शुद्ध सोना
- 18 Carat Gold: 75 फीसदी शुद्ध सोना
- 14 Carat Gold: करीब 58.5 फीसदी शुद्ध सोना
- 9 Carat Gold: 37.5 फीसदी शुद्ध सोना
यानी 9 Carat Gold में सोने की मात्रा 22 कैरेट के मुकाबले काफी कम होती है। इसी वजह से इसका बेस मेटल वैल्यू कम रहती है और कई मामलों में ज्वेलरी की शुरुआती कीमत भी कम हो सकती है।
हालांकि, केवल कैरेट के आधार पर ज्वेलरी की अंतिम कीमत तय नहीं होती। मेकिंग चार्ज, डिजाइन, ब्रांड, रत्न या डायमंड और अन्य शुल्क भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।
युवा और पहली बार खरीदने वाले ग्राहक आगे
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 9 Carat Gold Jewellery का सबसे बड़ा ग्राहक वर्ग युवा कामकाजी लोग और पहली बार ज्वेलरी खरीदने वाले हो सकते हैं। कॉलेज के बाद नौकरी शुरू करने वाले युवा या अपनी पहली कमाई से गहना खरीदने वाले ग्राहक कम बजट में आकर्षक डिजाइन चाहते हैं।
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इस वर्ग के लिए भारी पारंपरिक ज्वेलरी की तुलना में हल्की चेन, अंगूठी, ईयररिंग, ब्रेसलेट और दूसरे रोजमर्रा के डिजाइन ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं। यही वजह है कि ज्वेलरी कंपनियां 9 कैरेट कैटेगरी में फैशन और रोजाना पहनने वाले डिजाइन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
निवेश के लिए 9 Carat Gold कितना बेहतर?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 9 Carat Gold को केवल कम कीमत देखकर निवेश के विकल्प के तौर पर नहीं देखना चाहिए। इसमें शुद्ध सोने की मात्रा 22 या 24 कैरेट की तुलना में काफी कम होती है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल 9 कैरेट ज्वेलरी को पारंपरिक गोल्ड इन्वेस्टमेंट के बजाय एक अफोर्डेबल लाइफस्टाइल और फैशन कैटेगरी के रूप में देखा जा रहा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि 9 कैरेट ज्वेलरी की कोई वैल्यू नहीं है। बल्कि इसका प्रमुख फायदा यह है कि सीमित बजट में ग्राहक सोने की ज्वेलरी और आधुनिक डिजाइन का विकल्प चुन सकते हैं।
शादी और त्योहारों में 22 कैरेट का दबदबा कायम
भारत में सोने की खरीदारी सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं है। शादियों, त्योहारों और शुभ अवसरों पर सोना खरीदने की परंपरा काफी मजबूत है। ऐसे मौकों पर 22 कैरेट सोने की मांग अभी भी सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है।
जानकारों का मानना है कि 9 Carat Gold फिलहाल 22 कैरेट का सीधा विकल्प नहीं बन रहा है। बल्कि दोनों अलग-अलग ग्राहक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। जहां 22 कैरेट पारंपरिक और बड़ी खरीदारी में मजबूत है, वहीं 9 कैरेट रोजमर्रा की ज्वेलरी, गिफ्टिंग और सेल्फ-पर्चेज में अपनी जगह बना रहा है।
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आगे और बढ़ सकता है 9 Carat Gold का बाजार
सोने की कीमतों में तेजी अगर लंबे समय तक जारी रहती है तो कम कैरेट वाली ज्वेलरी की मांग और बढ़ सकती है। खासकर युवा ग्राहक बजट और डिजाइन के बीच संतुलन तलाश रहे हैं।
हालांकि, 9 Carat Gold खरीदने से पहले ग्राहक को हॉलमार्क, शुद्धता, मेकिंग चार्ज, बिल और बायबैक नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। कम कीमत का मतलब हमेशा बेहतर डील नहीं होता।
महंगे सोने के दौर में 9 कैरेट ज्वेलरी भारतीय बाजार में एक नई उपभोक्ता कैटेगरी के तौर पर उभर रही है। यह 22 कैरेट की पारंपरिक ज्वेलरी को खत्म करने के बजाय उन ग्राहकों को जोड़ रही है, जो कम बजट में प्रमाणित और फैशन-फ्रेंडली सोने की ज्वेलरी खरीदना चाहते हैं।
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